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नीट-यूजी री-एग्जाम से पहले कोटा के अभ्यर्थियों की मांग: परीक्षा प्रणाली में हो सख्त सुधार

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नीट-यूजी री-एग्जाम से पहले कोटा के अभ्यर्थियों की मांग: परीक्षा प्रणाली में हो सख्त सुधार

सारांश

पेपर लीक के बाद नीट-यूजी री-एग्जाम की घड़ी आ गई है — कोटा के अभ्यर्थी अतिरिक्त समय का फायदा उठाकर तैयार तो हैं, लेकिन मानसिक थकान और प्रणाली पर अविश्वास की चुनौती भी उतनी ही बड़ी है। हर सरकारी सीट पर 36 दावेदार — दाँव बेहद ऊँचा है।

मुख्य बातें

कोटा के नीट-यूजी अभ्यर्थी पुनर्परीक्षा की अंतिम तैयारियों में जुटे हैं; परीक्षा रद्द होने के बाद एक महीने का अतिरिक्त समय मिला।
प्रत्येक सरकारी एमबीबीएस सीट के लिए करीब 36 अभ्यर्थी प्रतिस्पर्धा में हैं।
अभ्यर्थी विशांक का पिछला स्कोर 400 अंक था; इस बार 500 अंक का लक्ष्य।
एक अन्य अभ्यर्थी का पिछला स्कोर 530 अंक ; फिज़िक्स न्यूमेरिकल को लेकर चिंता।
तीसरे अभ्यर्थी का पिछला स्कोर 450 अंक ; इस बार प्रश्नपत्र कठिन होने और कटऑफ प्रभावित होने की आशंका।
छात्रों ने सरकार से परीक्षा प्रणाली में सख्त सुधार की माँग की है ताकि भविष्य में पेपर लीक न हो।

कोटा (राजस्थान) के नीट-यूजी पुनर्परीक्षा अभ्यर्थी अंतिम चरण की तैयारियों में जुटे हैं और साथ ही परीक्षा प्रणाली में बुनियादी सुधार की माँग उठा रहे हैं। पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द होने से मिले अतिरिक्त एक महीने के समय का अधिकांश छात्रों ने सकारात्मक उपयोग किया, लेकिन मानसिक थकान और अनिश्चितता की छाया अब भी बनी हुई है। प्रत्येक सरकारी एमबीबीएस सीट के लिए करीब 36 अभ्यर्थी प्रतिस्पर्धा में हैं, जो इस परीक्षा की कठिनाई का अंदाज़ा देता है।

अभ्यर्थियों की तैयारी का हाल

कोटा के अभ्यर्थी विशांक ने बताया कि उनकी तैयारी फिलहाल अच्छी स्थिति में है। उन्होंने कहा, 'मैं लगातार मॉक पेपर दे रहा हूँ। टेस्ट के ज़रिए पता चलता है कि कहाँ कमी रह गई है और किन विषयों पर अधिक मेहनत की ज़रूरत है। जिन टॉपिक्स में संदेह रहता है, उन्हें शिक्षकों से स्पष्ट कर लेता हूँ।' विशांक के अनुसार पिछली परीक्षा में उनका स्कोर करीब 400 अंक रहा था और इस बार उन्हें 500 अंक के आसपास पहुँचने की उम्मीद है।

एक अन्य अभ्यर्थी, जिनका पिछला स्कोर 530 अंक था, ने बताया कि दोबारा तैयारी करना मानसिक रूप से सबसे बड़ी चुनौती रही। उन्होंने कहा, 'पिछली बार भी उतनी ही मेहनत की थी और इस बार भी उतनी ही करनी पड़ रही है। परीक्षा को लेकर डर नहीं है, लेकिन फिज़िक्स के न्यूमेरिकल सवालों को लेकर थोड़ी चिंता ज़रूर बनी हुई है।' इस बार वे पिछले स्कोर से बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।

एक तीसरे अभ्यर्थी, जिनका पिछला स्कोर 450 अंक रहा, ने बताया कि बायोलॉजी में तैयारी मज़बूत है जबकि फिज़िक्स में अभी कुछ कठिनाई है। उनका मानना है कि इस बार प्रश्नपत्र का स्तर ऊँचा हो सकता है, जिससे कटऑफ भी प्रभावित हो सकती है।

पेपर लीक और मानसिक दबाव

यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी 2024 में पेपर लीक की घटनाओं ने देशभर में परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएँ बढ़ी हैं, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटकता रहा है। कोटा के छात्रों ने स्वीकार किया कि परीक्षा रद्द होने की खबर ने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

कोचिंग संस्थानों के शिक्षकों का अनुमान है कि पेपर लीक की घटनाओं के बाद परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस बार प्रश्नपत्र का स्तर पहले से कठिन हो सकता है।

परीक्षा प्रणाली में सुधार की माँग

अभ्यर्थियों ने एकमत से माँग की है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में ठोस और सख्त सुधार करे। एक छात्र ने कहा, 'कहीं न कहीं कुछ खामियाँ रही होंगी, जिसकी वजह से पेपर लीक हुआ। सरकार को इस पर सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में छात्रों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।' छात्रों का कहना है कि एक-दो साल की कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा रद्द होना और फिर से शुरू से तैयारी करना — यह मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर थका देने वाला अनुभव है।

आगे क्या

नीट-यूजी पुनर्परीक्षा के परिणाम लाखों छात्रों के मेडिकल करियर की दिशा तय करेंगे। अभ्यर्थियों की उम्मीद है कि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो और आगे ऐसी किसी भी अनिश्चितता से उन्हें न गुज़रना पड़े। परीक्षा सुधार की यह माँग अब केवल कोटा तक सीमित नहीं, बल्कि देशभर के अभ्यर्थियों की साझा आवाज़ बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संरचनागत विफलता की ओर इशारा करती हैं। कोटा के छात्रों की माँग सही दिशा में है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार सख्त निगरानी तंत्र और जवाबदेही ढाँचा बनाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएगी — या यह मुद्दा अगले लीक तक फिर से ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी पुनर्परीक्षा क्यों आयोजित की जा रही है?
पेपर लीक की घटनाओं के बाद नीट-यूजी की मूल परीक्षा रद्द कर दी गई थी, जिसके बाद परीक्षा नियामक ने पुनर्परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया। इससे लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा तैयारी करनी पड़ी।
कोटा के अभ्यर्थियों ने अतिरिक्त समय का उपयोग कैसे किया?
अधिकांश अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द होने के बाद मिले एक महीने के अतिरिक्त समय का उपयोग अपने कमज़ोर विषयों — विशेष रूप से फिज़िक्स — पर ध्यान केंद्रित करने में किया। मॉक टेस्ट और शिक्षकों से संदेह दूर करने पर ज़ोर रहा।
नीट-यूजी पुनर्परीक्षा में प्रतिस्पर्धा कितनी कड़ी है?
प्रत्येक सरकारी एमबीबीएस सीट के लिए करीब 36 अभ्यर्थी प्रतिस्पर्धा में हैं, जो इस परीक्षा की असाधारण कठिनाई को दर्शाता है। छात्रों को आशंका है कि इस बार प्रश्नपत्र का स्तर पहले से ऊँचा हो सकता है।
छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में किन सुधारों की माँग की है?
अभ्यर्थियों ने सरकार से माँग की है कि पेपर लीक रोकने के लिए सख्त और ठोस कदम उठाए जाएँ ताकि भविष्य में छात्रों को इस तरह की मानसिक और शैक्षणिक परेशानी का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि प्रणाली में खामियाँ दूर किए बिना परीक्षा की विश्वसनीयता बहाल नहीं होगी।
पुनर्परीक्षा का अभ्यर्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ा?
एक-दो साल की कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा रद्द होने और फिर से तैयारी करने की स्थिति ने अभ्यर्थियों में मानसिक थकान और अनिश्चितता पैदा की। हालाँकि अधिकांश छात्रों ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अपनी तैयारी जारी रखी।
राष्ट्र प्रेस
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