3 अगस्त 2026
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नीट-यूजी दोबारा परीक्षा स्थायी हल नहीं — कोटा छात्राओं की राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' रैली में दो टूक

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नीट-यूजी दोबारा परीक्षा स्थायी हल नहीं — कोटा छात्राओं की राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' रैली में दो टूक

सारांश

कोटा की छात्राओं ने राहुल गांधी की रैली में साफ़ कहा — नीट-यूजी दोबारा परीक्षा सिर्फ एक दिखावा है, असली समाधान नहीं। बार-बार पेपर लीक से छात्र मानसिक और शारीरिक रूप से टूट रहे हैं। माँग है कि सिस्टम में जड़ से बदलाव हो।

मुख्य बातें

17 जून 2026 को कोटा में राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' रैली में छात्राओं ने हिस्सा लिया।
छात्राओं ने कहा कि नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा पेपर लीक का स्थायी समाधान नहीं है।
नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को होनी है, जो 3 मई की परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के बाद तय की गई।
छात्राओं ने बार-बार होने वाले पेपर लीक से मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक थकान की बात कही।
सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में बार-बार पेपर लीक और उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद कार्रवाई न होने का मुद्दा भी उठाया गया।
छात्राओं की माँग — परीक्षा सुरक्षा तंत्र में आमूल सुधार और जवाबदेही तय हो।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' रैली में 17 जून को कोटा, राजस्थान पहुँचे कई छात्र-छात्राओं ने एक सुर में कहा कि नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा कराना पेपर लीक जैसी गड़बड़ियों का स्थायी समाधान नहीं है — असली ज़रूरत परीक्षा प्रणाली और सुरक्षा तंत्र को जड़ से मज़बूत करने की है। छात्राओं ने यह भी रेखांकित किया कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएँ उम्मीदवारों की मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक सेहत पर गहरा असर डाल रही हैं।

मुख्य घटनाक्रम

3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने दोबारा परीक्षा 21 जून को निर्धारित की है। इसी पृष्ठभूमि में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश के सबसे बड़े कोचिंग हब कोटा में यह रैली आयोजित की, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ शामिल हुईं।

छात्राओं की आवाज़ — 'दोबारा परीक्षा भरोसा दिलाने की कोशिश मात्र'

एलन कोचिंग इंस्टीट्यूट में अगले वर्ष की परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा ने कहा कि नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा न तो कोई कारगर तरीका है और न ही कोई पक्का समाधान। उन्होंने कहा, 'यह बस हमें भरोसा दिलाने का एक तरीका है, लेकिन कोई पक्का समाधान नहीं है। ऐसी दोबारा परीक्षाएँ होती रहेंगी, लेकिन कब तक? इस तरह से छात्र भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक रूप से थक जाएंगे।'

उसी छात्रा ने यह भी जोड़ा कि गड़बड़ियाँ सिर्फ नीट तक सीमित नहीं हैं — चाहे परीक्षा कंप्यूटर-बेस्ड हो या ओएमआर-बेस्ड, सुरक्षा में लापरवाही और तकनीकी खामियाँ दोनों में देखी जाती हैं। उन्होंने कहा, 'नीट पेपर लीक एक बड़ा मुद्दा बन गया क्योंकि युवाओं ने आवाज़ उठाई। इसे दोबारा कराया जा रहा है, वरना शायद ऐसा भी नहीं होता।'

सिस्टम सुधार की माँग

संस्थान की एक अन्य छात्रा ने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने से छात्रों का हौसला टूटता है और मानसिक तनाव बढ़ता है। उनके अनुसार, 'सुरक्षा को और भी कड़ा करने की ज़रूरत है ताकि पेपर लीक होने जैसी घटनाएँ दोबारा न हों।'

एक तीसरी छात्रा ने परीक्षा तंत्र की व्यापक विफलता की ओर इशारा करते हुए कहा कि सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने में नाकाम रही है और लगभग हर साल पेपर लीक हो रहे हैं। उन्होंने सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का उदाहरण दिया, जिसका पेपर कई बार लीक हुआ — और उनके अनुसार उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद उस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

आम जनता और परीक्षार्थियों पर असर

छात्राओं ने स्पष्ट किया कि वे विरोध प्रदर्शन में इसलिए आई हैं ताकि आने वाले वर्ष में उन्हें उसी मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना न करना पड़े जो इस वर्ष के परीक्षार्थियों को झेलना पड़ा। उनकी माँग है कि परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार हो — महज़ दोबारा परीक्षा से काम नहीं चलेगा।

क्या होगा आगे

नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को होनी है। परीक्षा सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए सरकार की ओर से किसी ठोस नीतिगत घोषणा का अभी इंतज़ार है। छात्र संगठनों और विपक्ष का दबाव बना हुआ है कि परीक्षा एजेंसी की जवाबदेही तय की जाए और सुरक्षा तंत्र में आमूल बदलाव किया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

मिटा नहीं सकते। सवाल सिर्फ नीट का नहीं है — सब-इंस्पेक्टर भर्ती से लेकर अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं तक, पेपर लीक की पुनरावृत्ति बताती है कि निगरानी तंत्र बुनियादी रूप से कमज़ोर है। विरोधाभास यह है कि जब छात्र आवाज़ उठाते हैं तभी दोबारा परीक्षा होती है — यानी जवाबदेही दबाव पर निर्भर है, नीति पर नहीं। जब तक परीक्षा एजेंसियों की स्वतंत्र ऑडिट और सुरक्षा उल्लंघनों पर कठोर दंड का प्रावधान नहीं होगा, यह चक्र टूटने वाला नहीं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा क्यों हो रही है?
3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने 21 जून को दोबारा परीक्षा निर्धारित की है। छात्रों और विपक्ष के विरोध के बाद यह कदम उठाया गया।
कोटा छात्राओं ने दोबारा परीक्षा पर क्या कहा?
छात्राओं ने कहा कि दोबारा परीक्षा कराना न तो कारगर तरीका है और न ही पक्का समाधान — यह सिर्फ भरोसा दिलाने की कोशिश है। उनकी माँग है कि परीक्षा सुरक्षा तंत्र में आमूल सुधार हो ताकि भविष्य में पेपर लीक न हो।
राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' रैली क्या है?
'छात्रों की गूंज' कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा आयोजित रैली है, जो 17 जून 2026 को राजस्थान के कोटा में हुई। इसका उद्देश्य नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की खामियों पर छात्रों की बात सामने रखना था।
पेपर लीक से छात्रों पर क्या असर पड़ता है?
छात्राओं के अनुसार बार-बार पेपर लीक होने से उम्मीदवार मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से थक जाते हैं। अनिश्चितता और तनाव उनकी तैयारी और मनोबल दोनों को प्रभावित करते हैं।
क्या सिर्फ नीट में ही पेपर लीक की समस्या है?
नहीं। छात्राओं ने बताया कि सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा सहित कई अन्य परीक्षाओं में भी पेपर लीक हुए हैं। उनके अनुसार उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद कुछ मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जो व्यापक प्रणालीगत विफलता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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