13 जुलाई 2026
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सीबीएसई ओएसएम विवाद: धर्मेंद्र प्रधान की चेतावनी — जानबूझकर गड़बड़ी पाई तो किसी को नहीं बख्शूंगा

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सीबीएसई ओएसएम विवाद: धर्मेंद्र प्रधान की चेतावनी — जानबूझकर गड़बड़ी पाई तो किसी को नहीं बख्शूंगा

सारांश

सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली विवाद में घिरी है — 40 करोड़ स्कैन पेज, 17 लाख छात्र और तकनीकी खामियाँ। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जवाबदेही स्वीकारी, IIT टीमें जाँच में लगाईं और चेतावनी दी कि जानबूझकर गड़बड़ी मिली तो किसी को नहीं बख्शा जाएगा।

मुख्य बातें

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 28 मई 2026 को कहा कि सीबीएसई ओएसएम में जानबूझकर गड़बड़ी पाई गई तो सख्त कार्रवाई होगी।
इस बार 17 लाख छात्रों की 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं के करीब 40 करोड़ स्कैन पेज ओएसएम के जरिए मूल्यांकित किए गए।
तकनीकी खामियों की जाँच के लिए आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास की विशेषज्ञ टीमें लगाई गई हैं।
सीबीएसई पोर्टल को SBI, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के पेमेंट गेटवे से जोड़ा गया।
प्रधान ने राहुल गांधी पर हर सुधार पहल का विरोध करने का आरोप लगाया; राजनीतिक दलों से छात्र मुद्दों का राजनीतिकरण न करने की अपील की।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 28 मई 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली में यदि कोई जानबूझकर की गई लापरवाही या गड़बड़ी सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में आई कमियों की जिम्मेदारी वे स्वयं स्वीकार करते हैं।

ओएसएम प्रणाली का दायरा और पैमाना

प्रधान ने बताया कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने इस बार परीक्षा में शामिल 17 लाख छात्रों की लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा है। प्रत्येक उत्तर पुस्तिका में औसतन 40 पन्ने होने के कारण कुल मिलाकर करीब 40 करोड़ स्कैन किए गए पेज इस प्रक्रिया का हिस्सा बने। उन्होंने इसे सीबीएसई के इतिहास में पहली बार ओएसएम के माध्यम से पूरा किया गया मूल्यांकन अभियान बताया।

तकनीकी खामियाँ और सुधार के कदम

प्रणाली में सामने आई तकनीकी और परिचालन संबंधी खामियों को दूर करने के लिए आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास की विशेषज्ञ टीमों को जाँच का काम सौंपा गया है। मंत्री ने बताया कि ये टीमें सक्रिय रूप से समाधान पर काम कर रही हैं। इसके अलावा, भुगतान प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए वित्त मंत्री से भी अनुरोध किया गया है। अब सीबीएसई पोर्टल को भारतीय स्टेट बैंक (SBI), इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के पेमेंट गेटवे से जोड़ दिया गया है।

राहुल गांधी की आलोचना पर पलटवार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा सीबीएसई परीक्षा प्रक्रिया में कथित विसंगतियों पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए प्रधान ने कहा कि सीबीएसई पहले ही अपना स्पष्टीकरण जारी कर चुका है। उन्होंने कांग्रेस नेता पर सरकार की हर सुधार पहल — चाहे वह एसआईआर प्रक्रिया हो, ईवीएम हों या डिजिटल इंडिया — का विरोध करने का आरोप लगाया। प्रधान ने कहा कि लगातार चुनावी हार की वजह से राहुल गांधी की सोच में निराशा आ गई है और वे भारत की वैज्ञानिक व तकनीकी प्रगति के साथ कदम नहीं मिला पा रहे।

छात्रों के हित और राजनीतिकरण पर चिंता

मंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि छात्रों से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण न किया जाए। उन्होंने कहा, 'छात्र पहले से ही तनाव में हैं और हमें उनके बीच और ज्यादा चिंता पैदा करने से बचना चाहिए।' ओएसएम को एक प्रगतिशील और छात्र-हितैषी पहल बताते हुए उन्होंने कहा कि दुनियाभर के विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थान पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसी तरह की प्रणालियाँ अपना रहे हैं।

जवाबदेही और आगे की राह

प्रधान ने दोहराया कि लोकतंत्र में हर कोई जवाबदेह है और सरकार सवालों के जवाब देने से पीछे नहीं हटेगी। गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले बुधवार को सीबीएसई ने राहुल गांधी के ओएसएम प्रणाली पर लगाए गए आरोपों को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया था। आईआईटी विशेषज्ञ टीमों की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 40 करोड़ पेज के डिजिटल मूल्यांकन की इतनी बड़ी प्रणाली को बिना पर्याप्त पायलट परीक्षण के लागू क्यों किया गया। आईआईटी टीमों को जाँच सौंपना समस्या के बाद की प्रतिक्रिया है — पहले से की गई सावधानी नहीं। राहुल गांधी पर निशाना साधना राजनीतिक दृष्टि से समझ में आता है, लेकिन इससे उन 17 लाख छात्रों के वैध सवालों का जवाब नहीं मिलता जिनके अंक और भविष्य दाँव पर हैं। जब तक आईआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती और जवाबदेही के ठोस नतीजे सामने नहीं आते, तब तक यह बयान महज आश्वासन ही रहेगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली क्या है और इसमें विवाद क्यों हुआ?
ओएसएम एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है जिसमें छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके परीक्षकों द्वारा कंप्यूटर स्क्रीन पर जाँचा जाता है। इस बार सीबीएसई ने पहली बार इस प्रणाली के जरिए 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया, जिसमें तकनीकी और परिचालन संबंधी खामियाँ सामने आईं और छात्रों व विपक्ष ने सवाल उठाए।
धर्मेंद्र प्रधान ने ओएसएम विवाद पर क्या कहा?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 28 मई 2026 को कहा कि प्रणाली में आई कमियों की जिम्मेदारी वे स्वयं लेते हैं और यदि कोई जानबूझकर की गई गड़बड़ी पाई गई तो जिम्मेदार लोगों को नहीं बख्शा जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि किसी भी छात्र के सवाल का जवाब बिना मिले नहीं रहेगा।
सीबीएसई ओएसएम की तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास की विशेषज्ञ टीमों को तकनीकी और परिचालन मुद्दों की जाँच व समाधान का काम सौंपा गया है। इसके अलावा सीबीएसई पोर्टल को SBI, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के पेमेंट गेटवे से जोड़ा गया है।
राहुल गांधी ने सीबीएसई ओएसएम पर क्या आरोप लगाए और सरकार ने क्या जवाब दिया?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीबीएसई परीक्षा प्रक्रिया में कथित विसंगतियों पर सवाल उठाए थे। बुधवार को सीबीएसई ने उनके आरोपों को आधिकारिक रूप से खारिज किया, जबकि शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि राहुल गांधी सरकार की हर सुधार पहल का विरोध करते रहे हैं।
सीबीएसई ओएसएम विवाद से छात्रों पर क्या असर पड़ा है?
इस विवाद से 17 लाख छात्र सीधे प्रभावित हुए हैं जिनकी 98 लाख उत्तर पुस्तिकाएँ ओएसएम प्रणाली के तहत मूल्यांकित की गई हैं। शिक्षा मंत्री ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि छात्र पहले से तनाव में हैं, इसलिए इस मुद्दे का राजनीतिकरण न किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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