सीबीएसई 12वीं में ओएसएम प्रणाली: 68 हजार से अधिक कॉपियाँ दोबारा स्कैन, शिक्षा मंत्रालय ने दी सफाई
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 17 मई 2026 को सीबीएसई कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में लागू की गई ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। परिणाम घोषित होने के बाद छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की ओर से उठाई गई बड़ी संख्या में शिकायतों के बीच मंत्रालय ने इस डिजिटल मूल्यांकन पद्धति का बचाव किया और पुनर्मूल्यांकन की विशेष व्यवस्था की घोषणा की।
क्या है ओएसएम प्रणाली और इसे क्यों लागू किया गया
मंत्रालय के अनुसार, ऑन स्क्रीन मार्किंग को वैश्विक स्तर पर मानकीकृत मूल्यांकन की एक प्रभावी तकनीक माना जाता है। इस प्रणाली में उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर परीक्षकों को ऑनलाइन माध्यम से मूल्यांकन के लिए उपलब्ध कराया जाता है। इससे जोड़-घटाव और सारणीकरण की मानवीय गलतियाँ समाप्त होती हैं, प्रत्येक उत्तर का मूल्यांकन सुनिश्चित होता है और निर्धारित मार्किंग स्कीम के अनुसार एकरूपता बनाए रखी जाती है।
मंत्रालय ने बताया कि सीबीएसई ने इस प्रणाली को पहली बार वर्ष 2014 में लागू करने का प्रयास किया था, किंतु उस समय स्कैनिंग से जुड़ी तकनीकी कठिनाइयों के कारण इसे जारी नहीं रखा जा सका। वर्ष 2026 में इसे उन्नत तकनीकी व्यवस्थाओं, सुरक्षित नेटवर्क और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के साथ पुनः लागू किया गया।
स्कैनिंग में खामियाँ और मैन्युअल मूल्यांकन
सीबीएसई ने स्वीकार किया कि इस वर्ष कुल 98 लाख 66 हजार 222 उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग की गई, जिनमें से 68 हजार से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं को खराब स्कैनिंग गुणवत्ता के कारण दोबारा स्कैन करना पड़ा। इसके अतिरिक्त, लगभग 13,583 उत्तर पुस्तिकाओं की गुणवत्ता लगातार असंतोषजनक पाई गई।
परिणाम में देरी और छात्रों की बढ़ती चिंता को देखते हुए इन कॉपियों का मूल्यांकन मैन्युअल तरीके से कराया गया और प्राप्त अंक प्रणाली में अपलोड किए गए। शुरुआती चरण में कुछ स्कूलों को सुरक्षित नेटवर्क अनुमति प्रणाली में कठिनाई हुई, कई शिक्षकों को लॉगिन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा और आरंभिक दिनों में सर्वर पर अत्यधिक दबाव के कारण डाउनलोड में भी व्यवधान आया। बाद में इन सभी समस्याओं को तकनीकी सहायता के माध्यम से दूर किया गया।
छात्रों और अभिभावकों की शिकायतें
परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि खराब स्कैनिंग के कारण कई उत्तर स्क्रीन पर स्पष्ट दिखाई नहीं दिए, जिससे अंक प्रभावित हुए। कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि चरणबद्ध अंकन प्रणाली में वैकल्पिक या शॉर्टकट विधियों से हल किए गए उत्तरों को पर्याप्त अंक नहीं दिए गए। विशेष रूप से गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान विषयों को लेकर सर्वाधिक शिकायतें सामने आईं।
गौरतलब है कि कुछ ऐसे छात्रों के भी कम अंक आने पर सवाल उठे जिन्होंने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था। मंत्रालय का कहना है कि परीक्षक इस बार विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार मार्किंग स्कीम का अधिक कड़ाई से पालन कर रहे थे, जिसके कारण वर्ष 2026 में कुल उत्तीर्ण प्रतिशत और औसत अंक में मामूली गिरावट दर्ज हुई। भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित और लेखा जैसे विषयों में उच्च ग्रेड के लिए आवश्यक कट-ऑफ कुछ अंकों तक नीचे गई।
प्रशिक्षण और तैयारी की प्रक्रिया
मंत्रालय के अनुसार, इस प्रणाली के लिए जनवरी 2026 से ही तैयारी शुरू कर दी गई थी। शुरुआत में पाँच स्कूलों में परीक्षण किया गया, इसके बाद शिक्षकों के लिए प्रदर्शन और प्रशिक्षण सत्र आयोजित हुए। 13 फरवरी को देशभर के शिक्षकों के लिए एक वेबिनार आयोजित किया गया जिसे लाखों लोगों ने देखा। 15 फरवरी से शिक्षकों को पुराने वर्षों की उत्तर पुस्तिकाओं पर अभ्यास की सुविधा दी गई और 7 मार्च से वास्तविक मूल्यांकन कार्य प्रारंभ हुआ।
मूल्यांकन प्रक्रिया के अंतर्गत परीक्षा केंद्रों से कॉपियाँ प्राप्त होने के बाद गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई गई। स्कैनिंग के बाद गुणवत्ता जाँच की कई स्तरों पर व्यवस्था की गई। कॉपियों को अलग-अलग क्षेत्रों में भेजा गया ताकि गोपनीयता बनी रहे। इसके बाद परीक्षकों ने ऑनलाइन माध्यम से मूल्यांकन किया और सहायक मुख्य परीक्षक तथा मुख्य परीक्षक स्तर पर पुनः जाँच की गई।
पुनर्मूल्यांकन और आगे की राह
शिकायतों के मद्देनजर सीबीएसई ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन प्रति उपलब्ध कराने, सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की विस्तृत प्रक्रिया शुरू की है। नई व्यवस्था के तहत छात्र पहले संबंधित विषय की स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका प्राप्त कर सकेंगे और स्वयं जाँच सकेंगे कि मूल्यांकन सही हुआ है या नहीं। यदि कोई त्रुटि प्रतीत होती है तो छात्र अपनी टिप्पणियों के साथ बोर्ड को सूचित कर सकेगा, जिसके बाद विषय विशेषज्ञों की समिति मामले की जाँच कर अंतिम निर्णय लेगी। यह व्यवस्था ओएसएम प्रणाली में जनता का विश्वास बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।