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कृष्ण जन्मभूमि पर अखिलेश यादव को संजय निषाद की चुनौती: 'यदुवंशी हैं तो मथुरा की आवाज उठाएं'

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कृष्ण जन्मभूमि पर अखिलेश यादव को संजय निषाद की चुनौती: 'यदुवंशी हैं तो मथुरा की आवाज उठाएं'

सारांश

उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद ने अखिलेश यादव को सीधी चुनौती दी — 'यदुवंशी हैं तो मथुरा और कृष्ण जन्मभूमि की आवाज उठाएं।' अयोध्या के बाद मथुरा का मुद्दा अब यूपी की राजनीति का नया केंद्र बनता दिख रहा है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश मंत्री संजय निषाद ने 28 जून 2026 को लखनऊ में अखिलेश यादव को कृष्ण जन्मभूमि पर आवाज उठाने की चुनौती दी।
निषाद ने कहा — यदि अखिलेश यदुवंशी हैं तो मथुरा और कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर सबसे पहले खड़े होना चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन करते हुए निषाद ने कहा — बिना आस्था जोड़े धार्मिक विषयों पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं।
राहुल गांधी के कथित गुमशुदगी पोस्टर विवाद पर निषाद ने विपक्ष को 'विदेशी ताकतों का राजनीतिक स्पीकर' करार दिया।
RSS नेता इंद्रेश कुमार की बंटवारे पर टिप्पणी का समर्थन करते हुए निषाद ने कहा — विभाजन के लिए जिम्मेदार लोगों पर इतिहास के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने 28 जून 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे स्वयं को यदुवंशी मानते हैं, तो उन्हें मथुरा और कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर सबसे पहले आवाज उठानी चाहिए। निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन करते हुए विपक्ष पर कई मोर्चों पर तीखा प्रहार किया।

कृष्ण जन्मभूमि पर अखिलेश को चुनौती

संजय निषाद ने कहा, 'मुख्यमंत्री योगी के बयान का हम समर्थन करते हैं। अगर आप किसी विषय पर आवाज उठा रहे हैं तो पहले आस्था लाइए, दर्शन करिए और उस विचारधारा से जुड़िए। जब आप उस विचारधारा से जुड़े ही नहीं हैं तो उस पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अखिलेश यादव यदुवंशी विरासत का दावा करते हैं, तो उन्हें मथुरा में बैठक करनी चाहिए और कृष्ण जन्मभूमि की लड़ाई में साथ आना चाहिए।

निषाद ने आगे कहा, 'मैंने उन्हें कई बार सुझाव दिया है कि अगर वे यदुवंशी हैं तो सबसे पहले मथुरा की आवाज उठाएं। अब मथुरा की बारी है।' उनका यह बयान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच धार्मिक स्थलों को लेकर जारी बयानबाजी की पृष्ठभूमि में आया है।

भाजपा की विचारधारा का बचाव

अखिलेश यादव द्वारा भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर दान-संग्रह को लेकर की गई टिप्पणी के जवाब में निषाद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि एक विचारधारा की पार्टी है। उन्होंने कहा कि पार्टी की विचारधारा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी विकास की मुख्यधारा में लाने की है।

राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े आरोपों पर उन्होंने कहा, 'यदि कुछ लोग दोषी पाए गए हैं तो वे जेल जा रहे हैं। लेकिन दो-चार दोषियों को आधार बनाकर पूरी पार्टी पर उंगली नहीं उठाई जा सकती। जो दोषी होंगे, वे कानून के अनुसार जेल जाएंगे।'

राहुल गांधी के 'गुमशुदगी पोस्टर' विवाद पर प्रहार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर सामने आए कथित गुमशुदगी पोस्टरों के विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए निषाद ने कहा कि विपक्ष के लोग विदेशी ताकतों के राजनीतिक स्पीकर बन गए हैं। उन्होंने कहा, 'अगर वे वास्तव में भारत की जनता के प्रतिनिधि होते तो जनता के साथ खड़े रहते, उनकी आवाज बनते और पिछड़ों, दलितों, शोषितों तथा वंचितों के अधिकारों की बात करते।' उनका आरोप था कि विपक्षी नेता जनता के बीच से 'लापता' हो जाते हैं।

देश के विभाजन और इंद्रेश कुमार की टिप्पणी पर विचार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार द्वारा देश के बंटवारे पर की गई टिप्पणी के संदर्भ में निषाद ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के लोग सांस्कृतिक रूप से जुड़े हुए हैं और विभाजन का दर्द आज भी महसूस किया जाता है। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोग भी हमारे ही थे। धर्म बदल गया, लेकिन आज वहां की स्थिति देखिए — न खाने की व्यवस्था है, न शिक्षा और न रोजगार।'

निषाद ने यह भी कहा कि देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर इतिहास के आधार पर चर्चा होनी चाहिए और देश की आजादी में योगदान देने वाले क्रांतिकारियों को हमेशा सम्मान और स्मरण में रखा जाना चाहिए। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब धार्मिक स्थलों को लेकर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और अयोध्या के बाद मथुरा का मुद्दा राजनीतिक केंद्र में आता दिख रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो उन्हें या तो कृष्ण जन्मभूमि आंदोलन में खींचने या चुप रहने पर उनकी विरासत पर सवाल उठाने की स्थिति बनाता है। हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि मथुरा का मामला अदालत में लंबित है और इस पर की जा रही राजनीतिक बयानबाजी न्यायिक प्रक्रिया से परे जाकर सामाजिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर सकती है — यह पहलू मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर नजरअंदाज हो जाता है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निषाद ने अखिलेश यादव को क्या चुनौती दी?
उत्तर प्रदेश मंत्री संजय निषाद ने कहा कि यदि अखिलेश यादव स्वयं को यदुवंशी मानते हैं, तो उन्हें मथुरा और कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर सबसे पहले आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने अखिलेश से मथुरा में बैठक करने और भारतीय संस्कृति की विचारधारा के साथ खड़े होने का आह्वान किया।
संजय निषाद ने राहुल गांधी के गुमशुदगी पोस्टर विवाद पर क्या कहा?
निषाद ने कहा कि विपक्षी नेता विदेशी ताकतों के राजनीतिक स्पीकर बन गए हैं और जनता के बीच से 'लापता' हो जाते हैं। उनके अनुसार, सच्चे जनप्रतिनिधि पिछड़ों, दलितों और वंचितों के साथ खड़े रहते हैं।
RSS नेता इंद्रेश कुमार की टिप्पणी पर निषाद का क्या रुख है?
संजय निषाद ने RSS नेता इंद्रेश कुमार की देश के बंटवारे पर की गई टिप्पणी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोग सांस्कृतिक रूप से जुड़े हैं और विभाजन का दर्द आज भी महसूस होता है; इसके लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर इतिहास के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।
भाजपा पर अखिलेश यादव के 'डोनेशन' वाले आरोप पर निषाद ने क्या जवाब दिया?
निषाद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि एक विचारधारा की पार्टी है जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा में लाना चाहती है। राम मंदिर ट्रस्ट में दोषी पाए गए लोगों पर कानूनी कार्रवाई का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ दोषियों के आधार पर पूरी पार्टी पर उंगली उठाना उचित नहीं है।
मथुरा कृष्ण जन्मभूमि विवाद का राजनीतिक महत्व क्या है?
अयोध्या राम मंदिर निर्माण के बाद मथुरा कृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में तेजी से केंद्रीय स्थान ले रहा है। संजय निषाद जैसे भाजपा नेताओं के बयान संकेत देते हैं कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में प्रमुख धार्मिक-राजनीतिक एजेंडा बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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