13 जुलाई 2026
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सीबीएसई ओएसएम विवाद: 12वीं के छात्रों की माँग — 'पूरी तरह तैयार हो तब लागू हो यह सिस्टम'

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सीबीएसई ओएसएम विवाद: 12वीं के छात्रों की माँग — 'पूरी तरह तैयार हो तब लागू हो यह सिस्टम'

सारांश

सीबीएसई ने 12वीं बोर्ड में पहली बार ओएसएम लागू किया, लेकिन धुंधली स्कैन कॉपी, गलत अंकांकन और एक छात्र को दूसरे की उत्तर-पुस्तिका दिखने जैसी गंभीर खामियाँ सामने आई हैं। वडोदरा के छात्रों की एक ही माँग है — पहले सिस्टम को दुरुस्त करो, फिर लागू करो।

मुख्य बातें

सीबीएसई ने 2025 में पहली बार कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली लागू की।
वडोदरा के छात्रों ने धुंधली स्कैन कॉपी, गलत अंकांकन और लंबी पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया की शिकायत की।
छात्र वेदांत को ओएसएम पोर्टल पर अपनी फिजिक्स कॉपी की जगह किसी अन्य छात्र की उत्तर-पुस्तिका दिखी — गंभीर डेटा सुरक्षा चूक।
शिक्षिका पूर्वी शाह सहित सभी छात्रों ने माँग की कि ओएसएम पूरी तरह तकनीकी रूप से परिपक्व होने तक भौतिक जाँच जारी रहे।
सीबीएसई की ओर से अब तक इन शिकायतों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में पहली बार लागू किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम को लेकर छात्रों में गहरी चिंता व्याप्त है। 27 मई को गुजरात के वडोदरा स्थित आईपी ट्यूटोरियल के छात्र-छात्राओं ने इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में तकनीकी खामियों और उनके भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएँ दर्ज कराईं। छात्रों का कहना है कि जब तक यह प्रणाली पूरी तरह विकसित और सुरक्षित न हो जाए, तब तक इसे 12वीं कक्षा पर सीधे लागू नहीं किया जाना चाहिए।

ओएसएम सिस्टम में क्या हैं शिकायतें

छात्रों ने कई ठोस तकनीकी समस्याएँ गिनाईं। एक छात्र ने बताया कि ओएसएम प्रणाली उत्तर-पुस्तिकाओं को गलत तरीके से जाँच रही है, जिससे अंकों का मूल्यांकन त्रुटिपूर्ण हो रहा है। उनके अनुसार स्कैन की गई कॉपियाँ धुंधली आती हैं, जिससे परीक्षक को उत्तर स्पष्ट रूप से पढ़ने में कठिनाई होती है। छात्र ने माँग की कि सीबीएसई ओएसएम की गति के साथ-साथ उसकी सटीकता, स्पष्टता और डेटा सुरक्षा पर भी ध्यान दे।

छात्र आयुष चौरसिया ने कहा कि ओएसएम एक नई प्रणाली है और इसे सीधे 12वीं कक्षा पर लागू करना उचित नहीं था। उनके अनुसार, नई तकनीक में गलतियों की गुंजाइश स्वाभाविक रूप से अधिक होती है, और यही देखने को मिला है, जिससे छात्रों में अनावश्यक तनाव बढ़ रहा है।

डेटा सुरक्षा पर भी उठे सवाल

छात्रा ईशा पटेल ने एक गंभीर मामले का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वेदांत नामक एक छात्र ने जब ओएसएम पोर्टल पर अपने फिजिक्स के पेपर की समीक्षा के लिए अनुरोध किया, तो उसे किसी अन्य छात्र की उत्तर-पुस्तिका दिख गई। यह घटना डेटा गोपनीयता और सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत चिंताजनक है। ईशा ने माँग की कि जब तक ओएसएम में अनिवार्य सुधार नहीं होते, तब तक भौतिक माध्यम से ही कॉपियाँ जाँची जाएँ।

शिक्षक और अन्य छात्रों की प्रतिक्रिया

आईपी ट्यूटोरियल की शिक्षिका पूर्वी शाह ने स्वीकार किया कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली भविष्य की दिशा है, लेकिन उन्होंने कहा कि इस वर्ष सीबीएसई की ओर से जो लापरवाही बरती गई, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, ओएसएम की तकनीकी कमियाँ बच्चों के अंकों और उनके भविष्य दोनों को प्रभावित कर रही हैं।

छात्र विहान पटेल ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि पहली बार लागू होने पर गलतियाँ हो सकती हैं, और उन्हें सीबीएसई पर भरोसा है कि बोर्ड जल्द ही आवश्यक सुधार करेगा। हालाँकि उन्होंने यह भी माना कि इन खामियों का असर छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है।

आम शिकायतों का सारांश

छात्रा आर्या ने ओएसएम की उद्देश्य-परक समीक्षा करते हुए बताया कि यह प्रणाली कॉपियों की तीव्र और सटीक जाँच तथा लागत में कमी के लक्ष्य से लागू की गई थी। लेकिन व्यवहार में कई छात्रों ने पाया कि उनकी कॉपी में पृष्ठ कम थे, स्कैन धुंधले थे, जाँच सही नहीं हुई और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया अत्यंत लंबी है। आर्या ने सीबीएसई से अनुरोध किया कि जब तक ओएसएम पूरी तरह तकनीकी रूप से परिपक्व न हो जाए, इसे 12वीं कक्षा पर न थोपा जाए, क्योंकि बोर्ड परीक्षा का एक-एक अंक छात्रों के करियर को प्रभावित करता है।

आगे क्या होगा

सीबीएसई की ओर से अभी तक इन शिकायतों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है। छात्रों और शिक्षकों की सामूहिक माँग है कि बोर्ड ओएसएम प्रणाली की समीक्षा करे, डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करे और तब तक पुरानी भौतिक जाँच प्रणाली को विकल्प के रूप में बनाए रखे। यह मामला देशभर के लाखों 12वीं के छात्रों के मूल्यांकन की विश्वसनीयता से जुड़ा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि डेटा गोपनीयता का उल्लंघन है। बोर्ड को चाहिए था कि पहले कक्षा 10 या आंतरिक परीक्षाओं में ओएसएम को परखे, फिर 12वीं पर लागू करे। जब तक स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट और पारदर्शी शिकायत-निवारण तंत्र नहीं बनता, छात्रों का बोर्ड पर भरोसा डिजिटलीकरण की रफ्तार से पिछड़ता रहेगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीएसई ओएसएम सिस्टम क्या है और यह कैसे काम करता है?
ओएसएम यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है जिसमें छात्रों की उत्तर-पुस्तिकाओं को स्कैन कर परीक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर जाँचते हैं। सीबीएसई ने इसे 2025 में पहली बार कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में लागू किया, जिसका उद्देश्य जाँच में तेजी, सटीकता और लागत में कमी लाना था।
छात्रों को ओएसएम से क्या-क्या समस्याएँ आ रही हैं?
छात्रों ने मुख्यतः चार समस्याएँ बताई हैं — स्कैन की गई कॉपियाँ धुंधली होना, अंकों का गलत मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया का अत्यंत लंबा होना और डेटा सुरक्षा में सेंध। एक मामले में एक छात्र को पोर्टल पर अपनी जगह किसी अन्य छात्र की उत्तर-पुस्तिका दिखी।
क्या सीबीएसई ने इन शिकायतों पर कोई जवाब दिया है?
अब तक सीबीएसई की ओर से इन शिकायतों पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। छात्रों और शिक्षकों का आग्रह है कि बोर्ड तत्काल तकनीकी समीक्षा करे और जब तक सुधार न हो, भौतिक जाँच का विकल्प बनाए रखे।
छात्र और शिक्षक सीबीएसई से क्या माँग कर रहे हैं?
छात्रों और शिक्षिका पूर्वी शाह की साझा माँग है कि ओएसएम को तब तक 12वीं कक्षा पर लागू न किया जाए जब तक वह पूरी तरह तकनीकी रूप से परिपक्व, सुरक्षित और सटीक न हो जाए। तब तक पुरानी भौतिक उत्तर-पुस्तिका जाँच प्रणाली जारी रखी जाए।
ओएसएम की खामियाँ 12वीं के छात्रों के लिए इतनी गंभीर क्यों हैं?
कक्षा 12वीं के बोर्ड परीक्षा के अंक उच्च शिक्षा में प्रवेश, छात्रवृत्ति और करियर की दिशा तय करते हैं। एक-एक अंक का महत्व होने के कारण किसी भी तकनीकी त्रुटि का सीधा असर छात्र के भविष्य पर पड़ता है, जिसे बाद में सुधारना कठिन होता है।
राष्ट्र प्रेस
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