18 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सीबीएसई 12वीं डिजिटल मूल्यांकन विवाद: एनएसयूआई की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल, जांच और पुनर्मूल्यांकन की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीबीएसई 12वीं डिजिटल मूल्यांकन विवाद: एनएसयूआई की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल, जांच और पुनर्मूल्यांकन की मांग

सारांश

सीबीएसई की 12वीं परीक्षा में डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की कथित खामियों का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुँच गया है। एनएसयूआई ने स्वतंत्र जांच, फिजिकल रीचेकिंग और प्रभावित छात्रों को कम्पेनसेटरी मार्क्स देने की माँग की है — यह विवाद लाखों छात्रों के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ा है।

मुख्य बातें

एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने 2 जून को दिल्ली उच्च न्यायालय में सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के खिलाफ याचिका दाखिल की।
याचिका में ओएसएम (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) प्रणाली में तकनीकी खामियों के कारण छात्रों को कम अंक मिलने का आरोप लगाया गया है।
अदालत से माँग: स्वतंत्र एजेंसी से जांच, शिकायत पोर्टल एक माह और खुला रखना, और फिजिकल रीचेकिंग की अनुमति।
कथित रूप से गायब, धुंधली या गलत तरीके से जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं वाले छात्रों को कम्पेनसेटरी मार्क्स देने की माँग।
भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली हेतु मजबूत प्रोटोकॉल और दिशानिर्देश बनाने का अनुरोध।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की कक्षा 12वीं की परीक्षाओं में डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) में कथित तकनीकी खामियों को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की गई है। यह याचिका 2 जून को कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के अध्यक्ष विनोद जाखड़ के माध्यम से दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ियों के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को अपेक्षा से कम अंक मिले हैं।

याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं

एनएसयूआई का दावा है कि सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली में तकनीकी खामियों के चलते कई छात्रों के अंक प्रभावित हुए हैं। याचिका के अनुसार, कुछ मामलों में उत्तर पुस्तिकाएं कथित रूप से गायब हुईं, धुंधली स्कैन हुईं या गलत तरीके से जांची गईं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे छात्रों के शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

अदालत से क्या राहत माँगी गई है

याचिका में दिल्ली उच्च न्यायालय से कई अनुरोध किए गए हैं। पहला, ओएसएम प्रणाली से जुड़ी शिकायतों की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। दूसरा, प्रभावित छात्रों को शिकायत दर्ज कराने का अवसर देने के लिए सीबीएसई के संबंधित पोर्टल को कम से कम एक माह तक और खुला रखा जाए।

इसके अतिरिक्त, जिन छात्रों के अंक असामान्य रूप से कम आए हैं, उन्हें कम्पेनसेटरी मार्क्स देने और उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन के लिए नई वेरिफिकेशन विंडो खोलने की भी माँग की गई है। याचिका में विवादित उत्तर पुस्तिकाओं की फिजिकल रीचेकिंग और मैनुअल पुनर्मूल्यांकन का अनुरोध भी शामिल है।

भविष्य के लिए सुधार की माँग

एनएसयूआई ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि भविष्य में ऐसी तकनीकी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली हेतु मजबूत सुरक्षा उपाय, स्पष्ट प्रोटोकॉल और विस्तृत दिशानिर्देश तैयार करने के निर्देश सीबीएसई को दिए जाएं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इससे छात्रों और अभिभावकों का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास पुनः स्थापित होगा।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि सीबीएसई ने हाल के वर्षों में मूल्यांकन प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं, जिसके तहत परीक्षकों को स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं ऑनलाइन जांचनी होती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बोर्ड परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज है। दिल्ली उच्च न्यायालय का इस याचिका पर रुख और सीबीएसई की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस मामले ने उजागर किया है कि तकनीकी बुनियादी ढाँचे की तैयारी और शिकायत निवारण तंत्र उस रफ्तार से नहीं चला। असली सवाल यह है कि सीबीएसई के पास ओएसएम प्रणाली की खामियों का कोई स्वतंत्र ऑडिट तंत्र है या नहीं — और यदि नहीं, तो लाखों छात्रों के भविष्य की जिम्मेदारी किसकी है। यह पहली बार नहीं है जब बोर्ड परीक्षाओं के डिजिटल मूल्यांकन पर सवाल उठे हैं; मुख्यधारा की कवरेज अक्सर राजनीतिक याचिका तक सिमट जाती है, जबकि असली मुद्दा प्रणालीगत जवाबदेही का है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीएसई 12वीं डिजिटल मूल्यांकन विवाद क्या है?
सीबीएसई की कक्षा 12वीं परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली में कथित तकनीकी खामियों के चलते बड़ी संख्या में छात्रों को अपेक्षा से कम अंक मिलने का आरोप है। एनएसयूआई ने इन्हीं आरोपों को आधार बनाकर दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है।
एनएसयूआई ने दिल्ली हाईकोर्ट में क्या माँगें रखी हैं?
एनएसयूआई ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच, सीबीएसई शिकायत पोर्टल को एक माह और खुला रखने, विवादित उत्तर पुस्तिकाओं की फिजिकल रीचेकिंग, कम्पेनसेटरी मार्क्स और भविष्य के लिए मजबूत डिजिटल मूल्यांकन प्रोटोकॉल बनाने की माँग की है।
ओएसएम (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) प्रणाली क्या होती है?
ओएसएम एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है जिसमें परीक्षकों को छात्रों की स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं ऑनलाइन जांचनी होती हैं। सीबीएसई ने मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए इसे अपनाया है, लेकिन याचिका में इसी प्रणाली में तकनीकी खामियों का आरोप लगाया गया है।
इस विवाद से कौन से छात्र प्रभावित हैं?
याचिका के अनुसार, वे छात्र प्रभावित हैं जिनकी उत्तर पुस्तिकाएं कथित रूप से गायब हुईं, धुंधली स्कैन हुईं या गलत तरीके से जांची गईं, और जिन्हें असामान्य रूप से कम अंक मिले हैं। याचिकाकर्ताओं ने ऐसे सभी छात्रों के लिए नई वेरिफिकेशन विंडो और कम्पेनसेटरी मार्क्स की माँग की है।
दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद आगे क्या होगा?
याचिका दाखिल होने के बाद अदालत सीबीएसई से जवाब माँग सकती है और सुनवाई की तारीख तय कर सकती है। अदालत का रुख और सीबीएसई की आधिकारिक प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 2 महीने पहले