सीबीएसई ऑन-स्क्रीन मार्किंग पर संसदीय समिति की सख्त समीक्षा, छात्र सार्थक सिद्धांत ने रखी अपनी बात
सारांश
मुख्य बातें
संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति ने 2 जून 2026 को संसद भवन एनेक्सी, नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें सीबीएसई की कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं में लागू ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली तथा कक्षा 9 और 10 में तीन-भाषा सूत्र के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की गई। इस बैठक में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की चिंताओं को केंद्र में रखा गया।
ओएसएम प्रणाली क्या है और विवाद क्यों
ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप से स्कैन कर परीक्षकों को कंप्यूटर स्क्रीन पर मूल्यांकन करने की सुविधा दी जाती है। सीबीएसई का दावा है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक मानकीकृत होती है। हालाँकि, इस व्यवस्था के लागू होने के बाद से बड़ी संख्या में छात्रों ने अंकन की सटीकता और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं।
छात्रों की प्रमुख शिकायतें
समिति के समक्ष छात्र सार्थक सिद्धांत ने उपस्थित होकर ओएसएम प्रणाली से प्रभावित विद्यार्थियों के अनुभव साझा किए। कई छात्रों का कथित तौर पर आरोप है कि उनके परिणाम में जिस उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन दर्शाया गया, वह उनकी अपनी उत्तर पुस्तिका नहीं थी। इसके अलावा, कुछ विद्यार्थियों ने दावा किया कि उत्तर पुस्तिका में लिखे उत्तरों की तुलना में प्राप्त अंक कम थे।
छात्रों द्वारा उठाई गई प्रमुख समस्याओं में उत्तर पुस्तिकाओं के स्कैन की गुणवत्ता, डिजिटल मूल्यांकन के दौरान संभावित तकनीकी त्रुटियाँ, अंक अपलोडिंग से जुड़ी आशंकाएँ और परिणाम सत्यापन प्रक्रिया की जटिलता शामिल हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि पारंपरिक मूल्यांकन की तुलना में डिजिटल प्रणाली में त्रुटि की पहचान करना और उसका समाधान पाना कहीं अधिक कठिन हो गया है।
सरकार और सीबीएसई की जवाबदेही
बढ़ती शिकायतों को देखते हुए समिति ने शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव तथा सीबीएसई अध्यक्ष को बैठक में तलब किया। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों से ओएसएम प्रणाली के कार्यान्वयन, उसके लाभों, सामने आई चुनौतियों और शिकायत निवारण के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत ब्यौरा माँगा गया। समिति विशेष रूप से यह जाँचना चाहती है कि नई प्रणाली ने छात्रों के परिणामों, अंकन की सटीकता और मूल्यांकन की निष्पक्षता को किस हद तक प्रभावित किया है।
तीन-भाषा सूत्र पर भी चर्चा
इस बैठक में कक्षा 9 और 10 में तीन-भाषा सूत्र के क्रियान्वयन का मुद्दा भी उठाया गया। समिति यह समझने का प्रयास कर रही है कि विभिन्न राज्यों और स्कूलों में इस नीति को लागू करने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और इसका छात्रों पर क्या व्यावहारिक प्रभाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
शिक्षा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार यह समीक्षा इसलिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि बोर्ड परीक्षाओं का मूल्यांकन सीधे छात्रों की उच्च शिक्षा और करियर की संभावनाओं को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मूल्यांकन प्रणाली पर उठे किसी भी प्रश्न का समाधान पारदर्शी और विश्वसनीय तरीके से होना आवश्यक है, अन्यथा छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमज़ोर पड़ सकता है। यह समीक्षा तय करेगी कि ओएसएम प्रणाली अपने मौजूदा स्वरूप में जारी रहेगी, उसमें सुधार होगा, या उस पर पुनर्विचार किया जाएगा।