28 अगस्त 2026
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रक्षाबंधन पर ओपी राजभर का अखिलेश पर वार: 'सपा के गुंडों से बहनों की सुरक्षा का वादा करें'

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रक्षाबंधन पर ओपी राजभर का अखिलेश पर वार: 'सपा के गुंडों से बहनों की सुरक्षा का वादा करें'

सारांश

रक्षाबंधन पर ओपी राजभर ने एक्स पर अखिलेश यादव को चुनौती दी — सपा के कथित गुंडों से यूपी की बहनों की सुरक्षा का वादा करें। साथ ही सहारनपुर जनसभा से 'भागने' और गैर-यादव ओबीसी जातियों को अपमानित करने पर भी घेरा। 2027 चुनाव से पहले पूर्वांचल में ओबीसी ध्रुवीकरण की कोशिश साफ़ दिख रही है।

मुख्य बातें

ओम प्रकाश राजभर ने 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर एक्स के ज़रिए अखिलेश यादव से यूपी की महिलाओं की सुरक्षा का सार्वजनिक वादा माँगा।
राजभर ने सपा पर गैर-यादव ओबीसी जातियों को 'चवन्नी', 'नीच' जैसे शब्दों से अपमानित करने का आरोप लगाया।
सहारनपुर में जनसभा न करने और दादरी की 'फ्लॉप सभा' का हवाला देते हुए अखिलेश की राजनीतिक पकड़ पर सवाल उठाए।
राजभर ने दावा किया कि 2017 के बाद से 'लठैत राजनीति' का दौर समाप्त हो चुका है और 36 बिरादरी सपा के विरुद्ध एकजुट हो रही है।
यह बयानबाज़ी 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी में ओबीसी वोट बैंक साधने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधा। राजभर ने अखिलेश से सार्वजनिक रूप से यह वादा करने की माँग की कि सपा से जुड़े कथित तत्व उत्तर प्रदेश की महिलाओं को परेशान नहीं करेंगे।

एक्स पर राजभर का सीधा सवाल

राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा, 'अखिलेश जी, आज रक्षा बंधन है। आज यूपी की बहनों को बस एक वादा कर दीजिए कि आपके गुंडे यूपी की बहनों पर गंदी निगाह नहीं रखेंगे, उन्हें छेड़ेंगे नहीं और उनके साथ कुछ गलत नहीं करेंगे। क्या ये तोहफ़ा आप यूपी की बहनों को दे सकते हैं?' यह पोस्ट रक्षाबंधन की सांस्कृतिक भावना को राजनीतिक दबाव के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश थी।

शुभकामनाओं के साथ राजनीतिक संदेश

इसी पोस्ट में राजभर ने देशवासियों को रक्षाबंधन की बधाई भी दी। उन्होंने लिखा, 'समस्त देश एवं प्रदेशवासियों को भाई-बहन के पवित्र स्नेह, अटूट विश्वास और स्नेहिल रिश्तों के पावन पर्व रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। रक्षाबंधन का यह पावन पर्व परिवार में प्रेम, अपनत्व और आपसी विश्वास को और प्रगाढ़ करने का संदेश देता है।' गौरतलब है कि त्योहार पर शुभकामनाओं के बीच राजनीतिक हमला उत्तर प्रदेश की पार्टियों में आम रणनीति बन चुकी है।

सहारनपुर और 'चवन्नी' पर तीखा प्रहार

राजभर ने इससे पहले भी एक्स पर अखिलेश यादव को निशाना बनाया था। उन्होंने एक भजन की पंक्तियाँ — 'उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहां जो तू सोवत है' — का हवाला देते हुए सपा प्रमुख पर कटाक्ष किया। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव में सहारनपुर जाकर जनसभा करने की हिम्मत नहीं है और तथाकथित 'चवन्नी' विवाद के कारण 36 बिरादरी उनके विरुद्ध एकजुट हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि गैर-यादव ओबीसी जातियों को 'चवन्नी', 'नीच', 'वेश्या' और 'चोर' जैसे शब्दों से संबोधित करना सपा के तथाकथित 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन के दावे को खोखला साबित करता है।

लठैत राजनीति के अंत का दावा

सुभासपा प्रमुख ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव अभी भी इस 'मुगालते' में जी रहे हैं कि 'लाठी से सरकार बना लेंगे', जबकि उनके अनुसार 'लठैतों का दौर 2017 में समाप्त हो गया।' राजभर ने दावा किया कि दादरी की जनसभा की विफलता के बाद सपा प्रमुख कोई बड़ी सभा आयोजित करने में असमर्थ हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाद पूर्वांचल सहित पूरा प्रदेश भी उनके विरुद्ध खड़ा होने की तैयारी में है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट के बीच सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सहयोगी दल सपा पर महिला सुरक्षा और जातीय समीकरण के मुद्दों पर आक्रामक हमले तेज़ कर रहे हैं। राजभर की सुभासपा पूर्वांचल में ओबीसी वोट बैंक में प्रभाव रखती है, और इस तरह के बयान उस आधार को मज़बूत करने की रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। आने वाले दिनों में सपा की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो महिला सुरक्षा पर जवाबदेही केवल विपक्ष से क्यों? 'चवन्नी' और 'लठैत' जैसे शब्दों का बार-बार इस्तेमाल बताता है कि 2027 से पहले जातीय ध्रुवीकरण की लड़ाई अभी से शुरू हो चुकी है। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को नज़रअंदाज़ करती है कि राजभर के ये बयान उनकी अपनी पार्टी की सौदेबाज़ी की स्थिति को भी मज़बूत करते हैं।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओपी राजभर ने रक्षाबंधन पर अखिलेश यादव से क्या वादा माँगा?
राजभर ने एक्स पर अखिलेश यादव से माँग की कि वे यूपी की बहनों को यह गारंटी दें कि सपा से जुड़े कथित तत्व महिलाओं को परेशान नहीं करेंगे। उन्होंने इसे रक्षाबंधन पर 'सबसे बड़ा तोहफा' बताया।
'चवन्नी' विवाद क्या है जिसका राजभर ने ज़िक्र किया?
राजभर ने आरोप लगाया कि सपा नेताओं ने गैर-यादव ओबीसी जातियों को 'चवन्नी', 'नीच', 'वेश्या' और 'चोर' जैसे शब्दों से संबोधित किया है। उनके अनुसार इस कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 36 बिरादरी सपा के विरुद्ध एकजुट हो रही है।
राजभर ने सहारनपुर का ज़िक्र क्यों किया?
राजभर ने अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनमें सहारनपुर जाकर जनसभा करने की हिम्मत नहीं है। यह बयान सपा की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कमज़ोर होती पकड़ की ओर इशारा करता है।
इस राजनीतिक विवाद का 2027 चुनाव से क्या संबंध है?
2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दल सपा पर महिला सुरक्षा और जातीय समीकरण के मुद्दों पर लगातार हमले तेज़ कर रहे हैं। राजभर की सुभासपा पूर्वांचल में ओबीसी वोट बैंक में प्रभाव रखती है और यह बयानबाज़ी उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
सुभासपा और समाजवादी पार्टी के बीच तनाव की वजह क्या है?
सुभासपा और सपा दोनों ओबीसी वोट बैंक पर दावा करती हैं, जिससे दोनों के बीच स्वाभाविक प्रतिस्पर्धा है। राजभर वर्तमान में BJP के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं और अखिलेश यादव पर नियमित हमले उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा बन चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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