14 जुलाई 2026
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बेंगलुरु ISIS टेरर मॉड्यूल: NIA स्पेशल कोर्ट ने मोहम्मद हनीफ खान को 7 साल की सजा सुनाई

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बेंगलुरु ISIS टेरर मॉड्यूल: NIA स्पेशल कोर्ट ने मोहम्मद हनीफ खान को 7 साल की सजा सुनाई

सारांश

बेंगलुरु ISIS टेरर मॉड्यूल केस में पहली सजा आई — NIA स्पेशल कोर्ट ने मोहम्मद हनीफ खान को 7 साल कठोर कैद और ₹48,000 जुर्माने की सजा सुनाई। 20 आरोपियों में यह पहला दोषसिद्धि है; मास्टरमाइंड महबूब पाशा और ऑनलाइन हैंडलर की जांच जारी है।

मुख्य बातें

NIA स्पेशल कोर्ट, बेंगलुरु ने 14 जुलाई 2026 को मोहम्मद हनीफ खान को 2020 ISIS टेरर साजिश मामले में दोषी ठहराया।
हनीफ को 7 साल की कठोर कैद और ₹48,000 जुर्माने की सजा सुनाई गई; वह इस मामले में दोषी ठहराए जाने वाले पहले आरोपी हैं।
हनीफ ने अक्टूबर 2025 में ट्रायल के दौरान अपना अपराध स्वीकार किया था; वह रेकी टीम का हिस्सा था जिसने चामराजनगर के जंगलों में ठिकाने तलाशे।
मास्टरमाइंड महबूब पाशा ने हनीफ को 2 पिस्तौल और 60 जिंदा कारतूस सौंपे थे; साजिश का लक्ष्य भारत में ISIS विलायत स्थापित करना था।
NIA ने कुल 20 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है; ऑनलाइन हैंडलर की पहचान के लिए जांच जारी है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की बेंगलुरु स्थित स्पेशल कोर्ट ने 14 जुलाई 2026 को 2020 के ISIS टेरर साजिश मामले में मुख्य आरोपी मोहम्मद हनीफ खान को दोषी ठहराते हुए सात साल की कठोर कैद और ₹48,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। इस मामले में दोषी ठहराए जाने वाले वह पहले आरोपी हैं, जबकि NIA कुल 20 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है।

मुख्य घटनाक्रम

हनीफ खान ने अक्टूबर 2025 में शुरू हुए ट्रायल के दौरान अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। जांच में पाया गया कि वह उस रेकी टीम का अहम हिस्सा था, जिसने कर्नाटक के चामराजनगर जिले के शिवनसमुद्र और गुंड्लुपेट इलाकों का दौरा किया था। इस टीम का उद्देश्य प्रतिबंधित संगठन अल-हिंद के सदस्यों के लिए घने जंगलों में प्रशिक्षण स्थल और छिपने के ठिकाने तलाशना था।

साजिश का अंतिम लक्ष्य भारत में ISIS/दाएश विलायत (प्रांत) स्थापित करना था — जो देश की संप्रभुता और सुरक्षा के विरुद्ध एक सुनियोजित आतंकी एजेंडा था।

साजिश का मास्टरमाइंड और हथियारों का षड्यंत्र

NIA की जांच के अनुसार, इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड मुख्य आरोपी महबूब पाशा था, जिसने बेंगलुरु के गुरुप्पनापाल्या स्थित अपने आवास पर कई गुप्त बैठकें आयोजित की थीं। इन बैठकों में टारगेटेड किलिंग के ज़रिए सांप्रदायिक दंगे भड़काने और ISIS के देश-विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई थी।

जांच में यह भी सामने आया कि पाशा ने अपने रिश्तेदारों और सह-आरोपियों के साथ मिलकर हथियार और विस्फोटक जुटाने की साजिश रची थी। उसने हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए हनीफ को दो पिस्तौल और 60 जिंदा कारतूस सौंपे थे।

हनीफ की भूमिका और मामले की पृष्ठभूमि

हनीफ खान की भूमिका केवल रेकी तक सीमित नहीं थी — वह वह व्यक्ति भी था जिसने साजिश के तहत कई आरोपियों को किराए की कार में बेंगलुरु से पश्चिम बंगाल तक पहुँचाया था। यह मामला मूल रूप से 10 जनवरी 2020 को कर्नाटक राज्य पुलिस ने बेंगलुरु में दर्ज किया था, जिसे कुछ दिनों बाद NIA ने अपने हाथ में ले लिया।

गौरतलब है कि यह मामला उस दौर में सामने आया जब देश के विभिन्न हिस्सों में ISIS से प्रेरित मॉड्यूलों की गतिविधियों की खुफिया सूचनाएँ बढ़ रही थीं।

आगे की जांच

NIA अभी भी उस ऑनलाइन हैंडलर की पहचान करने में जुटी है, जिसने इस मॉड्यूल को संगठित करने और साजिश को अंजाम देने की योजना बनाई थी। शेष 19 आरोपियों का ट्रायल जारी है और आने वाले महीनों में अदालत में और सुनवाइयाँ प्रस्तावित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है — मास्टरमाइंड महबूब पाशा और उस गुमनाम ऑनलाइन हैंडलर का मुकदमा, जिसने इस मॉड्यूल को दिशा दी। यह ध्यान देने योग्य है कि मामला 2020 में दर्ज हुआ और पहली सजा 2026 में आई — छह साल की यह लंबी प्रक्रिया आतंकवाद के मामलों में न्यायिक गति पर सवाल उठाती है। साथ ही, 20 में से 19 आरोपियों का ट्रायल अभी जारी है, जो दर्शाता है कि इस नेटवर्क की पूरी तस्वीर अदालत में उभरना अभी बाकी है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु ISIS टेरर मॉड्यूल केस क्या है?
यह 2020 में दर्ज वह मामला है जिसमें बेंगलुरु में ISIS से प्रेरित एक आतंकी मॉड्यूल ने भारत में ISIS विलायत स्थापित करने, टारगेटेड किलिंग से सांप्रदायिक दंगे भड़काने और हथियार जुटाने की साजिश रची थी। NIA ने इस मामले में 20 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
मोहम्मद हनीफ खान को क्या सजा मिली और क्यों?
NIA स्पेशल कोर्ट ने हनीफ खान को 7 साल की कठोर कैद और ₹48,000 जुर्माने की सजा सुनाई। वह रेकी टीम का हिस्सा था, उसने आरोपियों को बेंगलुरु से पश्चिम बंगाल पहुँचाया और उसके पास दो पिस्तौल व 60 जिंदा कारतूस बरामद हुए थे।
इस साजिश का मास्टरमाइंड कौन है?
जांच के अनुसार, साजिश का मास्टरमाइंड महबूब पाशा है, जिसने बेंगलुरु के गुरुप्पनापाल्या स्थित अपने घर पर गुप्त बैठकें आयोजित कीं और हनीफ को हथियार सौंपे। पाशा का ट्रायल अभी जारी है।
NIA की आगे की जांच किस दिशा में है?
NIA उस ऑनलाइन हैंडलर की पहचान करने में जुटी है जिसने इस मॉड्यूल को संगठित किया और साजिश की योजना बनाई। शेष 19 आरोपियों का ट्रायल भी जारी है।
यह मामला पहले कहाँ दर्ज हुआ था?
यह मामला मूल रूप से 10 जनवरी 2020 को कर्नाटक राज्य पुलिस ने बेंगलुरु में दर्ज किया था, जिसे कुछ दिनों बाद NIA ने अपने हाथ में ले लिया।
राष्ट्र प्रेस
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