सीबीएसई की डिजिटल कॉपी जांच प्रणाली (OSM) पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, स्थायी समाधान का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 15 जुलाई 2025 को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑनलाइन स्कैन्ड मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर गहरी चिंता जताई, जिसके तहत डिजिटल कॉपी जांच में छात्रों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि छात्रों की निराशा और हताशा को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता और इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ — जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन भी शामिल हैं — ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले में सहयोग का आग्रह किया। पीठ ने यह भी कहा कि सरकार को इस विषय को विरोध के रूप में नहीं, बल्कि छात्रहित की समस्या के रूप में देखना चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने अदालत को बताया कि याचिका में उल्लिखित अधिकांश व्यक्तिगत मार्कशीट मामलों का समाधान पहले ही कर दिया गया है। साथ ही उन्होंने सूचित किया कि सरकार ने कॉपी जांच की खामियों की समीक्षा के लिए एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एकल-सदस्यीय समिति गठित की है, जो पूरी व्यवस्था का परीक्षण कर सुधार के सुझाव देगी।
याचिका की मांगें
राकेश बिंजोला की ओर से दायर याचिका में CBSE की कॉपी जांच प्रक्रिया के लिए पारदर्शी एवं स्पष्ट नियम बनाने की मांग की गई है। याचिका में यह भी माँग है कि इन नियमों की निगरानी हेतु एक हाई-पावर कमेटी गठित की जाए। इसके अलावा, जिन छात्रों ने विश्वविद्यालय या कॉलेज की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है या प्रोविजनल प्रवेश ले लिया है, उन्हें बोर्ड के न्यूनतम अंकों की शर्त से छूट दिए जाने की माँग भी शामिल है।
सरकार की प्रतिक्रिया
सरकार ने स्वीकार किया है कि OSM प्रणाली में खामियाँ हैं और उन्हें गंभीरता से लिया जा रहा है। एस. राधा चौहान समिति की रिपोर्ट के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
तीन-भाषा नीति पर भी नोटिस
गौरतलब है कि इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने CBSE की संशोधित तीन-भाषा नीति को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार, CBSE और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को नोटिस जारी किया था। सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा गया है और मामले को 29 जुलाई को विस्तृत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
आगे की सुनवाई
OSM प्रणाली से जुड़े मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित है। अदालत की यह सक्रियता ऐसे समय में आई है जब देशभर में लाखों CBSE छात्र अपनी मार्कशीट और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता में हैं। स्थायी सुधार की दिशा में समिति की रिपोर्ट और सरकार की स्टेटस रिपोर्ट निर्णायक भूमिका निभाएगी।