गांधी जयंती पर पोरबंदर में CM भूपेंद्र पटेल ने दी श्रद्धांजलि, स्वच्छ भारत और आत्मनिर्भरता को बताया गांधी के स्वप्न की परिणति
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 2 अक्टूबर 2026 को महात्मा गांधी की जन्मस्थली पोरबंदर में उनकी जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की और कहा कि स्वच्छता व स्वराज के गांधीवादी आदर्शों को 'स्वच्छ भारत मिशन' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी राष्ट्रीय पहलों के माध्यम से जन आंदोलनों का रूप दिया गया है। कीर्ति मंदिर में आयोजित प्रार्थना सभा में वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्कूली छात्र और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
गांधी के आदर्श और आज की नीतियाँ
मुख्यमंत्री पटेल ने 'आत्मनिर्भर भारत' की अवधारणा को गांधीजी के स्वराज के विचार से जोड़ते हुए कहा कि इसे देश के आधुनिक विकास की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला गया है। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें विभिन्न आयु वर्ग के लोग स्वयंसेवकों और 'स्वच्छाग्रहियों' के रूप में भागीदारी कर रहे हैं — यह गांधीजी की जन-भागीदारी की सोच का ही विस्तार है।
उन्होंने 'देश के लिए खादी, फैशन के लिए खादी' के संदेश का भी उल्लेख किया और कहा कि इस पहल के ज़रिए युवा पीढ़ी को खादी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रार्थना और सार्वभौमिक एकता का संदेश
पटेल ने कहा कि प्रार्थना आत्मा को पोषण देती है, आत्मचिंतन, विनम्रता और करुणा को प्रेरित करती है तथा सही मार्ग पर चलने के संकल्प को मज़बूत करती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रार्थना व्यक्तिगत हितों और धर्मों की सीमाओं से परे जाकर लोगों को एकजुट करती है और सद्भाव, शांति तथा राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देती है।
उन्होंने 'सर्व धर्म संभाव' के सिद्धांत को भारत की शक्ति का आधार बताया और कहा कि देश की विविधता में ही उसकी एकता निहित है।
मोदी के मंत्र को गांधी के आदर्शों से जोड़ा
मुख्यमंत्री पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दृष्टिकोण गाँवों और सुदूर समुदायों तक विकास पहुँचाकर गरीब और वंचित नागरिकों के समान सम्मान और कल्याण पर बल देता है — जो गांधीजी के सर्वोदय के विचार की ही प्रतिध्वनि है।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे आत्मनिर्भरता, गरीब कल्याण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करें।
मोढवाडिया का संवाद और शांति पर ज़ोर
गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि गांधीजी ने सरल प्रयासों से मानव जीवन को रूपांतरित किया और सत्य व अहिंसा का उनका संदेश आज भी विश्व के लिए उतना ही प्रासंगिक है। विश्व के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि विवादों के समाधान के लिए संवाद ही एकमात्र कारगर रास्ता है।
मोढवाडिया ने पोरबंदर की वैश्विक पहचान को गर्व का विषय बताया और नागरिकों से स्वच्छता को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अपने घर, गली और देश को स्वच्छ रखना ही गांधीजी को सच्ची श्रद्धांजलि है।
वसुधैव कुटुंबकम और वैश्विक भूमिका
मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि भारत 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना का पालन करता है और गांधीजी के अहिंसा, सर्वोदय और सार्वभौमिक बंधुत्व के आदर्शों के अनुरूप विश्व को एक परिवार मानता है। उन्होंने कहा कि भारत संवाद, साझेदारी और मानव-केंद्रित सहयोग को बढ़ावा देने में अपनी वैश्विक भूमिका निभाता रहेगा।
गौरतलब है कि 2 अक्टूबर को देशभर में गांधी जयंती के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है — एक ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर अहिंसा और संवाद की प्रासंगिकता और बढ़ गई है।