सीबीएसई ओएसएम विवाद: 12वीं के छात्रों की माँग — 'पूरी तरह तैयार हो तब लागू हो यह सिस्टम'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में पहली बार लागू किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम को लेकर छात्रों में गहरी चिंता व्याप्त है। 27 मई को गुजरात के वडोदरा स्थित आईपी ट्यूटोरियल के छात्र-छात्राओं ने इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में तकनीकी खामियों और उनके भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएँ दर्ज कराईं। छात्रों का कहना है कि जब तक यह प्रणाली पूरी तरह विकसित और सुरक्षित न हो जाए, तब तक इसे 12वीं कक्षा पर सीधे लागू नहीं किया जाना चाहिए।
ओएसएम सिस्टम में क्या हैं शिकायतें
छात्रों ने कई ठोस तकनीकी समस्याएँ गिनाईं। एक छात्र ने बताया कि ओएसएम प्रणाली उत्तर-पुस्तिकाओं को गलत तरीके से जाँच रही है, जिससे अंकों का मूल्यांकन त्रुटिपूर्ण हो रहा है। उनके अनुसार स्कैन की गई कॉपियाँ धुंधली आती हैं, जिससे परीक्षक को उत्तर स्पष्ट रूप से पढ़ने में कठिनाई होती है। छात्र ने माँग की कि सीबीएसई ओएसएम की गति के साथ-साथ उसकी सटीकता, स्पष्टता और डेटा सुरक्षा पर भी ध्यान दे।
छात्र आयुष चौरसिया ने कहा कि ओएसएम एक नई प्रणाली है और इसे सीधे 12वीं कक्षा पर लागू करना उचित नहीं था। उनके अनुसार, नई तकनीक में गलतियों की गुंजाइश स्वाभाविक रूप से अधिक होती है, और यही देखने को मिला है, जिससे छात्रों में अनावश्यक तनाव बढ़ रहा है।
डेटा सुरक्षा पर भी उठे सवाल
छात्रा ईशा पटेल ने एक गंभीर मामले का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वेदांत नामक एक छात्र ने जब ओएसएम पोर्टल पर अपने फिजिक्स के पेपर की समीक्षा के लिए अनुरोध किया, तो उसे किसी अन्य छात्र की उत्तर-पुस्तिका दिख गई। यह घटना डेटा गोपनीयता और सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत चिंताजनक है। ईशा ने माँग की कि जब तक ओएसएम में अनिवार्य सुधार नहीं होते, तब तक भौतिक माध्यम से ही कॉपियाँ जाँची जाएँ।
शिक्षक और अन्य छात्रों की प्रतिक्रिया
आईपी ट्यूटोरियल की शिक्षिका पूर्वी शाह ने स्वीकार किया कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली भविष्य की दिशा है, लेकिन उन्होंने कहा कि इस वर्ष सीबीएसई की ओर से जो लापरवाही बरती गई, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, ओएसएम की तकनीकी कमियाँ बच्चों के अंकों और उनके भविष्य दोनों को प्रभावित कर रही हैं।
छात्र विहान पटेल ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि पहली बार लागू होने पर गलतियाँ हो सकती हैं, और उन्हें सीबीएसई पर भरोसा है कि बोर्ड जल्द ही आवश्यक सुधार करेगा। हालाँकि उन्होंने यह भी माना कि इन खामियों का असर छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है।
आम शिकायतों का सारांश
छात्रा आर्या ने ओएसएम की उद्देश्य-परक समीक्षा करते हुए बताया कि यह प्रणाली कॉपियों की तीव्र और सटीक जाँच तथा लागत में कमी के लक्ष्य से लागू की गई थी। लेकिन व्यवहार में कई छात्रों ने पाया कि उनकी कॉपी में पृष्ठ कम थे, स्कैन धुंधले थे, जाँच सही नहीं हुई और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया अत्यंत लंबी है। आर्या ने सीबीएसई से अनुरोध किया कि जब तक ओएसएम पूरी तरह तकनीकी रूप से परिपक्व न हो जाए, इसे 12वीं कक्षा पर न थोपा जाए, क्योंकि बोर्ड परीक्षा का एक-एक अंक छात्रों के करियर को प्रभावित करता है।
आगे क्या होगा
सीबीएसई की ओर से अभी तक इन शिकायतों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है। छात्रों और शिक्षकों की सामूहिक माँग है कि बोर्ड ओएसएम प्रणाली की समीक्षा करे, डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करे और तब तक पुरानी भौतिक जाँच प्रणाली को विकल्प के रूप में बनाए रखे। यह मामला देशभर के लाखों 12वीं के छात्रों के मूल्यांकन की विश्वसनीयता से जुड़ा है।