सीबीएसई ओएसएम विवाद: धर्मेंद्र प्रधान की चेतावनी — जानबूझकर गड़बड़ी पाई तो किसी को नहीं बख्शूंगा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 28 मई 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली में यदि कोई जानबूझकर की गई लापरवाही या गड़बड़ी सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में आई कमियों की जिम्मेदारी वे स्वयं स्वीकार करते हैं।
ओएसएम प्रणाली का दायरा और पैमाना
प्रधान ने बताया कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने इस बार परीक्षा में शामिल 17 लाख छात्रों की लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा है। प्रत्येक उत्तर पुस्तिका में औसतन 40 पन्ने होने के कारण कुल मिलाकर करीब 40 करोड़ स्कैन किए गए पेज इस प्रक्रिया का हिस्सा बने। उन्होंने इसे सीबीएसई के इतिहास में पहली बार ओएसएम के माध्यम से पूरा किया गया मूल्यांकन अभियान बताया।
तकनीकी खामियाँ और सुधार के कदम
प्रणाली में सामने आई तकनीकी और परिचालन संबंधी खामियों को दूर करने के लिए आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास की विशेषज्ञ टीमों को जाँच का काम सौंपा गया है। मंत्री ने बताया कि ये टीमें सक्रिय रूप से समाधान पर काम कर रही हैं। इसके अलावा, भुगतान प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए वित्त मंत्री से भी अनुरोध किया गया है। अब सीबीएसई पोर्टल को भारतीय स्टेट बैंक (SBI), इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के पेमेंट गेटवे से जोड़ दिया गया है।
राहुल गांधी की आलोचना पर पलटवार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा सीबीएसई परीक्षा प्रक्रिया में कथित विसंगतियों पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए प्रधान ने कहा कि सीबीएसई पहले ही अपना स्पष्टीकरण जारी कर चुका है। उन्होंने कांग्रेस नेता पर सरकार की हर सुधार पहल — चाहे वह एसआईआर प्रक्रिया हो, ईवीएम हों या डिजिटल इंडिया — का विरोध करने का आरोप लगाया। प्रधान ने कहा कि लगातार चुनावी हार की वजह से राहुल गांधी की सोच में निराशा आ गई है और वे भारत की वैज्ञानिक व तकनीकी प्रगति के साथ कदम नहीं मिला पा रहे।
छात्रों के हित और राजनीतिकरण पर चिंता
मंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि छात्रों से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण न किया जाए। उन्होंने कहा, 'छात्र पहले से ही तनाव में हैं और हमें उनके बीच और ज्यादा चिंता पैदा करने से बचना चाहिए।' ओएसएम को एक प्रगतिशील और छात्र-हितैषी पहल बताते हुए उन्होंने कहा कि दुनियाभर के विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थान पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसी तरह की प्रणालियाँ अपना रहे हैं।
जवाबदेही और आगे की राह
प्रधान ने दोहराया कि लोकतंत्र में हर कोई जवाबदेह है और सरकार सवालों के जवाब देने से पीछे नहीं हटेगी। गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले बुधवार को सीबीएसई ने राहुल गांधी के ओएसएम प्रणाली पर लगाए गए आरोपों को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया था। आईआईटी विशेषज्ञ टीमों की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है।