CBSE री-इवैल्यूएशन फीस संकट: SBI समेत 4 सरकारी बैंक पेमेंट गेटवे सुधारने में जुटे
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं बोर्ड परीक्षा के री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर बार-बार पेमेंट फेल होने की समस्या के बाद, सरकार ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और इंडियन बैंक — चार प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को CBSE के डिजिटल भुगतान तंत्र को मज़बूत करने की ज़िम्मेदारी सौंपी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार, 24 मई को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर इस मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई की माँग की, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।
समस्या की जड़: ऑन-स्क्रीन मार्किंग और पेमेंट विफलता
इस वर्ष CBSE ने 12वीं बोर्ड की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन पहली बार 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' प्रणाली के ज़रिये किया। बोर्ड का उद्देश्य था — पारदर्शिता बढ़ाना, मूल्यांकन में एकरूपता लाना और गणना संबंधी त्रुटियों को समाप्त करना। हालाँकि, परिणाम घोषित होते ही बड़ी संख्या में छात्र अपने अंकों से असंतुष्ट दिखे और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने लगे।
यह ऐसे समय में आया है जब CBSE का पोस्ट-एग्जामिनेशन सर्विस पोर्टल भारी ट्रैफ़िक के दबाव में बार-बार तकनीकी खराबी का शिकार हो रहा था। छात्रों की शिकायत रही कि री-इवैल्यूएशन फीस जमा करते समय पेमेंट बार-बार फेल हो रही है, डुप्लीकेट ट्रांजैक्शन हो रहे हैं और खाते से अतिरिक्त राशि कट रही है।
मंत्रिस्तरीय हस्तक्षेप और बैंकों की भूमिका
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच हुई बातचीत के बाद तय हुआ कि चारों सार्वजनिक बैंक CBSE के पोस्ट-एग्जामिनेशन पोर्टल के साथ सीधा तकनीकी एकीकरण करेंगे। इससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था अधिक स्थिर और सुरक्षित बनेगी।
नई व्यवस्था में एक ऑटोमैटिक रिफंड सिस्टम भी विकसित किया जाएगा, ताकि पेमेंट फेल होने, डुप्लीकेट चार्ज या अतिरिक्त कटौती की स्थिति में छात्रों को बार-बार शिकायत दर्ज कराने की ज़रूरत न पड़े। शिक्षा मंत्री प्रधान ने CBSE को अपने पेमेंट गेटवे सिस्टम का पूर्ण ओवरहॉल करने का आधिकारिक निर्देश भी दे दिया है।
व्यापक असंतोष और शिक्षा जगत की चिंता
गौरतलब है कि यह केवल तकनीकी समस्या नहीं है — देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों में CBSE की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर व्यापक असंतोष है। ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को पारदर्शिता के नाम पर लागू किया गया था, लेकिन परिणाम आने के बाद बड़ी संख्या में पुनर्मूल्यांकन आवेदन यह संकेत देते हैं कि छात्रों का बोर्ड के मूल्यांकन पर भरोसा डगमगाया है।
आलोचकों का कहना है कि जब लाखों छात्र एक साथ पोर्टल पर आवेदन करते हैं, तो सर्वर क्षमता और भुगतान अवसंरचना की कमज़ोरी उजागर हो जाती है — और यह पहली बार नहीं है।
आगे क्या होगा
सरकार को उम्मीद है कि वित्त मंत्रालय, चारों सार्वजनिक बैंकों और CBSE के बीच यह समन्वित प्रयास छात्रों को तेज़, सुरक्षित और निर्बाध डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराएगा। आने वाले समय में री-चेकिंग, री-इवैल्यूएशन और अन्य पोस्ट-एग्जाम सेवाओं के लिए भुगतान संबंधी तकनीकी बाधाओं में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना जताई जा रही है। CBSE पेमेंट गेटवे का ओवरहॉल कब तक पूरा होगा, इसकी आधिकारिक समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।