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नीट यूजी री-टेस्ट: वायुसेना की निगरानी में पेपर, छात्र बोले — 'ये इंतज़ाम पहले होने चाहिए थे'

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नीट यूजी री-टेस्ट: वायुसेना की निगरानी में पेपर, छात्र बोले — 'ये इंतज़ाम पहले होने चाहिए थे'

सारांश

नीट-यूजी री-टेस्ट में इस बार वायुसेना पेपर ले जा रही है और सेटर क्वारंटीन में हैं — लेकिन जिस छात्र ने पहले 697 अंक पाए, वह भी दोबारा परीक्षा देने को तैयार नहीं। छात्रों का गुस्सा साफ है: 'ये इंतज़ाम पहले होने चाहिए थे।'

मुख्य बातें

नीट-यूजी री-टेस्ट के लिए प्रश्नपत्रों के परिवहन की ज़िम्मेदारी भारतीय वायुसेना को सौंपी गई है।
पेपर तैयार करने से जुड़े लोगों को इस बार क्वारंटीन किया गया है, जिससे लीक की संभावना कम की गई है।
चंडीगढ़ के प्रोफेसर मनीष गोयल के अनुसार, 697 अंक पाने वाले छात्र भी री-टेस्ट को लेकर गहरे मानसिक दबाव में हैं।
एक छात्र ढाई वर्षों से तैयारी कर रहा है; सिलेबस नौ महीने पहले पूरा हो चुका था।
छात्रों का कहना है कि नई व्यवस्था स्वागत योग्य है, लेकिन पहले हुई चूक की भरपाई संभव नहीं।

नीट-यूजी री-टेस्ट को लेकर देशभर के छात्रों में चिंता और मानसिक दबाव का माहौल अब भी बना हुआ है। सरकार ने इस बार परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं — प्रश्नपत्रों के परिवहन की ज़िम्मेदारी भारतीय वायुसेना को सौंपी गई है — लेकिन पिछले पेपर लीक की घटना का मनोवैज्ञानिक असर छात्रों के ज़ेहन से अभी तक नहीं गया है।

छात्रों की मनोदशा

चंडीगढ़ के प्रोफेसर मनीष गोयल ने बताया कि उनके संपर्क में आए छात्र अभी भी गहरे मानसिक दबाव में हैं। उन्होंने एक छात्र का उदाहरण देते हुए कहा कि उस विद्यार्थी को अब भी यकीन नहीं हो रहा कि उसे दोबारा परीक्षा देनी पड़ेगी। प्रोफेसर गोयल ने कहा, "कल्पना कीजिए, जिस छात्र ने पिछली परीक्षा में 697 अंक हासिल किए हों, वह फिर उसी प्रक्रिया से गुज़रना नहीं चाहेगा — और अब उस पर यह दबाव है कि री-टेस्ट में भी वही प्रदर्शन दोहरा पाएगा या नहीं।"

इस बार सुरक्षा के क्या इंतज़ाम हैं

प्रोफेसर गोयल के अनुसार, प्रशासन ने इस बार पेपर लीक की लगभग सभी संभावित आशंकाओं को खत्म करने की कोशिश की है। कथित तौर पर पिछली बार पेपर लीक का संबंध अनुवाद प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों से बताया गया था। इस बार उन संबंधित लोगों को क्वारंटीन किया गया है, जिससे उस संभावना को भी समाप्त करने का प्रयास किया गया है।

एक छात्र ने बताया कि पेपर तैयार करने वालों को क्वारंटीन किया गया है, प्रश्नपत्रों का परिवहन वायुसेना कर रही है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखा जा रहा है — जिससे लीक की संभावना काफी कम हो गई है।

तैयारी का बोझ और थकान

एक अन्य छात्र ने बताया कि वह पिछले ढाई वर्षों से नीट की तैयारी कर रहा है। उसका सिलेबस करीब नौ महीने पहले पूरा हो चुका था और तब से वह लगातार उसी विषयवस्तु को दोहरा रहा है। उसने कहा कि एक समय के बाद यह प्रक्रिया थका देने वाली और निराशाजनक लगने लगती है। छात्रों के मन में अब भी यह सवाल है कि परीक्षा का स्तर कैसा होगा।

छात्रों की साफ़ राय

छात्रों ने स्वीकार किया कि इस बार की व्यवस्था स्वागत योग्य है, लेकिन उनका कहना है कि पहले हुई चूक से जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई नहीं हो सकती। तनाव, अनिश्चितता और दोबारा तैयारी का बोझ झेलने वाले छात्रों का एक ही सवाल है — ये सभी इंतज़ाम शुरुआत से ही क्यों नहीं किए गए?

आगे क्या

री-टेस्ट की तारीख और परिणाम को लेकर छात्रों में अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में दीर्घकालिक सुधार के बिना, इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना कठिन होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल अनुत्तरित है कि पहली बार ये मानक प्रोटोकॉल क्यों नहीं अपनाए गए। 697 अंक पाने वाले छात्र का दोबारा परीक्षा देना — यह सिर्फ व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि परीक्षा तंत्र की संस्थागत विफलता का प्रतीक है। असली सवाल यह है कि क्या ये तात्कालिक सुधार दीर्घकालिक बदलाव की नींव बनेंगे, या अगली परीक्षा तक भूल जाएंगे।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी री-टेस्ट में वायुसेना की क्या भूमिका है?
इस बार प्रश्नपत्रों के परिवहन की ज़िम्मेदारी भारतीय वायुसेना को सौंपी गई है ताकि पेपर लीक की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके। इसके अलावा पेपर सेटर्स को भी क्वारंटीन किया गया है।
नीट री-टेस्ट को लेकर छात्र इतने तनाव में क्यों हैं?
पिछली परीक्षा में पेपर लीक की घटना के बाद छात्रों का परीक्षा तंत्र पर भरोसा टूटा है। जिन छात्रों ने 697 जैसे उच्च अंक पाए थे, उन्हें भी दोबारा परीक्षा देनी पड़ रही है, जिससे प्रदर्शन दोहराने का दबाव बना है।
इस बार पेपर लीक रोकने के लिए क्या-क्या उपाय किए गए हैं?
सरकार ने पेपर तैयार करने वालों को क्वारंटीन किया है, प्रश्नपत्रों का परिवहन वायुसेना को सौंपा है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखा जा रहा है। कथित तौर पर पिछली बार लीक अनुवाद प्रक्रिया से जुड़े लोगों के ज़रिए हुई थी, जिस संभावना को इस बार बंद करने का प्रयास किया गया है।
छात्रों को नीट री-टेस्ट से क्या शिकायत है?
छात्रों का कहना है कि नई सुरक्षा व्यवस्था स्वागत योग्य है, लेकिन पहले हुई चूक से उन्हें जो मानसिक, शैक्षणिक और समय का नुकसान हुआ उसकी भरपाई नहीं हो सकती। उनका मानना है कि ये इंतज़ाम शुरुआत से ही होने चाहिए थे।
नीट री-टेस्ट की तैयारी कर रहे छात्रों की स्थिति क्या है?
कई छात्र ढाई वर्षों से नीट की तैयारी कर रहे हैं और सिलेबस नौ महीने पहले ही पूरा हो चुका है। लगातार दोहराव से थकान और निराशा बढ़ रही है, और परीक्षा के स्तर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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