पेपर लीक कानून काफी नहीं, NEP 2020 पर राज्यों से संवाद ज़रूरी: दिग्विजय सिंह
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 27 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि केवल पेपर लीक के विरुद्ध सख्त कानून बनाने से देश में परीक्षा प्रणाली से जुड़े गहरे संकट का समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 पर संसद में व्यापक चर्चा और सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के साथ संवाद की माँग की। यह बयान NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बीच उठे राजनीतिक तूफान की पृष्ठभूमि में आया है।
मुख्य घटनाक्रम
दिग्विजय सिंह का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा के एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ और तकनीक-आधारित बनाने के लिए एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स गठित करने की बात कही। इस टास्क फोर्स की अध्यक्षता UIDAI के पूर्व चेयरमैन नंदन नीलेकणि करेंगे। प्रस्तावित समिति में इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व डायरेक्टर तपन डेका, IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और वरिष्ठ नौकरशाह अमृत लाल मीणा भी शामिल होंगे।
दिग्विजय सिंह की प्रतिक्रिया
सिंह के कार्यालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, 'पेपर लीक कानून को सख्त बनाने से समस्या हल नहीं होगी। आपको संसद में नई शिक्षा नीति 2020 पर पूरी तरह से चर्चा करनी चाहिए और उससे पहले, देश के सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के साथ शिक्षा नीति पर चर्चा होनी चाहिए। अगर आपने संसद में नई शिक्षा नीति 2020 पर चर्चा की होती, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।'
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, 'भारत जैसे देश में सत्ता का विकेंद्रीकरण जरूरी है, न कि केंद्रीकरण। शिक्षा को पूरी तरह से भारतीय संविधान की राज्य सूची में रखा जाना चाहिए।' यह बयान शिक्षा को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच अधिकार-क्षेत्र की पुरानी बहस को फिर से केंद्र में ले आता है।
सरकार का रुख
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और संसद में पेपर लीक रोकने के लिए एक कड़ा कानून लाया जाएगा। नीलेकणि की अगुवाई वाला विशेषज्ञ पैनल परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-आधारित बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करेगा।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गौरतलब है कि NEP 2020 को संसद में विस्तृत चर्चा के बिना लागू किया गया था, जो विपक्ष की शुरू से ही प्रमुख आपत्तियों में से एक रही है। शिक्षा भारतीय संविधान की समवर्ती सूची में है, यानी केंद्र और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकते हैं — लेकिन राज्यों का यह भी तर्क है कि बड़े नीतिगत बदलावों में उनकी सहमति अनिवार्य होनी चाहिए।
आगे क्या होगा
यह विवाद संसद के आगामी सत्र में और तीखा हो सकता है, जब सरकार पेपर लीक विरोधी विधेयक पेश करेगी। विपक्ष ने संकेत दिया है कि वह NEP 2020 पर बहस की माँग को लेकर सदन में दबाव बनाएगा। NEET-UG 2026 विवाद ने देश भर के लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।