19 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या असम हिज्ब-उल-मुजाहिदीन आतंकी साजिश मामले में मुख्य आरोपी को सजा मिली?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या असम हिज्ब-उल-मुजाहिदीन आतंकी साजिश मामले में मुख्य आरोपी को सजा मिली?

सारांश

गुवाहाटी की एनआईए अदालत ने असम में हिज्ब-उल-मुजाहिदीन की आतंकी साजिश मामले में मुख्य आरोपी को दोषी ठहराया और उसे उम्रकैद सहित कठोर सजाएं दीं। यह मामला असम के जमुनामुख क्षेत्र से संबंधित है। जानें इस मामले की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

मुख्य आरोपी को उम्रकैद की सजा मिली।
आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए एनआईए की कार्रवाई।
तीन मामलों में आरोपी पर 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया।
साजिश का उद्देश्य दहशत फैलाना था।
अन्य आरोपियों ने अपने अपराध स्वीकार कर लिए हैं।

गुवाहाटी, 31 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। असम में हिज्ब-उल-मुजाहिदीन से संबंधित एक आतंकी साजिश मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। गुवाहाटी की एनआईए की विशेष अदालत ने इस मामले के मुख्य आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। अदालत ने उसे विभिन्न मामलों में कठोर कारावास की सजाएं दी, जिसमें अधिकतम सजा उम्रकैद भी शामिल है।

दोषी करार दिया गया आरोपी मोहम्मद कमरुज जमान उर्फ डॉ. हुरैरा उर्फ कमरुद्दीन है। अदालत ने उसे तीन अलग-अलग मामलों में सजा सुनाई, जो एक साथ चलेंगी। इनमें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 18 के अंतर्गत उम्रकैद और पांच साल की साधारण कैद शामिल है।

अतिरिक्त रूप से, अदालत ने तीनों मामलों में आरोपी पर 5,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यदि वह जुर्माना चुकाने में असफल रहता है, तो उसे प्रत्येक मामले में तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।

यह मामला एनआईए द्वारा दर्ज केस संख्या आरसी 08/2018/एनआईए-जीयूडब्ल्यू से संबंधित है, जो असम के होजाई जिले के जमुनामुख क्षेत्र से जुड़ा है। जांच में पता चला कि वर्ष 2017-18 के दौरान कमरुज जमान ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिज्ब-उल-मुजाहिदीन का असम में एक मॉड्यूल स्थापित करने की योजना बनाई थी। इसका उद्देश्य राज्य में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देकर लोगों में दहशत फैलाना था।

एनआईए की जांच के अनुसार, कमरुज जमान ने इस साजिश के अंतर्गत शाहनवाज आलम, सैदुल आलम, उमर फारूक और अन्य व्यक्तियों की भर्ती की थी। मार्च 2019 में एनआईए ने इस मामले में कुल पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

इनमें से शाहनवाज आलम, सैदुल आलम और उमर फारूक ने अपने अपराधों को स्वीकार कर लिया था, जिसके बाद उन्हें पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है। वहीं, पांचवां आरोपी जयनाल उद्दीन मुकदमे के दौरान बीमारी के कारण निधन हो गया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि असम में हिज्ब-उल-मुजाहिदीन से जुड़े आतंकी मामलों की गंभीरता को नकारा नहीं जा सकता। इस तरह की साजिशें न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करती हैं, बल्कि देश की एकता और अखंडता पर भी खतरा डालती हैं। हमें इस मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिज्ब-उल-मुजाहिदीन क्या है?
हिज्ब-उल-मुजाहिदीन एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है जो भारत में आतंकवादी गतिविधियों के लिए जाना जाता है।
इस मामले में मुख्य आरोपी को क्या सजा मिली?
मुख्य आरोपी को उम्रकैद और अन्य कठोर सजाएं सुनाई गई हैं।
क्या अन्य आरोपी भी दोषी ठहराए गए हैं?
हाँ, अन्य आरोपियों ने अपने अपराध स्वीकार कर लिए हैं और उन्हें पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है।
यह मामला कब दर्ज किया गया था?
यह मामला एनआईए द्वारा 2018 में दर्ज किया गया था।
इस मामले में कुल कितने आरोपी थे?
इस मामले में कुल पांच आरोपी थे, जिनमें से एक का निधन हो गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले