क्या वोटर अधिकार यात्रा में शामिल होकर अखिलेश ने किया दिखावा?

सारांश
Key Takeaways
- वोटर अधिकार यात्रा का उद्देश्य मतदाता जागरूकता बढ़ाना है।
- संजय निषाद ने अखिलेश यादव की भागीदारी को दिखावा करार दिया।
- विपक्ष का पिछड़ों के मामलों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
- राहुल गांधी की इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका है।
- महुआ मोइत्रा के बयान पर संजय निषाद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
लखनऊ, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार निषाद ने वोटर अधिकार यात्रा में अखिलेश यादव की भागीदारी को एक दिखावा करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी गठबंधन का पिछड़ों से कोई वास्तविक संबंध नहीं है, वे सिर्फ दिखावा कर रहे हैं।
शनिवार को राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को समाज के पिछड़े और दलित समुदायों के मामलों से कोई सरोकार नहीं है। ये लोग केवल अपने लाभ के बारे में चिंतित हैं। समाज के हितों की इन लोगों को बिल्कुल परवाह नहीं है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को ‘घुसपैठिया बचाओ यात्रा’ कहने का मंत्री संजय निषाद ने समर्थन किया। उन्होंने कहा, "उन्होंने जो भी कहा है, वह सही है। लोकतंत्र में नागरिकों का मतदान का अधिकार होता है। 18 वर्ष का व्यक्ति ही मतदान का पात्र होता है। अगर किसी व्यक्ति का निधन हो जाता है, तो उसका नाम मतदान सूची से हटा दिया जाता है। सब कुछ नियमों के अनुसार होता है। लेकिन अब ये लोग नियमों का उल्लंघन करने पर आमादा हैं।"
ज्ञात हो कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 17 अगस्त को बिहार के सासाराम से ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत की, जो मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित वोट चोरी के खिलाफ एक जन जागरूकता अभियान है। यह 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में एक रैली के साथ समाप्त होगी। इस यात्रा में तेजस्वी यादव समेत महागठबंधन के नेता शामिल हैं। राहुल ने इसे संविधान और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत की रक्षा की लड़ाई बताया, जिसमें युवाओं, किसानों और हर वर्ग से भागीदारी की अपील की गई है।
वहीं, निषाद ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के बयान को हताशा का प्रतीक बताया और कहा कि जनता जनार्दन है। सभी लोग एनडीए के साथ आ रहे हैं। यह उनकी हताशा है, जिसकी मैं निंदा करता हूं। ऐसे बयान को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
संभल में उन्होंने कहा कि अब जनता संतुष्ट होगी। सूबे की जनता यह समझ रही होगी कि अब हमें ऐसे विपक्ष की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ऐसा विपक्ष हमारे समाज के लिए किसी भी सूरत में बेहतर नहीं है।