18 जुलाई 2026
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सीबीएसई OSM विवाद: कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा, ठेकेदार COEMPT पर उठाए सवाल

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सीबीएसई OSM विवाद: कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा, ठेकेदार COEMPT पर उठाए सवाल

सारांश

सीबीएसई ने OSM प्रणाली में खामी मानी, लेकिन ठेकेदार COEMPT पर केवल जुर्माने की कार्रवाई की बात कही। कांग्रेस का आरोप — ब्लैकलिस्टिंग का अधिकार सितंबर 2025 में शुद्धिपत्र से वापस लेना COEMPT को बचाने की सरकार-समर्थित कोशिश थी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग फिर तेज।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने 1 जून 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग दोहराई।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने एक्स पर आरोप लगाया कि COEMPT को बचाने की कोशिश अनुबंध मिलने से पहले ही शुरू हो गई थी।
सीबीएसई ने पहले साइबर खामी से इनकार किया, बाद में OSM प्रणाली में कमियाँ स्वीकार कीं।
अगस्त 2025 के RFP में ब्लैकलिस्टिंग का अधिकार था, जिसे सितंबर 2025 में शुद्धिपत्र से वापस लिया गया।
शिक्षा मंत्रालय या सीबीएसई की ओर से नवीनतम आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

कांग्रेस ने 1 जून 2026 को एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग दोहराई, जब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्वीकार किया कि उसकी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में तकनीकी खामियाँ थीं। पार्टी ने बोर्ड के उस इरादे पर भी सवाल उठाया जिसमें प्रक्रिया में कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठेकेदार COEMPT को केवल जुर्माने से दंडित करने की बात कही गई है।

जयराम रमेश का एक्स पर हमला

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री को न तो स्वयं और न ही अपने सहयोगियों को नैतिकता और सत्यनिष्ठा के किसी भी मानक के प्रति जवाबदेह माना जाता है। उन्होंने कहा, 'लेकिन शिक्षा मंत्री को अपना 'राजधर्म' निभाने के लिए इस्तीफा देना चाहिए।'

रमेश ने यह बयान उस दिन के एक दिन बाद दिया जब सीबीएसई ने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में उत्तर पुस्तिकाओं की विसंगतियों और अन्य खामियों से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

OSM प्रणाली में खामी की स्वीकृति

रमेश के अनुसार, सीबीएसई ने पहले OSM प्रणाली में साइबर सुरक्षा खामियों से इनकार किया था, लेकिन बाद में माना कि प्रणाली में कमियाँ थीं। उन्होंने पूछा कि ठेकेदार COEMPT के खिलाफ आखिर क्या ठोस कार्रवाई की जाएगी। सीबीएसई द्वारा ठेकेदार पर जुर्माना लगाने की खबर की क्लिप संलग्न करते हुए रमेश ने आरोप लगाया कि बोर्ड और शिक्षा मंत्रालय में COEMPT से लाभ उठाने वाले लोग पहले से जानते थे कि यह ठेकेदार इस काम के लिए सक्षम नहीं होगा।

ब्लैकलिस्टिंग अधिकार वापस लेने का विवाद

रमेश ने एक अहम तथ्य उजागर किया — सीबीएसई ने अगस्त 2025 के अपने आरएफपी (RFP) में काम पूरा करने में विफल रहने वाले विक्रेताओं को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार सुरक्षित रखा था। लेकिन सितंबर 2025 में एक शुद्धिपत्र जारी कर बोर्ड ने यह अधिकार वापस ले लिया। कांग्रेस नेता ने इसे 'COEMPT को बचाने का एक समझ से परे, सरकार-समर्थित प्रयास' करार दिया, जो कथित तौर पर COEMPT को आधिकारिक अनुबंध मिलने से पहले ही शुरू हो गया था।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह

शिक्षा मंत्रालय या सीबीएसई की ओर से कांग्रेस के नवीनतम आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब लाखों छात्रों के मूल्यांकन परिणामों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगे हुए हैं। आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे पर और तीखी बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जवाबदेही की जानबूझकर छूट जैसा प्रतीत होता है। यह ऐसे समय में है जब लाखों छात्रों के अंक और भविष्य दाँव पर हैं। OSM प्रणाली की खामी को पहले नकारना और फिर स्वीकार करना बोर्ड की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है। असली परीक्षा अब यह है कि क्या संसदीय दबाव में जाँच की माँग किसी स्वतंत्र समिति तक पहुँचती है, या यह विवाद भी राजनीतिक बयानबाजी तक सिमट कर रह जाता है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीएसई OSM विवाद क्या है?
सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में तकनीकी खामियों के कारण उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में विसंगतियाँ सामने आईं। बोर्ड ने पहले साइबर सुरक्षा खामी से इनकार किया, लेकिन बाद में प्रणाली में कमियाँ स्वीकार कीं।
कांग्रेस ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों माँगा?
कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में सीबीएसई ने COEMPT जैसे अक्षम ठेकेदार को OSM प्रणाली का काम सौंपा और बाद में उसे ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार भी वापस ले लिया। पार्टी इसे नैतिक जिम्मेदारी का मामला मानती है।
COEMPT कौन है और इसका विवाद से क्या संबंध है?
COEMPT वह ठेकेदार है जिसे सीबीएसई ने OSM प्रणाली के संचालन का अनुबंध दिया था। कांग्रेस के अनुसार, सीबीएसई ने सितंबर 2025 में एक शुद्धिपत्र जारी कर COEMPT जैसे विक्रेताओं को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार वापस ले लिया, जो अगस्त 2025 के RFP में मूल रूप से शामिल था।
ब्लैकलिस्टिंग अधिकार वापस लेने का क्या महत्व है?
अगस्त 2025 के RFP में सीबीएसई ने काम में विफल रहने वाले विक्रेताओं को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार रखा था। सितंबर 2025 में इसे शुद्धिपत्र से हटाने को कांग्रेस COEMPT को जवाबदेही से बचाने की कोशिश मान रही है, जो कथित तौर पर अनुबंध मिलने से पहले ही शुरू हो गई थी।
इस विवाद का छात्रों पर क्या असर पड़ा?
OSM प्रणाली की खामियों के कारण पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में विसंगतियाँ आईं, जिससे लाखों छात्रों के अंकों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे। सीबीएसई ने शिकायतों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन स्वतंत्र जाँच की माँग अभी लंबित है।
राष्ट्र प्रेस
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