CBSE की OSM प्रणाली की जांच: राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति गठित, एक महीने में रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली से जुड़ी सेवाओं की खरीद में उठे विवाद की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है। समिति की कमान कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन राधा चौहान को सौंपी गई है, जिन्हें एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को सौंपनी होगी।
मुख्य घटनाक्रम
कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, यह समिति CBSE द्वारा OSM सिस्टम के लिए की गई सेवाओं की खरीद (प्रोक्योरमेंट) से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी। चौहान को आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न विभागों और कार्यालयों के अधिकारियों की सहायता लेने का अधिकार दिया गया है।
समिति को प्रशासनिक और सचिवीय सहायता कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन उपलब्ध कराएगा। निर्धारित समय-सीमा को देखते हुए इस मामले में जल्द ही महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
CBSE में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
इसी बीच केंद्र सरकार ने CBSE में एक और अहम प्रशासनिक बदलाव किया है। शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में निदेशक के पद पर कार्यरत भारतीय सूचना सेवा (IIS) अधिकारी वरुण भारद्वाज को CBSE का नया सचिव नियुक्त किया गया है। उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति व्यवस्था के तहत लेटरल शिफ्ट आधार पर यह जिम्मेदारी दी गई है।
भारद्वाज 2008 बैच के अधिकारी हैं और CBSE में सचिव (डायरेक्टर स्तर) के रूप में कार्य करेंगे। उनकी नियुक्ति हिमांशु गुप्ता के स्थान पर की गई है। आदेश के अनुसार उनका कार्यकाल 19 सितंबर 2027 तक रहेगा, जो केंद्रीय स्टाफिंग योजना के तहत पांच वर्ष की संयुक्त अवधि का हिस्सा होगा।
विवाद की पृष्ठभूमि
ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। आलोचकों का कहना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और तकनीकी जवाबदेही पर स्पष्टता ज़रूरी है, खासकर तब जब लाखों छात्रों के परीक्षा परिणाम इसी डिजिटल प्रणाली पर निर्भर हैं।
आगे क्या
सरकार का यह दोहरा कदम — जांच समिति का गठन और सचिव स्तर पर बदलाव — संकेत देता है कि केंद्र मूल्यांकन प्रक्रिया में भरोसा बहाल करने को प्राथमिकता दे रहा है। चौहान समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खरीद प्रक्रिया में कोई अनियमितता थी या नहीं, और आगे क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।