सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली पर मिर्जापुर की प्रिंसिपल कंचन श्रीवास्तव बोलीं — 'विदेशों में भी सफल, 17.6 लाख छात्रों को मिला फायदा'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने इस वर्ष पहली बार 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली लागू की, जिसके तहत 17.6 लाख विद्यार्थियों की करीब 40 करोड़ कॉपियाँ डिजिटल रूप में स्कैन कर शिक्षकों द्वारा ऑनस्क्रीन जाँची गईं। इस पहल को लेकर जहाँ शिक्षा जगत में सराहना हो रही है, वहीं कुछ छात्रों की शिकायतें भी सामने आई हैं।
प्रिंसिपल की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर स्थित सनबीम स्कूल की प्रिंसिपल कंचन श्रीवास्तव ने गुरुवार, 28 मई 2026 को इस प्रणाली को 'काफी सराहनीय' बताया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब 12वीं कक्षा की आंसर शीट को ओएसएम सिस्टम के तहत जाँचा गया है और इस प्रक्रिया ने मूल्यांकन को अधिक व्यवस्थित बनाया है।
उन्होंने बताया कि कॉपियों को पहले स्कैन कर डिजिटल रूप में परिवर्तित किया गया, इसके बाद शिक्षकों ने आंसर शीट को ऑनस्क्रीन ही जाँचा। आईडी, पासवर्ड और ओटीपी के माध्यम से शिक्षकों को सुरक्षित लॉगिन प्रदान किया गया था।
शिक्षकों की तैयारी और प्रशिक्षण
श्रीवास्तव ने बताया कि सीबीएसई ने मूल्यांकन शुरू होने से पहले ही सभी पीजीटी शिक्षकों को ओएसएम प्रणाली के लिए प्रैक्टिस सेशन दिए थे — चाहे उनका नाम मूल्यांकन सूची में हो या नहीं। शिक्षकों को स्टेप-बाय-स्टेप बताया गया कि सिस्टम में लॉगिन कैसे करना है, ओटीपी कैसे जेनरेट होगा, कितने टूल्स उपलब्ध हैं और एक पेज से दूसरे पेज पर कैसे जाना है।
स्कूल प्रिंसिपलों ने भी यह सुनिश्चित किया कि उनके पीजीटी शिक्षकों को ओएसएम की पर्याप्त प्रैक्टिस और एक्सपोजर मिले। इस तैयारी के चलते मूल्यांकन तय समय सीमा के भीतर पूरा हुआ और गलतियों की गुंजाइश न के बराबर रही।
शिक्षा मंत्री का पक्ष
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि ओएसएम प्रणाली ने कक्षा 12वीं के मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बना दिया है। उनके अनुसार, स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं और पुनर्मूल्यांकन की सुविधा का उद्देश्य सटीकता में सुधार करना और छात्रों को उनके मूल्यांकन विवरण तक बेहतर पहुँच प्रदान करना है।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव और भविष्य की संभावनाएँ
प्रिंसिपल कंचन श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि ओएसएम जैसी ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली पहले से ही देश के कई विश्वविद्यालयों सहित विदेशों की यूनिवर्सिटी में अपनाई जा चुकी है और इसकी सफलता दर भी उत्साहजनक रही है। यह तथ्य सीबीएसई के इस कदम को एक वैश्विक शैक्षिक प्रवृत्ति के अनुरूप बनाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी परीक्षा प्रणाली को अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। हालाँकि, कुछ छात्रों की शिकायतें अभी भी सामने आ रही हैं, जिनके समाधान की दिशा में सीबीएसई के अगले कदम महत्वपूर्ण होंगे।