रक्षाबंधन पर ओपी राजभर का अखिलेश पर वार: 'सपा के गुंडों से बहनों की सुरक्षा का वादा करें'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधा। राजभर ने अखिलेश से सार्वजनिक रूप से यह वादा करने की माँग की कि सपा से जुड़े कथित तत्व उत्तर प्रदेश की महिलाओं को परेशान नहीं करेंगे।
एक्स पर राजभर का सीधा सवाल
राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा, 'अखिलेश जी, आज रक्षा बंधन है। आज यूपी की बहनों को बस एक वादा कर दीजिए कि आपके गुंडे यूपी की बहनों पर गंदी निगाह नहीं रखेंगे, उन्हें छेड़ेंगे नहीं और उनके साथ कुछ गलत नहीं करेंगे। क्या ये तोहफ़ा आप यूपी की बहनों को दे सकते हैं?' यह पोस्ट रक्षाबंधन की सांस्कृतिक भावना को राजनीतिक दबाव के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश थी।
शुभकामनाओं के साथ राजनीतिक संदेश
इसी पोस्ट में राजभर ने देशवासियों को रक्षाबंधन की बधाई भी दी। उन्होंने लिखा, 'समस्त देश एवं प्रदेशवासियों को भाई-बहन के पवित्र स्नेह, अटूट विश्वास और स्नेहिल रिश्तों के पावन पर्व रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। रक्षाबंधन का यह पावन पर्व परिवार में प्रेम, अपनत्व और आपसी विश्वास को और प्रगाढ़ करने का संदेश देता है।' गौरतलब है कि त्योहार पर शुभकामनाओं के बीच राजनीतिक हमला उत्तर प्रदेश की पार्टियों में आम रणनीति बन चुकी है।
सहारनपुर और 'चवन्नी' पर तीखा प्रहार
राजभर ने इससे पहले भी एक्स पर अखिलेश यादव को निशाना बनाया था। उन्होंने एक भजन की पंक्तियाँ — 'उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहां जो तू सोवत है' — का हवाला देते हुए सपा प्रमुख पर कटाक्ष किया। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव में सहारनपुर जाकर जनसभा करने की हिम्मत नहीं है और तथाकथित 'चवन्नी' विवाद के कारण 36 बिरादरी उनके विरुद्ध एकजुट हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि गैर-यादव ओबीसी जातियों को 'चवन्नी', 'नीच', 'वेश्या' और 'चोर' जैसे शब्दों से संबोधित करना सपा के तथाकथित 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन के दावे को खोखला साबित करता है।
लठैत राजनीति के अंत का दावा
सुभासपा प्रमुख ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव अभी भी इस 'मुगालते' में जी रहे हैं कि 'लाठी से सरकार बना लेंगे', जबकि उनके अनुसार 'लठैतों का दौर 2017 में समाप्त हो गया।' राजभर ने दावा किया कि दादरी की जनसभा की विफलता के बाद सपा प्रमुख कोई बड़ी सभा आयोजित करने में असमर्थ हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाद पूर्वांचल सहित पूरा प्रदेश भी उनके विरुद्ध खड़ा होने की तैयारी में है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट के बीच सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सहयोगी दल सपा पर महिला सुरक्षा और जातीय समीकरण के मुद्दों पर आक्रामक हमले तेज़ कर रहे हैं। राजभर की सुभासपा पूर्वांचल में ओबीसी वोट बैंक में प्रभाव रखती है, और इस तरह के बयान उस आधार को मज़बूत करने की रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। आने वाले दिनों में सपा की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है।