16 जुलाई 2026
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सुप्रीम कोर्ट की CBSE को नसीहत: कक्षा 9 में तीसरी भाषा थोपना छात्रों पर अनुचित बोझ, कक्षा 6 से शुरुआत हो

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सुप्रीम कोर्ट की CBSE को नसीहत: कक्षा 9 में तीसरी भाषा थोपना छात्रों पर अनुचित बोझ, कक्षा 6 से शुरुआत हो

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को स्पष्ट संदेश दिया — बोर्ड परीक्षा की तैयारी के दौर में कक्षा 9 में तीसरी भाषा थोपना छात्रों के साथ अन्याय है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, 'मेरे भीतर का छात्र अभी भी जिंदा है' — और सुझाया कि भाषा सीखने की शुरुआत कक्षा 6 से हो।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 16 जुलाई 2026 को कहा कि CBSE स्कूलों में कक्षा 9 से तीसरी भाषा अनिवार्य करना छात्रों पर अनावश्यक मानसिक दबाव है।
नागरत्ना ने सुझाव दिया कि तीसरी भाषा कक्षा 5 या 6 से शुरू होनी चाहिए और कक्षा 9 तक पूरी हो जानी चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि तीन-भाषा नीति में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है।
तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित होने चाहिए — स्थापना खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी, राज्य केवल भूमि देगा।
मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को; CBSE नीति की वैधता पर अलग याचिका की सुनवाई 29 जुलाई को।

सर्वोच्च न्यायालय ने 16 जुलाई 2026 को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तीन-भाषा नीति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि कक्षा 9 में तीसरी भाषा अनिवार्य करना बोर्ड परीक्षा की तैयारी में जुटे छात्रों पर अनावश्यक मानसिक दबाव डालता है। अदालत ने सुझाव दिया कि तीसरी भाषा की पढ़ाई कक्षा 6 से शुरू होनी चाहिए, ताकि कक्षा 9 तक उसका अध्ययन पूरा हो सके।

मामले की पृष्ठभूमि

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें राज्य के प्रत्येक जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) स्थापित करने का निर्देश दिया गया था। सुनवाई के दौरान तीन-भाषा नीति का मुद्दा स्वाभाविक रूप से सामने आया और पीठ ने इस पर विस्तार से अपनी राय रखी।

न्यायमूर्ति नागरत्ना की टिप्पणियाँ

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, 'कृपया 9वीं कक्षा में नई भाषा शुरू मत कीजिए। तीसरी भाषा 5वीं या 6वीं कक्षा से शुरू की जा सकती है और 9वीं तक उसका अध्ययन पूरा हो जाना चाहिए। देखिए, छात्रों पर कितना दबाव होता है। अपनी सरकार को इस बारे में सलाह दीजिए। मेरे भीतर का छात्र अभी भी जिंदा है।' उन्होंने अपने विद्यालय जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके स्कूल में कन्नड़, हिंदी या संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में चुनने का विकल्प था और भाषा सीखने की शुरुआत जितनी जल्दी हो, उतना बेहतर होता है।

पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि अधिकांश छात्र कक्षा 8 के अंत से ही कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा की तैयारी शुरू कर देते हैं। ऐसे में कक्षा 9 में एक नई भाषा जोड़ना उनके शैक्षणिक बोझ को और बढ़ा देता है।

तीन-भाषा नीति और हिंदी विवाद

सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से तीन-भाषा नीति पर आपत्ति जताई गई। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस नीति में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है। पीठ ने कहा, 'राज्य की भाषा पढ़ाई जाएगी, अंग्रेजी पढ़ाई जाएगी और तीसरी भाषा कोई भी हो सकती है। इसमें यह नहीं कहा गया है कि तीसरी भाषा केवल हिंदी ही होगी।' यह स्पष्टीकरण महत्त्वपूर्ण है क्योंकि तमिलनाडु में तीन-भाषा नीति को हिंदी थोपने के प्रयास के रूप में देखा जाता रहा है।

जवाहर नवोदय विद्यालय पर अदालत का रुख

सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना का समर्थन करते हुए कहा, 'राज्य में नवोदय विद्यालय होने चाहिए।' अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विद्यालयों की स्थापना का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी और राज्य सरकार को केवल भूमि उपलब्ध करानी होगी। पीठ ने कहा, 'देश के लगभग सभी राज्यों में नवोदय विद्यालय हैं। तमिलनाडु के छात्रों को इस सुविधा से वंचित क्यों रखा जाए? केवल इस वजह से कि यह केंद्र सरकार की योजना है, इसे स्वीकार न करना उचित नहीं है।'

आगे की सुनवाई

यह ऐसे समय में आया है जब CBSE की संशोधित तीन-भाषा नीति की संवैधानिक वैधता को लेकर अलग से दायर याचिकाओं पर भी सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है। शीर्ष अदालत ने हाल ही में केंद्र सरकार, CBSE और NCERT को नोटिस जारी किया था, लेकिन फिलहाल नीति के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार किया है। उस मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को निर्धारित है, जबकि वर्तमान याचिका पर अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी — तब तक राज्य में नई सरकार की नीतिगत स्थिति भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उसके क्रियान्वयन की समयरेखा कभी भी बाल-मनोविज्ञान पर आधारित नहीं रही। तमिलनाडु का विरोध राजनीतिक रंग ज़रूर रखता है, लेकिन अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि हिंदी अनिवार्यता और तीन-भाषा नीति दो अलग प्रश्न हैं — और इस भेद को राजनीतिक विमर्श में अक्सर जानबूझकर धुंधला किया जाता है। असली सवाल यह है कि जब NEP 2020 भी बहुभाषिकता को प्रारंभिक कक्षाओं से जोड़ने की बात करती है, तो CBSE ने अपनी नीति अभी तक उसके अनुरूप क्यों नहीं बदली।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की तीन-भाषा नीति पर क्या कहा?
सर्वोच्च न्यायालय ने 16 जुलाई 2026 को कहा कि कक्षा 9 में तीसरी भाषा अनिवार्य करना बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों पर अनावश्यक मानसिक दबाव डालता है। अदालत ने सुझाव दिया कि तीसरी भाषा कक्षा 5 या 6 से शुरू होनी चाहिए और कक्षा 9 तक उसका अध्ययन पूरा हो जाना चाहिए।
क्या तीन-भाषा नीति में हिंदी अनिवार्य है?
नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि तीन-भाषा नीति में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है। नीति के अनुसार राज्य की भाषा, अंग्रेजी और कोई भी एक तीसरी भाषा पढ़ाई जा सकती है।
तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालय को लेकर अदालत का क्या रुख है?
सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने का समर्थन किया। अदालत ने कहा कि स्थापना का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी और राज्य सरकार को केवल भूमि उपलब्ध करानी होगी।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
तमिलनाडु की याचिका पर अगली सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित है। CBSE की संशोधित तीन-भाषा नीति की संवैधानिक वैधता से जुड़ी अलग याचिकाओं पर सुनवाई 29 जुलाई को होगी।
CBSE की तीन-भाषा नीति के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक है?
नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने CBSE की तीन-भाषा नीति के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। केंद्र सरकार, CBSE और NCERT को नोटिस जारी किए गए हैं और मामले की सुनवाई जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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