17 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सीबीएसई रिजल्ट गड़बड़ी पर राहुल गांधी का हमला: 'जेबकतरे अब बोर्ड के अंदर बैठे हैं'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीबीएसई रिजल्ट गड़बड़ी पर राहुल गांधी का हमला: 'जेबकतरे अब बोर्ड के अंदर बैठे हैं'

सारांश

सीबीएसई 12वीं के नतीजों में कथित गड़बड़ी पर राहुल गांधी ने बोर्ड को 'जेबकतरा' करार दिया। उनका आरोप है कि 4 लाख छात्रों से पुनर्मूल्यांकन के नाम पर करोड़ों वसूले जा रहे हैं — जबकि गलती बोर्ड की है। यह विवाद शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर सीबीएसई को 'जेबकतरा' करार दिया और 12वीं रिजल्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाया।
बोर्ड की गलती सुधरवाने के लिए छात्रों को ₹2,000 तक का शुल्क देना पड़ रहा है — डिजिटल स्कैन, पुनर्गणना और पुनर्मूल्यांकन मिलाकर।
राहुल गांधी के अनुसार 4 लाख छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन आवेदन दिए हैं, जिससे सीबीएसई को भारी राजस्व मिल रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर-पत्रिकाओं की मोबाइल फोन से स्कैनिंग के कारण गलत मार्किंग हुई।
छात्रों ने राहुल गांधी को बताया कि मुद्दा उठाने पर उन्हें सोशल मीडिया पर देशद्रोही तक कहा गया।

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार, 2 जून 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सीबीएसई (CBSE) की 12वीं कक्षा के नतीजों में कथित गड़बड़ी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बोर्ड की गलती का खामियाजा लाखों छात्र अपनी जेब से भर रहे हैं।

राहुल गांधी ने क्या कहा

राहुल गांधी ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'जेबकतरों से सावधान। आज वो सीबीएसई के अंदर बैठे हैं।' उन्होंने विस्तार से बताया कि सीबीएसई की गलती से अंक गलत आने पर छात्रों को डिजिटल स्कैन कॉपी के लिए ₹100 प्रति विषय, पुनर्गणना के लिए ₹100 प्रति पेपर और पुनर्मूल्यांकन के लिए ₹25 प्रति प्रश्न का शुल्क चुकाना पड़ता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी उत्तर-पत्रिका की सही जाँच करवाने के लिए एक छात्र को ₹2,000 तक खर्च करने पड़ सकते हैं। उन्होंने लिखा, 'गलती सीबीएसई की, सजा बच्चे की और कमाई सरकार की।'

4 लाख आवेदनों पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि जब 4 लाख छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के आवेदन दिए हैं, तो सीबीएसई की इससे होने वाली कमाई का हिसाब क्या है। उन्होंने यह भी कहा कि जब उत्तर-पत्रिकाओं की स्कैनिंग मोबाइल फोन से की गई हो, तो गलत मार्किंग अपरिहार्य है — और उस गलती को सुधरवाने की कीमत भी छात्र ही चुका रहा है।

शिक्षा को 'कारोबार' बनाने का आरोप

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा, 'जब शिक्षा को सेवा नहीं, कारोबार बना दिया जाए तब गलती सुधारी नहीं जाती, बढ़ाई जाती है। इसकी सबसे बड़ी कीमत हमारे बच्चे चुका रहे हैं — अपने समय से, अपने आत्मविश्वास से, और अपने भविष्य से।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीबीएसई 12वीं के नतीजों में बड़े पैमाने पर अंकों की गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई हैं।

छात्रों से संवाद और ट्रोलिंग का मुद्दा

इससे पहले राहुल गांधी ने सीबीएसई के कुछ प्रभावित छात्रों के साथ हुई बातचीत का एक वीडियो भी साझा किया था। छात्रों ने बताया कि जब उन्होंने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया तो उन्हें ट्रोल किया गया और देशद्रोही तक कहा गया। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब परीक्षा परिणामों की गड़बड़ी को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरा हो — पिछले वर्ष भी नीट परीक्षा विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ी थी।

आगे क्या

सीबीएसई की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विपक्ष की माँग है कि पुनर्मूल्यांकन शुल्क माफ किया जाए और गड़बड़ी की स्वतंत्र जाँच कराई जाए। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मामला आने वाले दिनों में संसद में भी गूँज सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक ठोस सवाल है — क्या बोर्ड परीक्षाओं में व्यवस्थागत गलतियों की कीमत छात्रों को चुकानी चाहिए? सीबीएसई का पुनर्मूल्यांकन शुल्क ढाँचा वर्षों से विवादास्पद रहा है, और 4 लाख आवेदनों की संख्या बताती है कि यह कोई छिटपुट मामला नहीं। गौरतलब है कि 2024 के नीट विवाद के बाद यह दूसरा बड़ा परीक्षा-संबंधी विवाद है जिसने राष्ट्रीय ध्यान खींचा है। असली सवाल यह है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में मोबाइल स्कैनिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल किन मानकों के तहत हुआ — और उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीएसई 12वीं रिजल्ट में क्या गड़बड़ी सामने आई है?
कथित तौर पर बड़ी संख्या में छात्रों के अंक गलत आए हैं, जिसके लिए उत्तर-पत्रिकाओं की मोबाइल फोन से स्कैनिंग को जिम्मेदार बताया जा रहा है। 4 लाख से अधिक छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया है।
सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन के लिए कितना शुल्क लेता है?
राहुल गांधी के अनुसार डिजिटल स्कैन कॉपी के लिए ₹100 प्रति विषय, पुनर्गणना के लिए ₹100 प्रति पेपर और पुनर्मूल्यांकन के लिए ₹25 प्रति प्रश्न का शुल्क है। इस हिसाब से एक छात्र को ₹2,000 तक खर्च करने पड़ सकते हैं।
राहुल गांधी ने सीबीएसई पर क्या आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बोर्ड की गलती का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है और 4 लाख आवेदनों के ज़रिए सीबीएसई करोड़ों रुपये कमा रहा है। उन्होंने कहा — 'गलती सीबीएसई की, सजा बच्चे की और कमाई सरकार की।'
क्या सीबीएसई ने इन आरोपों पर कोई जवाब दिया है?
अभी तक सीबीएसई की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील होने के कारण आने वाले दिनों में संसद में भी उठ सकता है।
प्रभावित छात्रों पर क्या असर पड़ा है?
छात्रों ने बताया कि गलत अंकों के कारण उनके भविष्य पर असर पड़ा है और सोशल मीडिया पर मुद्दा उठाने पर उन्हें ट्रोलिंग और 'देशद्रोही' जैसे आरोपों का सामना करना पड़ा। राहुल गांधी ने इन छात्रों के साथ संवाद का वीडियो भी साझा किया था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले