सीबीएसई ने कोएम्प्ट एडुटेक कॉन्ट्रैक्ट विवाद पर राहुल गांधी के आरोप खारिज किए, 1.85 करोड़ छात्रों का मामला
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 27 मई 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि बोर्ड परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन हेतु कोएम्प्ट एडुटेक को दिया गया कॉन्ट्रैक्ट पूरी तरह नियमसम्मत और पारदर्शी प्रक्रिया के अनुसार है। बोर्ड ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा लगाए गए 'हेरफेर' के आरोपों को भ्रामक, गलत और तथ्यों से परे बताते हुए सिरे से नकार दिया।
सीबीएसई का आधिकारिक स्पष्टीकरण
बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक आधिकारिक पोस्ट के ज़रिए बताया कि सामान्य वित्तीय नियम (जीएफआर) के सभी प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करते हुए यह कॉन्ट्रैक्ट दिया गया। सीबीएसई के अनुसार, 28 अगस्त 2025 को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) जारी किया गया था और निर्धारित योग्यता मानदंडों को पूरा करने वाले बोलीदाता को ही यह ठेका सौंपा गया।
राहुल गांधी के आरोप और माँगें
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि मूल्यांकन प्रणाली में अनियमितताओं के कारण देशभर के करीब 1.85 करोड़ छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि 'सीबीएसई रिजल्ट में हुई गड़बड़ी से देशभर के लाखों छात्रों और उनके माता-पिता सदमे में हैं।' गांधी ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच और एसआईटी जांच की माँग की।
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 'हमेशा की तरह इस मुद्दे पर भी कोई जवाबदेही नहीं दिखाई दे रही।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोएम्प्ट एडुटेक पहले ग्लोबारेना नाम से संचालित होती थी और 2019 में तेलंगाना में भी विवादों में रह चुकी है।
कंपनी की पृष्ठभूमि पर सवाल
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि आखिर कोएम्प्ट एडुटेक को कॉन्ट्रैक्ट किसके आदेश पर दिया गया, क्या प्रक्रिया अपनाई गई, कंपनी की पृष्ठभूमि की जांच हुई थी या नहीं, और कंपनी प्रबंधन का सरकार से क्या संबंध है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बोर्ड परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता को लेकर अभिभावकों और छात्रों में पहले से ही बेचैनी है।
सीबीएसई की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की शुरुआत परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने के उद्देश्य से की गई थी। बोर्ड ने किसी भी प्रकार की अनियमितता से इनकार करते हुए कहा कि आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। फिलहाल सरकार की ओर से न्यायिक जांच या एसआईटी गठन पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, और यह मामला राजनीतिक और शैक्षिक दोनों क्षेत्रों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।