13 जुलाई 2026
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सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली पर मिर्जापुर की प्रिंसिपल कंचन श्रीवास्तव बोलीं — 'विदेशों में भी सफल, 17.6 लाख छात्रों को मिला फायदा'

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सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली पर मिर्जापुर की प्रिंसिपल कंचन श्रीवास्तव बोलीं — 'विदेशों में भी सफल, 17.6 लाख छात्रों को मिला फायदा'

सारांश

सीबीएसई ने इस वर्ष पहली बार 12वीं बोर्ड में ओएसएम प्रणाली लागू की — 17.6 लाख छात्रों की 40 करोड़ कॉपियाँ डिजिटल रूप में जाँची गईं। मिर्जापुर की प्रिंसिपल कंचन श्रीवास्तव ने इसे 'सराहनीय' बताया और कहा कि यह प्रणाली विदेशों में भी सफलतापूर्वक लागू है।

मुख्य बातें

सीबीएसई ने 2026 में पहली बार 12वीं बोर्ड के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली अपनाई।
17.6 लाख विद्यार्थियों की करीब 40 करोड़ कॉपियाँ स्कैन कर डिजिटल रूप में जाँची गईं।
सनबीम स्कूल, मिर्जापुर की प्रिंसिपल कंचन श्रीवास्तव ने प्रणाली को 'काफी सराहनीय' बताया।
शिक्षकों को मूल्यांकन से पहले आईडी, पासवर्ड और ओटीपी आधारित प्रैक्टिस सेशन दिए गए।
मूल्यांकन तय समय सीमा के भीतर पूरा हुआ; गलतियों की गुंजाइश न के बराबर रही।
यह प्रणाली विदेशों की यूनिवर्सिटी सहित देश के कई विश्वविद्यालयों में पहले से लागू है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने इस वर्ष पहली बार 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली लागू की, जिसके तहत 17.6 लाख विद्यार्थियों की करीब 40 करोड़ कॉपियाँ डिजिटल रूप में स्कैन कर शिक्षकों द्वारा ऑनस्क्रीन जाँची गईं। इस पहल को लेकर जहाँ शिक्षा जगत में सराहना हो रही है, वहीं कुछ छात्रों की शिकायतें भी सामने आई हैं।

प्रिंसिपल की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर स्थित सनबीम स्कूल की प्रिंसिपल कंचन श्रीवास्तव ने गुरुवार, 28 मई 2026 को इस प्रणाली को 'काफी सराहनीय' बताया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब 12वीं कक्षा की आंसर शीट को ओएसएम सिस्टम के तहत जाँचा गया है और इस प्रक्रिया ने मूल्यांकन को अधिक व्यवस्थित बनाया है।

उन्होंने बताया कि कॉपियों को पहले स्कैन कर डिजिटल रूप में परिवर्तित किया गया, इसके बाद शिक्षकों ने आंसर शीट को ऑनस्क्रीन ही जाँचा। आईडी, पासवर्ड और ओटीपी के माध्यम से शिक्षकों को सुरक्षित लॉगिन प्रदान किया गया था।

शिक्षकों की तैयारी और प्रशिक्षण

श्रीवास्तव ने बताया कि सीबीएसई ने मूल्यांकन शुरू होने से पहले ही सभी पीजीटी शिक्षकों को ओएसएम प्रणाली के लिए प्रैक्टिस सेशन दिए थे — चाहे उनका नाम मूल्यांकन सूची में हो या नहीं। शिक्षकों को स्टेप-बाय-स्टेप बताया गया कि सिस्टम में लॉगिन कैसे करना है, ओटीपी कैसे जेनरेट होगा, कितने टूल्स उपलब्ध हैं और एक पेज से दूसरे पेज पर कैसे जाना है।

स्कूल प्रिंसिपलों ने भी यह सुनिश्चित किया कि उनके पीजीटी शिक्षकों को ओएसएम की पर्याप्त प्रैक्टिस और एक्सपोजर मिले। इस तैयारी के चलते मूल्यांकन तय समय सीमा के भीतर पूरा हुआ और गलतियों की गुंजाइश न के बराबर रही।

शिक्षा मंत्री का पक्ष

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि ओएसएम प्रणाली ने कक्षा 12वीं के मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बना दिया है। उनके अनुसार, स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं और पुनर्मूल्यांकन की सुविधा का उद्देश्य सटीकता में सुधार करना और छात्रों को उनके मूल्यांकन विवरण तक बेहतर पहुँच प्रदान करना है।

अंतरराष्ट्रीय अनुभव और भविष्य की संभावनाएँ

प्रिंसिपल कंचन श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि ओएसएम जैसी ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली पहले से ही देश के कई विश्वविद्यालयों सहित विदेशों की यूनिवर्सिटी में अपनाई जा चुकी है और इसकी सफलता दर भी उत्साहजनक रही है। यह तथ्य सीबीएसई के इस कदम को एक वैश्विक शैक्षिक प्रवृत्ति के अनुरूप बनाता है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी परीक्षा प्रणाली को अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। हालाँकि, कुछ छात्रों की शिकायतें अभी भी सामने आ रही हैं, जिनके समाधान की दिशा में सीबीएसई के अगले कदम महत्वपूर्ण होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी वे शिकायतें हैं जो छात्रों की ओर से सामने आ रही हैं — जिनका स्रोत में विस्तार नहीं है। 40 करोड़ कॉपियों का डिजिटलीकरण एक बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि है, पर यदि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया सुलभ और त्वरित नहीं हुई तो पारदर्शिता का दावा खोखला रह जाएगा। विदेशी विश्वविद्यालयों में इस प्रणाली की सफलता का संदर्भ उत्साहजनक है, किंतु भारत में 17.6 लाख छात्रों के पैमाने पर पहली बार लागू करने में तकनीकी और मानवीय चुनौतियाँ स्वाभाविक हैं। सीबीएसई को छात्रों की शिकायतों का सार्वजनिक और समयबद्ध समाधान देना होगा, अन्यथा यह सुधार भी 'घोषणा-केंद्रित' ही रह जाएगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली क्या है?
ओएसएम यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को पहले स्कैन कर डिजिटल रूप में बदला जाता है और फिर शिक्षक उन्हें कंप्यूटर स्क्रीन पर जाँचते हैं। सीबीएसई ने इसे 2026 में पहली बार 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन के लिए लागू किया।
इस वर्ष कितने छात्रों की कॉपियाँ ओएसएम से जाँची गईं?
इस वर्ष 17.6 लाख विद्यार्थियों ने 12वीं बोर्ड परीक्षा दी, जिनकी कुल मिलाकर करीब 40 करोड़ कॉपियाँ स्कैन कर डिजिटल रूप में जाँची गईं।
शिक्षकों को ओएसएम के लिए कैसे तैयार किया गया?
सीबीएसई ने मूल्यांकन से पहले सभी पीजीटी शिक्षकों को आईडी, पासवर्ड और ओटीपी आधारित प्रैक्टिस सेशन दिए। उन्हें लॉगिन प्रक्रिया, उपलब्ध टूल्स और पेज नेविगेशन की स्टेप-बाय-स्टेप जानकारी दी गई।
क्या ओएसएम प्रणाली विदेशों में भी लागू है?
हाँ, सनबीम स्कूल मिर्जापुर की प्रिंसिपल कंचन श्रीवास्तव के अनुसार, यह प्रणाली पहले से ही देश के कई विश्वविद्यालयों सहित विदेशों की यूनिवर्सिटी में अपनाई जा चुकी है और इसकी सफलता दर भी उत्साहजनक रही है।
ओएसएम प्रणाली को लेकर छात्रों की क्या शिकायतें हैं?
स्रोत के अनुसार, ओएसएम प्रणाली को लेकर कुछ छात्रों की शिकायतें सामने आई हैं, हालाँकि उनका विस्तृत ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। सीबीएसई और संबंधित अधिकारियों से इन शिकायतों के समाधान की अपेक्षा की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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