सीबीएसई पोर्टल सुधार के लिए IIT मद्रास की विशेषज्ञ टीम तैनात, धर्मेंद्र प्रधान का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 24 मई 2025 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के प्रोफेसरों और तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के परिणामोत्तर सेवा पोर्टल की तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए तैनात करने का निर्देश दिया। यह कदम देशभर के छात्रों और अभिभावकों द्वारा पुनर्मूल्यांकन पोर्टल में आ रही गंभीर तकनीकी समस्याओं की शिकायतों के बाद उठाया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
CBSE के परीक्षाोत्तर सेवा पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ियों की रिपोर्टें सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई की। IIT मद्रास की विशेषज्ञ टीम पोर्टल की स्थिरता और सर्वर के प्रदर्शन की विशेष जाँच करेगी। इसके अलावा टीम लॉगिन प्रमाणीकरण, उपयोगकर्ता पहुँच प्रणाली और भुगतान गेटवे की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए सुधारात्मक उपाय भी करेगी।
टीम समग्र आईटी अवसंरचना की मज़बूती का आकलन करेगी और सिस्टम तथा तकनीकी कार्यप्रवाहों में लक्षित सुधार लागू करेगी, ताकि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया त्रुटिरहित हो सके।
सरकार की प्रतिक्रिया
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और CBSE को प्राथमिकता के आधार पर सभी आवश्यक सुधारात्मक उपाय करने चाहिए। उन्होंने एक पारदर्शी, कुशल और छात्र-हितैषी प्रणाली सुनिश्चित करने पर बल दिया। यह ऐसे समय में आया है जब बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
विपक्ष की चिंताएँ
राज्यसभा सांसद एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — CPI(M) — के नेता डॉ. जॉन ब्रिटास ने शनिवार को शिक्षा मंत्री को एक पत्र लिखकर CBSE की 12वीं कक्षा की परीक्षा के मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया। पत्र में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली, धुंधली स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं, स्टेप-मार्किंग में अनदेखी और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल की तकनीकी समस्याओं पर गहरी चिंता जताई गई।
पत्र के अनुसार, 21 मई को भेजे गए पिछले पत्र के बाद देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त हुई हैं। गौरतलब है कि यह दूसरा पत्र है, जो दर्शाता है कि पहली शिकायत के बाद भी समस्याएँ बनी रहीं।
आम जनता पर असर
कई छात्रों ने आरोप लगाया है कि CBSE पोर्टल पर उपलब्ध उनकी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएँ धुंधली, अस्पष्ट और आंशिक रूप से अपठनीय हैं। इससे परीक्षार्थियों के लिए यह सत्यापित करना लगभग असंभव हो गया है कि उनका मूल्यांकन सही तरीके से हुआ या नहीं।
विशेष रूप से भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित जैसे विषयों में चरणवार अंक न दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। छात्रों का दावा है कि उन्होंने डेरिवेशन, गणनाएँ और मध्यवर्ती चरण स्पष्ट रूप से लिखे थे, फिर भी उन्हें उचित अंक नहीं दिए गए।
क्या होगा आगे
IIT मद्रास की टीम के हस्तक्षेप के बाद यह देखना अहम होगा कि पोर्टल की तकनीकी खामियाँ कितनी जल्दी दूर होती हैं और क्या पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो पाती है। लाखों छात्रों का भविष्य इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर निर्भर करता है।