सीबीएसई 12वीं मूल्यांकन विवाद: डॉ. जॉन ब्रिटास ने धर्मेंद्र प्रधान को लिखा पत्र, OSM प्रणाली पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
सीपीआई(एम) के राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने 23 मई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को एक विस्तृत पत्र लिखकर सीबीएसई की 12वीं कक्षा के मूल्यांकन में कथित गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया है। पत्र में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली, धुंधली स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं, स्टेप-मार्किंग की अनदेखी और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल की तकनीकी खामियों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। यह पत्र सीबीएसई परिणाम घोषित होने के बाद देशभर में उभरे व्यापक छात्र असंतोष की पृष्ठभूमि में आया है।
मुख्य शिकायतें और आरोप
डॉ. ब्रिटास ने पत्र में बताया कि 21 मई को भेजे गए उनके पिछले पत्र के बाद देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त हुई हैं। कई परीक्षार्थियों का आरोप है कि सीबीएसई पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई उनकी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएँ धुंधली, अस्पष्ट और आंशिक रूप से अपठनीय हैं, जिससे यह सत्यापित करना लगभग असंभव हो गया है कि उनका मूल्यांकन सही ढंग से हुआ या नहीं।
पत्र में विशेष रूप से भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित जैसे विषयों में चरणवार अंक (स्टेप-मार्किंग) न दिए जाने की शिकायतों का उल्लेख है। छात्रों का दावा है कि उन्होंने डेरिवेशन, गणनाएँ और मध्यवर्ती चरण स्पष्ट रूप से लिखे थे, फिर भी उन्हें उचित अंक नहीं मिले।
पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ियाँ
पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिका प्राप्त करने के सीबीएसई पोर्टल में लगातार तकनीकी खराबियाँ आ रही हैं, जिसके कारण कई छात्र समय पर आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यह स्थिति उन छात्रों के भविष्य को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकती है जो उच्च शिक्षा प्रवेश और छात्रवृत्ति प्रक्रियाओं में भाग ले रहे हैं। गौरतलब है कि सीबीएसई के नतीजे देश के प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों और इंजीनियरिंग-मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की पात्रता से सीधे जुड़े होते हैं।
सांसद की माँगें
डॉ. जॉन ब्रिटास ने शिक्षा मंत्री से चार प्रमुख कदम उठाने की माँग की है। पहली माँग है कि सीबीएसई के पूरे मूल्यांकन तंत्र की उच्च स्तरीय जाँच कराई जाए। दूसरी माँग है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की स्वतंत्र समीक्षा की जाए। तीसरी माँग है कि जहाँ भी उत्तर पुस्तिकाएँ अपठनीय पाई जाएँ, वहाँ मैनुअल सत्यापन की व्यवस्था की जाए। चौथी माँग है कि पुनर्मूल्यांकन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए, ताकि कोई भी छात्र तकनीकी कारणों से वंचित न रह जाए।
व्यापक संदर्भ और प्रतिक्रिया
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में कई छात्र संगठनों ने भी OSM प्रणाली और मूल्यांकन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को पारदर्शी बनाने के बजाय इसने नई तकनीकी बाधाएँ खड़ी कर दी हैं। पत्र में जोर दिया गया है कि सीबीएसई परीक्षाएँ छात्रों के उच्च शिक्षा, करियर और जीवन की दिशा तय करती हैं, इसलिए मूल्यांकन में किसी भी लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई की ओर से इस पत्र पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। छात्रों और अभिभावकों की निगाहें अब मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हैं।