सीबीएसई का ऑनमार्क पोर्टल विवाद: IIT और सरकारी साइबर विशेषज्ञ सिस्टम को कर रहे मज़बूत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 31 मई 2026 को स्वीकार किया कि ऑनमार्क पोर्टल — जो 12वीं कक्षा की परीक्षा सेवाओं के लिए उपयोग किया जाता है — में कमज़ोरियाँ सामने आई हैं, और उन्हें दूर करने के लिए आईआईटी तथा विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की एक विशेष टीम तैनात की गई है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब नए ऑनस्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम की तकनीकी खामियों और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों में चिंता बढ़ रही है।
मुख्य घटनाक्रम
सीबीएसई ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, 'हम अपने सर्विस प्रोवाइडर के ऑनमार्क पोर्टल में उन कमज़ोरियों पर करीब से नज़र रख रहे हैं जिन्हें सार्वजनिक डोमेन में फ़्लैग किया जा रहा है।' बोर्ड के अनुसार, पहचानी गई कमज़ोरियों को नियंत्रित कर लिया गया है और संभावित रूप से दोहन योग्य अन्य कमज़ोरियों को भी दूर किया जा रहा है। साइबर सुरक्षा टीम को सिस्टम को अधिक सुरक्षित ढाँचे पर स्थानांतरित करने का काम भी सौंपा गया है।
बोर्ड ने उन सतर्क नागरिकों और एथिकल हैकर्स का आभार व्यक्त किया जिन्होंने कमज़ोरियों की सूचना दी। सीबीएसई ने कहा कि उसने उनमें से कुछ से सीधे संपर्क किया है और शेष से अपील की है कि वे अतिरिक्त जानकारी के लिए बोर्ड की सुरक्षा टीम से संपर्क करें।
ओएसएम सिस्टम पर विवाद की पृष्ठभूमि
रिपोर्टों के अनुसार, 12वीं कक्षा के मूल्यांकन के दौरान तकनीकी गड़बड़ियाँ सामने आईं, जिसके बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने अपने अंकों में अचानक बदलाव देखा और मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुँच की माँग की। आंतरिक समीक्षा से कथित तौर पर पता चला कि बोर्ड ने देशव्यापी पायलट प्रोजेक्ट के बिना ही इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लागू कर दिया।
गौरतलब है कि 68,000 से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं को दोबारा स्कैन करना पड़ा, जबकि लगभग 13,500 उत्तर पुस्तिकाओं को छवि-गुणवत्ता संबंधी तकनीकी समस्याओं के कारण मैनुअल सत्यापन से गुज़रना पड़ा। यह संख्या डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
डेटा उल्लंघन के आरोपों पर सीबीएसई का स्पष्टीकरण
सीबीएसई ने उन आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया जिनमें दावा किया गया था कि सिस्टम में डेटा उल्लंघन हुआ या हैकिंग के ज़रिये उसे कमज़ोर किया गया। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि एक साइबर सुरक्षा शोधकर्ता द्वारा उजागर किया गया वेब लिंक एक परीक्षण वातावरण से जुड़ा था जिसमें नमूना जानकारी थी — न कि वास्तविक परीक्षा मूल्यांकन या छात्र डेटा वाले लाइव पोर्टल से। बोर्ड ने दोहराया कि लाइव मूल्यांकन अवसंरचना में कोई उल्लंघन नहीं हुआ।
आम जनता और छात्रों पर असर
यह विवाद उन लाखों छात्रों को प्रभावित करता है जिन्होंने इस वर्ष 12वीं कक्षा की परीक्षा दी। अंकों में अचानक बदलाव और उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुँच की माँग ने अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता को और गहरा कर दिया है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बिना पर्याप्त परीक्षण के किसी बड़े डिजिटल सिस्टम को लागू करना जोखिमपूर्ण होता है।
आगे क्या होगा
सीबीएसई अधिकारियों के अनुसार, सिस्टम की विश्वसनीयता सुधारने, साइबर सुरक्षा सुरक्षा को मज़बूत करने और मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान उठाई गई चिंताओं को दूर करने के प्रयास जारी हैं। बोर्ड ने परीक्षा सेवाओं की अखंडता सुनिश्चित करने का भी आश्वासन दिया है। विशेषज्ञ टीम द्वारा की जा रही जाँच के नतीजे और सुधारात्मक कदम आने वाले दिनों में सामने आने की उम्मीद है।