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राहुल गांधी का कोटा में नीट पर हमला: 'शिक्षा प्रणाली चयन नहीं, अस्वीकृति की व्यवस्था बन गई है'

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राहुल गांधी का कोटा में नीट पर हमला: 'शिक्षा प्रणाली चयन नहीं, अस्वीकृति की व्यवस्था बन गई है'

सारांश

कोटा के दशहरा मैदान में राहुल गांधी ने नीट-जेईई प्रणाली को 'अस्वीकृति की मशीन' करार दिया, आकांक्षा का कथित आत्महत्या पत्र दिखाया और कहा — 'यह बच्चे की नहीं, हमारी शिक्षा व्यवस्था की विफलता है।' यह बयान नीट पेपर लीक विवाद के बीच विपक्ष की रणनीतिक पारी है।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने 17 जून 2026 को कोटा के दशहरा मैदान में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में छात्रों से संवाद किया।
उन्होंने आकांक्षा नाम की छात्रा का कथित आत्महत्या पत्र सार्वजनिक रूप से दिखाते हुए शिक्षा प्रणाली को दोषी ठहराया।
दावा किया कि हर 1,000 स्नातकों में से केवल 12 को रोज़गार मिलता है — यह आँकड़ा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है।
नीट और जेईई को 'चयन नहीं, अस्वीकृति की प्रणाली' बताया; कोचिंग उद्योग पर वित्तीय शोषण का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने संबोधन का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया; कार्यक्रम को गैर-राजनीतिक बताया गया।

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार, 17 जून 2026 को कोटा के दशहरा मैदान में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में छात्रों से सीधा संवाद किया और भारत की मौजूदा शिक्षा प्रणाली पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाएँ छात्रों को अवसर देने के बजाय उन्हें अस्वीकार करने की मशीन बन गई हैं।

कार्यक्रम का संदर्भ

राहुल गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत में स्पष्ट किया कि 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा, 'कोटा में आपके सामने खड़े होकर मुझे बहुत खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है। यह कोई राजनीतिक सभा नहीं है। यह आपके और आपके भविष्य के बारे में है।' कांग्रेस ने उनके इस संबोधन का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया।

शिक्षा प्रणाली पर आरोप

राहुल गांधी ने कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली बच्चों पर अत्यधिक मानसिक और वित्तीय दबाव डालती है। उन्होंने आकांक्षा नाम की एक छात्रा का कथित आत्महत्या पत्र सार्वजनिक रूप से दिखाते हुए कहा, 'यह आकांक्षा की विफलता नहीं है — यह हमारी शिक्षा प्रणाली की विफलता है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह व्यवस्था तेज़ी से वित्तीय शोषण का माध्यम बनती जा रही है।

गौरतलब है कि कोटा देश का सबसे बड़ा कोचिंग हब है, जहाँ हर साल लाखों छात्र नीट और जेईई की तैयारी के लिए आते हैं। यहाँ छात्र आत्महत्याओं की संख्या पिछले कुछ वर्षों में चिंताजनक स्तर पर पहुँची है, जो इस मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बना चुकी है।

रोज़गार संकट पर दावा

राहुल गांधी ने दावा किया कि स्नातकों में रोज़गार की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा, 'हर 1,000 छात्रों में से केवल 12 को ही नौकरी मिलती है। बाकी का क्या होता है? कुछ मजदूर के रूप में काम करने लगते हैं, जबकि अन्य टैक्सी चलाते हैं या गिग इकोनॉमी में काम करते हैं।' उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग स्नातक बेरोज़गार हैं। हालाँकि इस दावे का स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है।

नीट-जेईई की संरचना पर सवाल

नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की संरचना पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने तर्क दिया कि यह व्यवस्था जितने छात्रों को प्रवेश देती है, उससे कहीं अधिक को अस्वीकार कर देती है। उन्होंने कहा, 'लाखों छात्र इन परीक्षाओं में बैठते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही चयनित होते हैं। माता-पिता कोचिंग पर लाखों रुपए खर्च करते हैं। हमारी शिक्षा प्रणाली चयन की बजाय अस्वीकृति की प्रणाली बन गई है। यह छात्रों को अपमानित करती है और कई को अवसाद की ओर धकेलती है।'

आगे की राह

राहुल गांधी ने कहा कि एक आदर्श शिक्षा प्रणाली को छात्रों पर अत्यधिक वित्तीय बोझ डाले बिना उन्हें बड़े सपने देखने में सक्षम बनाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर संघर्ष जारी रखेगी। यह कार्यक्रम ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन तेज़ हो रहे हैं और विपक्ष सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नैतिक रूप से विवादास्पद कदम है। '1,000 में से 12 को नौकरी' जैसे दावे बिना स्रोत के हैं और मुख्यधारा की मीडिया इन्हें बिना जाँचे दोहरा रही है। असली सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन संसद में ठोस विधायी माँग में तब्दील होगा, या केवल चुनावी मौसम तक सीमित रहेगा — जैसा कि पिछले कई 'छात्र-केंद्रित' अभियानों के साथ हुआ है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने कोटा में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में क्या कहा?
राहुल गांधी ने कोटा के दशहरा मैदान में 17 जून 2026 को आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में भारत की शिक्षा प्रणाली को 'अस्वीकृति की व्यवस्था' बताया। उन्होंने नीट-जेईई की संरचना, कोचिंग उद्योग के वित्तीय शोषण और छात्र आत्महत्याओं पर गंभीर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने आकांक्षा का आत्महत्या पत्र क्यों दिखाया?
राहुल गांधी ने आकांक्षा नाम की एक छात्रा द्वारा कथित तौर पर लिखे गए आत्महत्या पत्र को सार्वजनिक रूप से दिखाते हुए कहा कि यह छात्रा की नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली की विफलता है। इस पत्र को उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की माँग के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया।
नीट विवाद में कांग्रेस का रुख क्या है?
कांग्रेस का मानना है कि नीट और जेईई जैसी परीक्षाएँ लाखों छात्रों को अस्वीकार करती हैं और कोचिंग उद्योग के माध्यम से वित्तीय शोषण को बढ़ावा देती हैं। राहुल गांधी ने माँग की है कि शिक्षा प्रणाली छात्रों को अवसर दे, न कि उन पर बोझ डाले।
कोटा में छात्र आत्महत्याओं की स्थिति क्या है?
कोटा देश का सबसे बड़ा कोचिंग हब है जहाँ हर साल लाखों छात्र नीट और जेईई की तैयारी करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में यहाँ छात्र आत्महत्याओं की संख्या चिंताजनक रही है, जिसने इस मुद्दे को राष्ट्रीय नीति विमर्श का केंद्र बना दिया है।
'1,000 में से 12 को नौकरी' — राहुल गांधी का यह दावा कितना सटीक है?
राहुल गांधी ने दावा किया कि हर 1,000 स्नातकों में से केवल 12 को रोज़गार मिलता है। यह आँकड़ा उन्होंने अपने भाषण में प्रस्तुत किया, लेकिन इसका कोई स्वतंत्र या सरकारी स्रोत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञ इसे सटीक संख्या की बजाय एक व्यापक प्रवृत्ति की ओर इशारा मानते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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