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सीबीएसई ओएसएम प्रणाली में गड़बड़ी: जयराम रमेश ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा

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सीबीएसई ओएसएम प्रणाली में गड़बड़ी: जयराम रमेश ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा

सारांश

सीबीएसई की नई ओएसएम प्रणाली बड़े विवाद में घिर गई है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने 12वीं का पास प्रतिशत तीन अंक गिरने और मूल्यांकन में कई खामियों का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा है — यह सवाल उठाते हुए कि डिजिटल व्यवस्था लागू करने से पहले पर्याप्त तैयारी क्यों नहीं की गई।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने 25 मई को एक्स पर पोस्ट कर सीबीएसई ओएसएम प्रणाली में कथित अनियमितताओं को उजागर किया।
दावा: इस वर्ष 12वीं का पास प्रतिशत 88% से घटकर 85% हो गया — तीन प्रतिशत अंकों की गिरावट ।
आरोपों में धुंधली उत्तर पुस्तिकाएँ, गलत अंकन , गलत उत्तर पुस्तिकाएँ मिलना, भुगतान में देरी और अत्यधिक री-इवैल्यूएशन फीस शामिल।
जयराम रमेश ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा माँगा।
तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए आईआईटी कानपुर को शामिल करने पर भी सवाल उठाए गए।

कांग्रेस के महासचिव एवं सांसद जयराम रमेश ने सोमवार, 25 मई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्र सरकार पर सीबीएसई (CBSE) की 12वीं बोर्ड परीक्षा में नई 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम)' प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर तीखा हमला बोला। उनका आरोप है कि इस डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था की खामियों के चलते देशभर में लाखों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य अनिश्चितता में पड़ गया है।

मुख्य आरोप: क्या है ओएसएम विवाद

ओएसएम प्रणाली एक डिजिटल मूल्यांकन पद्धति है जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया जाता है, छात्रों की पहचान छिपाने के लिए उन्हें डिजिटल रूप से मास्क किया जाता है और फिर शिक्षकों द्वारा कंप्यूटर स्क्रीन पर मूल्यांकन किया जाता है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि इस प्रणाली के लागू होने से 'लाखों बच्चों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो गया है।'

उन्होंने दावा किया कि इस वर्ष 12वीं कक्षा का पास प्रतिशत 88% से घटकर 85% रह गया है — यानी तीन प्रतिशत अंकों की गिरावट। हालाँकि सीबीएसई ने इस दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

गड़बड़ियों की सूची: कांग्रेस के आरोप

जयराम रमेश ने मूल्यांकन प्रक्रिया में कई कथित खामियाँ गिनाईं। इनमें शामिल हैं — धुंधली और पढ़ने में मुश्किल उत्तर पुस्तिकाएँ, गलत अंकन, छात्रों को गलत उत्तर पुस्तिकाएँ मिलना, परीक्षकों के भुगतान में देरी और री-इवैल्यूएशन फीस का अत्यधिक होना। उनके अनुसार ये समस्याएँ संकेत देती हैं कि ओएसएम को लागू करने से पहले पर्याप्त तैयारी नहीं की गई।

यह ऐसे समय में आया है जब सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएँ पहले ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत बदलावों के बीच छात्रों और अभिभावकों की चिंता का केंद्र बनी हुई हैं।

शिक्षा मंत्री पर निशाना

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तब प्रतिक्रिया दी जब चिंताएँ बढ़ गईं, न कि पहले से। उनका कहना है कि मंत्री इस व्यवस्था को लागू करने से पहले आने वाली चुनौतियों का अनुमान लगाने में विफल रहे। कांग्रेस सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए आईआईटी कानपुर को शामिल करना महज छवि सुधार की कोशिश है।

गौरतलब है कि आधिकारिक जवाब आने में एक सप्ताह से अधिक समय लगा — जिसे जयराम रमेश ने 'जवाबदेही की विफलता' करार दिया।

इस्तीफे की माँग

जयराम रमेश ने सीधे तौर पर माँग की कि धर्मेंद्र प्रधान को देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से यह भी जवाब माँगा कि जिस मंत्री की वजह से छात्रों के भविष्य पर असर पड़ रहा है, उन्हें इतने लंबे समय तक पद पर क्यों बनाए रखा गया। शिक्षा मंत्रालय की ओर से इस माँग पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

आगे क्या

फिलहाल यह विवाद संसद के आगामी सत्र में उठने की संभावना है। छात्र संगठनों और अभिभावकों की ओर से भी सीबीएसई से स्पष्टीकरण की माँग बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो आने वाले वर्षों में ओएसएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

गलत उत्तर पुस्तिकाएँ और देरी से प्रतिक्रिया बताती है कि क्रियान्वयन बिना पर्याप्त पायलट परीक्षण के किया गया। असली सवाल यह है कि करोड़ों छात्रों से जुड़ी व्यवस्था पर बड़े पैमाने पर रोलआउट से पहले सीमित परीक्षण क्यों नहीं हुआ। पास प्रतिशत की गिरावट का कारण ओएसएम है या परीक्षा का कठिन स्तर — यह स्वतंत्र जाँच के बिना स्पष्ट नहीं होगा, और इसी अस्पष्टता का राजनीतिकरण हो रहा है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली क्या है और इसमें क्या विवाद है?
ओएसएम (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है जिसमें उत्तर पुस्तिकाएँ स्कैन होती हैं और शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर अंक देते हैं। विवाद इसलिए है क्योंकि कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने धुंधली स्कैन, गलत अंकन और गलत उत्तर पुस्तिकाएँ मिलने जैसी कथित खामियों का आरोप लगाया है।
12वीं बोर्ड का पास प्रतिशत इस साल कितना घटा?
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के दावे के अनुसार इस वर्ष 12वीं का पास प्रतिशत 88% से घटकर 85% हो गया है — यानी तीन प्रतिशत अंकों की गिरावट। सीबीएसई ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि या खंडन अभी तक नहीं किया है।
जयराम रमेश ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों माँगा?
जयराम रमेश का आरोप है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ओएसएम लागू करने से पहले इसकी चुनौतियों का अनुमान लगाने में विफल रहे और आधिकारिक प्रतिक्रिया देने में एक सप्ताह से अधिक समय लगा। उनका कहना है कि लाखों छात्रों के भविष्य पर असर डालने वाले मंत्री को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
आईआईटी कानपुर का इस विवाद से क्या संबंध है?
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय ने ओएसएम की तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए आईआईटी कानपुर को शामिल किया। कांग्रेस का कहना है कि यह कदम समस्या को स्वीकार करने की बजाय छवि सुधार की कोशिश है।
इस विवाद का छात्रों पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि मूल्यांकन में अनियमितताएँ साबित होती हैं, तो प्रभावित छात्रों को री-इवैल्यूएशन का अधिकार मिल सकता है। हालाँकि, री-इवैल्यूएशन फीस अधिक होने का आरोप भी लगाया गया है, जिससे आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्र इस विकल्प का उपयोग नहीं कर पाते।
राष्ट्र प्रेस
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