विशाखापत्तनम स्टील प्लांट हादसा: मृतकों के परिजनों को स्थायी नौकरी, ₹25 लाख मुआवजा और आवास का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में हुए भीषण हादसे के बाद केंद्र सरकार ने 9 जून 2026 को मृतक कर्मचारियों के परिवारों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि हादसे में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिजनों को विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में स्थायी नौकरी दी जाएगी, उनके बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च प्लांट वहन करेगा, और शोकाकुल परिवारों को प्लांट परिसर के भीतर आवास भी उपलब्ध कराया जाएगा।
हादसे का स्वरूप और कारण
अधिकारियों के अनुसार, यह दुर्घटना तब हुई जब अत्यधिक तापमान पर पिघला हुआ स्टील ले जा रही एक लैडल में विस्फोट हो गया और बड़ी मात्रा में पिघला हुआ धातु बाहर फैल गया। पिघले हुए लोहे का तापमान करीब 1,500 डिग्री सेल्सियस था, जिसके कारण हादसा अत्यंत भयावह साबित हुआ। मंत्री राममोहन नायडू ने कहा कि देश के किसी स्टील प्लांट में इस तरह की घटना पहली बार सामने आई है, जिससे स्थिति का आकलन करना भी आसान नहीं था।
मुआवजा और राहत पैकेज
केंद्रीय इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने प्रत्येक मृतक के परिवार को ₹25 लाख मुआवजा देने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त हादसे में घायल हुए सभी लोगों के समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। मंत्री राममोहन नायडू ने कहा कि केंद्र सरकार और स्टील प्लांट प्रबंधन प्रभावित परिवारों की हर संभव सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
जांच समिति का गठन
इस्पात मंत्रालय ने हादसे के कारणों और परिस्थितियों की जाँच के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन किया है। राममोहन नायडू ने बताया कि वे केंद्रीय इस्पात मंत्री कुमारस्वामी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुँचे थे। यह ऐसे समय में आया है जब औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर पहले से ही सवाल उठाए जाते रहे हैं।
राज्य सरकार की भूमिका
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्रीय इस्पात मंत्री से सीधी बात की और घटना की गहन जाँच कराने के साथ-साथ मृतकों के परिवारों को अधिकतम सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। राज्य सरकार ने भी हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
सुरक्षा पर संकल्प
केंद्रीय मंत्री राममोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प लिया है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी की पुनरावृत्ति न हो। गौरतलब है कि यह हादसा देश के सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े इस्पात संयंत्रों में से एक में हुआ है, जो श्रमिक सुरक्षा प्रोटोकॉल पर व्यापक पुनर्विचार की माँग करता है।