कन्नड़ शिक्षकों के लिए TET में मराठी अनिवार्य: KVS ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले को NCTE नियमों का उल्लंघन बताया
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विद्यावर्धक संघ (KVS) ने महाराष्ट्र सरकार के उस निर्णय का कड़ा विरोध किया है, जिसमें कन्नड़-माध्यम के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) में मराठी भाषा को अनिवार्य किया गया है। संगठन का आरोप है कि यह कदम राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के नियमों का सीधा उल्लंघन है और इसका वास्तविक उद्देश्य महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों में कन्नड़ भाषा की शिक्षा को कमज़ोर करना है।
मुख्य विवाद क्या है
KVS की विशेष कार्यकारी समिति ने एक औपचारिक प्रस्ताव पारित कर महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले को भेदभावपूर्ण और संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध करार दिया है। संगठन ने तर्क दिया है कि कर्नाटक में मराठी-माध्यम के शिक्षकों को मराठी भाषा में TET देने की अनुमति है, इसलिए महाराष्ट्र को भी पारस्परिकता के आधार पर कन्नड़ शिक्षकों के लिए यही व्यवस्था अपनानी चाहिए।
केवीएस के आरोप और माँगें
KVS का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार ने कन्नड़ शिक्षकों को राहत देने के कर्नाटक सरकार के प्रस्ताव को नज़रअंदाज़ कर दिया है। संगठन ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से आग्रह किया है कि वे इस मुद्दे पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से सीधी बात करें। इसके साथ ही, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भी तत्काल हस्तक्षेप की अपील की गई है। सीमावर्ती इलाकों के कन्नड़-भाषी समुदाय ने चेतावनी दी है कि यदि यह निर्णय तुरंत वापस नहीं लिया गया तो व्यापक विरोध-प्रदर्शन किए जाएँगे।
भाजपा और एनसीपी की प्रतिक्रिया
भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने महाराष्ट्र में मराठी अनिवार्यता का समर्थन करते हुए कहा, 'अगर आप महाराष्ट्र में रहते हैं, तो मराठी जानना ज़रूरी है; स्थानीय भाषा में महारत होने से कामकाज आसान हो जाता है और लोगों के साथ बेहतर ढंग से बातचीत की जा सकती है। इसलिए, मैं मराठी सिखाने और सीखने की पहल का स्वागत करता हूँ।' वहीं, मराठी भाषा को लेकर रेलवे यात्री और टिकट परीक्षक (TTE) के बीच हुए विवाद पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सांसद प्रफुल्ल पटेल ने कहा, 'महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों को मराठी बोलनी चाहिए, या कम से कम इसे सीखने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन अगर कोई व्यक्ति केंद्र सरकार का कर्मचारी है, तो उन पर ऐसी कोई सख्त शर्त नहीं लगाई जा सकती क्योंकि उनका चयन अखिल भारतीय चयन प्रक्रिया के आधार पर होता है।'
व्यापक संदर्भ: भाषाई सीमा-विवाद
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमावर्ती क्षेत्रों में भाषाई तनाव पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है। गौरतलब है कि बेळगावी (बेलगाम) सहित कई सीमावर्ती ज़िलों में दशकों से भाषाई अधिकारों को लेकर विवाद चलता आया है। आलोचकों का कहना है कि TET जैसी परीक्षाओं में एकतरफा भाषाई शर्तें लगाना अल्पसंख्यक भाषाई समुदायों के शैक्षणिक अधिकारों को प्रभावित करता है।
आगे क्या होगा
KVS के प्रस्ताव और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से हस्तक्षेप की माँग के बाद यह देखना होगा कि महाराष्ट्र सरकार अपने निर्णय की समीक्षा करती है या नहीं। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच संभावित बातचीत और केंद्र का रुख इस मामले की दिशा तय करेगा।