सीबीएसई OSM विवाद: कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा, ठेकेदार COEMPT पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस ने 1 जून 2026 को एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग दोहराई, जब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्वीकार किया कि उसकी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में तकनीकी खामियाँ थीं। पार्टी ने बोर्ड के उस इरादे पर भी सवाल उठाया जिसमें प्रक्रिया में कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठेकेदार COEMPT को केवल जुर्माने से दंडित करने की बात कही गई है।
जयराम रमेश का एक्स पर हमला
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री को न तो स्वयं और न ही अपने सहयोगियों को नैतिकता और सत्यनिष्ठा के किसी भी मानक के प्रति जवाबदेह माना जाता है। उन्होंने कहा, 'लेकिन शिक्षा मंत्री को अपना 'राजधर्म' निभाने के लिए इस्तीफा देना चाहिए।'
रमेश ने यह बयान उस दिन के एक दिन बाद दिया जब सीबीएसई ने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में उत्तर पुस्तिकाओं की विसंगतियों और अन्य खामियों से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
OSM प्रणाली में खामी की स्वीकृति
रमेश के अनुसार, सीबीएसई ने पहले OSM प्रणाली में साइबर सुरक्षा खामियों से इनकार किया था, लेकिन बाद में माना कि प्रणाली में कमियाँ थीं। उन्होंने पूछा कि ठेकेदार COEMPT के खिलाफ आखिर क्या ठोस कार्रवाई की जाएगी। सीबीएसई द्वारा ठेकेदार पर जुर्माना लगाने की खबर की क्लिप संलग्न करते हुए रमेश ने आरोप लगाया कि बोर्ड और शिक्षा मंत्रालय में COEMPT से लाभ उठाने वाले लोग पहले से जानते थे कि यह ठेकेदार इस काम के लिए सक्षम नहीं होगा।
ब्लैकलिस्टिंग अधिकार वापस लेने का विवाद
रमेश ने एक अहम तथ्य उजागर किया — सीबीएसई ने अगस्त 2025 के अपने आरएफपी (RFP) में काम पूरा करने में विफल रहने वाले विक्रेताओं को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार सुरक्षित रखा था। लेकिन सितंबर 2025 में एक शुद्धिपत्र जारी कर बोर्ड ने यह अधिकार वापस ले लिया। कांग्रेस नेता ने इसे 'COEMPT को बचाने का एक समझ से परे, सरकार-समर्थित प्रयास' करार दिया, जो कथित तौर पर COEMPT को आधिकारिक अनुबंध मिलने से पहले ही शुरू हो गया था।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
शिक्षा मंत्रालय या सीबीएसई की ओर से कांग्रेस के नवीनतम आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब लाखों छात्रों के मूल्यांकन परिणामों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगे हुए हैं। आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे पर और तीखी बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।