15 जुलाई 2026
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भारत-यूके सीईटीए लागू: हैदराबाद और अहमदाबाद से यूके के लिए पहली निर्यात खेप रवाना

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भारत-यूके सीईटीए लागू: हैदराबाद और अहमदाबाद से यूके के लिए पहली निर्यात खेप रवाना

सारांश

भारत-यूके सीईटीए के लागू होते ही हैदराबाद और अहमदाबाद से यूके के लिए पहली निर्यात खेपें रवाना हो गईं। तेलंगाना का यूके को सालाना निर्यात लगभग 40.25 करोड़ डॉलर है — रियायती शुल्क और सरल कस्टम्स प्रक्रिया से फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि क्षेत्र को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

15 जुलाई 2026 को भारत-यूके सीईटीए के लागू होने पर हैदराबाद और अहमदाबाद (साणंद) से यूके के लिए पहली निर्यात खेपें रवाना की गईं।
तेलंगाना से यूके को वर्ष 2025-26 में लगभग 40.25 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और केमिकल्स प्रमुख हैं।
समझौते से रियायती शुल्क, बेहतर बाज़ार पहुँच और सरल कस्टम्स प्रक्रिया का लाभ मिलेगा।
निजामाबाद में श्री गजानन इंडस्ट्रीज की चावल खेप और हैदराबाद में फ्युमर एग्री फूड्स के खाद्य उत्पाद भी रवाना किए गए।
छोटे और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) को वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ने और नए रोज़गार सृजन का अवसर मिलने की उम्मीद।

भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) के लागू होने के ऐतिहासिक अवसर पर 15 जुलाई 2026 को हैदराबाद और अहमदाबाद से यूनाइटेड किंगडम (यूके) के लिए पहली आधिकारिक निर्यात खेपें रवाना की गईं। इस कदम को भारत-यूके के द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

हैदराबाद के सनतनगर स्थित इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) से तेलंगाना की पहली निर्यात खेपें रवाना की गईं। वहीं, गुजरात के साणंद (अहमदाबाद के निकट) में एक विशेष फ्लैग-ऑफ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के संयुक्त महानिदेशक राहुल सिंह और ब्रिटेन के उप उच्चायुक्त स्टीव हिकलिंग उपस्थित रहे।

समझौते के जश्न के तहत निजामाबाद में जिला कलेक्टर इला त्रिपाठी (आईएएस) ने एपीईडीए और स्पाइसेज बोर्ड के अधिकारियों की उपस्थिति में श्री गजानन इंडस्ट्रीज की चावल की निर्यात खेप को हरी झंडी दिखाई। हैदराबाद में डीजीएफटी के संयुक्त महानिदेशक संभाजी चव्हाण ने फ्युमर एग्री फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के खाद्य उत्पादों की खेप रवाना की।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

तेलंगाना सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के विशेष सचिव कृष्ण आदित्य (आईएएस) ने कहा कि यह समझौता भारत और यूके के आर्थिक रिश्तों में एक बड़ा और अहम कदम है। उन्होंने बताया कि इससे भारतीय निर्यातकों को यूके के बाज़ार में बेहतर पहुँच मिलेगी और टैरिफ में कमी से तेलंगाना के निर्यातकों को वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा का बेहतर अवसर मिलेगा।

डीजीएफटी हैदराबाद के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. संपत कुमार (आईटीएस) ने कहा कि सीईटीए के तहत कई उत्पादों को रियायती शुल्क का लाभ मिलेगा, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए यूके में निर्यात के नए और बेहतर अवसर बनेंगे।

राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड की सचिव भवानी (आईएएस) ने कहा कि इस समझौते का लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा — फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में तेलंगाना की पहले से मज़बूत स्थिति को देखते हुए राज्य इन अवसरों का अधिकतम लाभ उठा सकता है।

यूके हाई कमीशन में ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट प्रमुख सिद्धार्थ विश्वनाथन ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे बाज़ार तक पहुँच बेहतर होगी, कस्टम्स प्रक्रिया सरल बनेगी और दस्तावेज़ीकरण का बोझ भी कम होगा।

आम जनता और उद्योगों पर असर

वर्ष 2025-26 में तेलंगाना से यूके को लगभग 40.25 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जिसमें मुख्य रूप से फार्मास्यूटिकल्स, जैविक उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, केमिकल्स, इंजीनियरिंग सामान और मेडिकल डिवाइस शामिल रहे। सीईटीए के तहत कई उत्पादों पर शुल्क समाप्त होने या उल्लेखनीय रूप से कम होने से तेलंगाना के उत्पाद यूके बाज़ार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

एपीईडीए (तेलंगाना और आंध्र प्रदेश) के क्षेत्रीय प्रमुख आरपी नायडू ने कहा कि कृषि उत्पादों, प्रोसेस्ड फूड, डेयरी उत्पादों, मिठाइयों और मिलेट्स (श्री अन्न) के निर्यात को इस समझौते से काफी फायदा मिलेगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार कृषि निर्यात को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयासरत है।

क्या होगा आगे

सीईटीए के लागू होने से छोटे और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) को वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा, निर्यात-आधारित उत्पादन में निवेश बढ़ेगा और नए रोज़गार सृजित होंगे। रियायती शुल्क, सरल कस्टम्स प्रक्रिया और नियमों में बेहतर तालमेल — ये तीन स्तंभ इस समझौते को पिछले व्यापार करारों से अलग बनाते हैं। भारत-यूके व्यापार संबंधों का अगला अध्याय अब इस ढाँचे के क्रियान्वयन की गति पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि रियायती शुल्क का लाभ बड़े निर्यातकों तक सीमित रहता है या एमएसएमई तक भी पहुँचता है। तेलंगाना का फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र पहले से यूके बाज़ार में सक्रिय है, इसलिए वहाँ लाभ तत्काल दिख सकता है — लेकिन कृषि और फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र के लिए यूके के गुणवत्ता मानकों और स्वच्छता नियमों की बाधा अभी भी बनी हुई है। फ्लैग-ऑफ कार्यक्रमों की भव्यता और ज़मीनी व्यापार वृद्धि के बीच का अंतर अगले दो-तीन वर्षों के निर्यात आँकड़ों में स्पष्ट होगा।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-यूके सीईटीए क्या है और यह कब लागू हुआ?
भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) एक द्विपक्षीय मुक्त व्यापार करार है जो 15 जुलाई 2026 को लागू हुआ। इसके तहत दोनों देशों के बीच रियायती शुल्क, सरल कस्टम्स प्रक्रिया और बेहतर बाज़ार पहुँच सुनिश्चित की गई है।
हैदराबाद और अहमदाबाद से यूके के लिए कौन-सी खेपें रवाना की गईं?
हैदराबाद के सनतनगर आईसीडी से तेलंगाना की पहली निर्यात खेपें और साणंद (अहमदाबाद) से गुजरात की खेपें रवाना की गईं। इसके अलावा निजामाबाद से श्री गजानन इंडस्ट्रीज की चावल खेप और हैदराबाद से फ्युमर एग्री फूड्स के खाद्य उत्पाद भी यूके भेजे गए।
तेलंगाना के किन क्षेत्रों को सीईटीए से सबसे ज़्यादा फायदा होगा?
फार्मास्यूटिकल्स, लाइफ साइंसेज, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स, इंजीनियरिंग, फूड प्रोसेसिंग और कृषि क्षेत्र को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। तेलंगाना से यूके को 2025-26 में लगभग 40.25 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ था।
सीईटीए से छोटे और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) को क्या लाभ होगा?
राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड की सचिव भवानी (आईएएस) के अनुसार, इस समझौते का लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा। एमएसएमई को वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ने, निर्यात-आधारित उत्पादन में निवेश बढ़ाने और नए रोज़गार सृजन का अवसर मिलेगा।
कृषि उत्पादों के निर्यात पर सीईटीए का क्या असर होगा?
एपीईडीए के क्षेत्रीय प्रमुख आरपी नायडू के अनुसार, कृषि उत्पादों, प्रोसेस्ड फूड, डेयरी उत्पादों, मिठाइयों और मिलेट्स (श्री अन्न) के निर्यात को सीईटीए से काफी फायदा मिलेगा। रियायती शुल्क से इन उत्पादों की यूके बाज़ार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
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