पीयूष गोयल का राहुल गांधी पर पलटवार: कोएम्प्ट एडुटेक को कांग्रेस राज्यों ने भी दिए थे कार्यादेश
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 28 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तीखा पलटवार किया और आरोप लगाया कि वे 'पॉलिटिकल एम्नेशिया' से ग्रस्त हैं तथा तथ्यों की बजाय प्रचार को तरजीह देते हैं। गोयल का यह बयान उस विवाद की पृष्ठभूमि में आया है जिसमें राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर कोएम्प्ट एडुटेक प्राइवेट लिमिटेड को लेकर निशाना साधा था।
कांग्रेस शासित राज्यों से जुड़े कार्यादेश
गोयल ने दावा किया कि जिस कंपनी को राहुल गांधी आज 'विवादित' बता रहे हैं, उसी कंपनी को कांग्रेस-शासित राज्यों की संस्थाओं ने भी अनुबंध दिए। उनके अनुसार बेंगलुरु सिटी यूनिवर्सिटी (कर्नाटक) ने नवंबर 2025 में, कालोजी नारायण राव यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (तेलंगाना) ने सितंबर 2024 में, आदिकवि श्री महर्षि वाल्मीकि यूनिवर्सिटी, रायचूर ने मार्च 2024 में और कर्नाटक यूनिवर्सिटी, धारवाड़ ने जून 2023 में इस कंपनी के साथ समझौते या कार्यादेश जारी किए थे।
गोयल ने यह भी उल्लेख किया कि तेलंगाना स्टेट हेल्थ यूनिवर्सिटी ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कंपनी के कार्यों की सराहना की है। गौरतलब है कि तेलंगाना और कर्नाटक, दोनों राज्यों में इस समय कांग्रेस की सरकारें हैं।
गोयल के दो सीधे सवाल
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी से दो प्रश्न सार्वजनिक रूप से पूछे। पहला — यदि यह कंपनी वास्तव में संदिग्ध है, तो क्या वे तेलंगाना और कर्नाटक के कांग्रेस मुख्यमंत्रियों पर भी मिलीभगत का आरोप लगाएंगे और उनके इस्तीफे की मांग करेंगे? दूसरा — क्या कांग्रेस सरकारों ने इन समझौतों पर बिना उचित जांच-पड़ताल के हस्ताक्षर किए थे, या वर्तमान विरोध केवल केंद्र सरकार को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है?
चयनात्मक आक्रोश का आरोप
गोयल ने कांग्रेस पर 'चयनात्मक आक्रोश' का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी का एक पुराना पैटर्न रहा है — बिना सबूत आरोप लगाना और तथ्यों के सामने आने पर षड्यंत्र के सिद्धांतों का सहारा लेना। उन्होंने कहा कि देश अब इस तरह की राजनीति से आगे बढ़ चुका है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर कोएम्प्ट एडुटेक प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामले में निशाना साधा था। इसके जवाब में गोयल का यह पलटवार भाजपा (BJP) की उस रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है जिसमें कांग्रेस के आरोपों को उन्हीं के शासित राज्यों के उदाहरणों से काटा जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और विपक्ष के बीच शिक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका को लेकर तनाव बढ़ रहा है।