नीट-यूजी री-एग्जाम से पहले कोटा के अभ्यर्थियों की मांग: परीक्षा प्रणाली में हो सख्त सुधार
सारांश
मुख्य बातें
कोटा (राजस्थान) के नीट-यूजी पुनर्परीक्षा अभ्यर्थी अंतिम चरण की तैयारियों में जुटे हैं और साथ ही परीक्षा प्रणाली में बुनियादी सुधार की माँग उठा रहे हैं। पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द होने से मिले अतिरिक्त एक महीने के समय का अधिकांश छात्रों ने सकारात्मक उपयोग किया, लेकिन मानसिक थकान और अनिश्चितता की छाया अब भी बनी हुई है। प्रत्येक सरकारी एमबीबीएस सीट के लिए करीब 36 अभ्यर्थी प्रतिस्पर्धा में हैं, जो इस परीक्षा की कठिनाई का अंदाज़ा देता है।
अभ्यर्थियों की तैयारी का हाल
कोटा के अभ्यर्थी विशांक ने बताया कि उनकी तैयारी फिलहाल अच्छी स्थिति में है। उन्होंने कहा, 'मैं लगातार मॉक पेपर दे रहा हूँ। टेस्ट के ज़रिए पता चलता है कि कहाँ कमी रह गई है और किन विषयों पर अधिक मेहनत की ज़रूरत है। जिन टॉपिक्स में संदेह रहता है, उन्हें शिक्षकों से स्पष्ट कर लेता हूँ।' विशांक के अनुसार पिछली परीक्षा में उनका स्कोर करीब 400 अंक रहा था और इस बार उन्हें 500 अंक के आसपास पहुँचने की उम्मीद है।
एक अन्य अभ्यर्थी, जिनका पिछला स्कोर 530 अंक था, ने बताया कि दोबारा तैयारी करना मानसिक रूप से सबसे बड़ी चुनौती रही। उन्होंने कहा, 'पिछली बार भी उतनी ही मेहनत की थी और इस बार भी उतनी ही करनी पड़ रही है। परीक्षा को लेकर डर नहीं है, लेकिन फिज़िक्स के न्यूमेरिकल सवालों को लेकर थोड़ी चिंता ज़रूर बनी हुई है।' इस बार वे पिछले स्कोर से बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
एक तीसरे अभ्यर्थी, जिनका पिछला स्कोर 450 अंक रहा, ने बताया कि बायोलॉजी में तैयारी मज़बूत है जबकि फिज़िक्स में अभी कुछ कठिनाई है। उनका मानना है कि इस बार प्रश्नपत्र का स्तर ऊँचा हो सकता है, जिससे कटऑफ भी प्रभावित हो सकती है।
पेपर लीक और मानसिक दबाव
यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी 2024 में पेपर लीक की घटनाओं ने देशभर में परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएँ बढ़ी हैं, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटकता रहा है। कोटा के छात्रों ने स्वीकार किया कि परीक्षा रद्द होने की खबर ने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
कोचिंग संस्थानों के शिक्षकों का अनुमान है कि पेपर लीक की घटनाओं के बाद परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस बार प्रश्नपत्र का स्तर पहले से कठिन हो सकता है।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की माँग
अभ्यर्थियों ने एकमत से माँग की है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में ठोस और सख्त सुधार करे। एक छात्र ने कहा, 'कहीं न कहीं कुछ खामियाँ रही होंगी, जिसकी वजह से पेपर लीक हुआ। सरकार को इस पर सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में छात्रों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।' छात्रों का कहना है कि एक-दो साल की कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा रद्द होना और फिर से शुरू से तैयारी करना — यह मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर थका देने वाला अनुभव है।
आगे क्या
नीट-यूजी पुनर्परीक्षा के परिणाम लाखों छात्रों के मेडिकल करियर की दिशा तय करेंगे। अभ्यर्थियों की उम्मीद है कि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो और आगे ऐसी किसी भी अनिश्चितता से उन्हें न गुज़रना पड़े। परीक्षा सुधार की यह माँग अब केवल कोटा तक सीमित नहीं, बल्कि देशभर के अभ्यर्थियों की साझा आवाज़ बन चुकी है।