गांधी जयंती पर गुजरात CM भूपेंद्र पटेल ने खादी खरीदी, डिजिटल पेमेंट से की खरीदारी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 2 अक्टूबर 2026 को महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर गांधीनगर स्थित सौराष्ट्र रचनात्मक समिति के खादी ग्रामोद्योग हाट से खादी के वस्त्र खरीदे और डिजिटल भुगतान किया। यह खरीदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के जवाब में की गई, जिसमें उन्होंने देशवासियों से 2 अक्टूबर को कम से कम एक खादी उत्पाद खरीदने और स्वदेशी पर गर्व करने का आह्वान किया था।
पोरबंदर से गांधीनगर तक का सफर
मुख्यमंत्री पटेल पहले पोरबंदर के कीर्ति मंदिर पहुँचे, जहाँ उन्होंने गांधीजी को पुष्पांजलि अर्पित की और वहाँ आयोजित सर्व धर्म प्रार्थना सभा में भाग लिया। इसके बाद वे गांधीनगर लौटकर खादी ग्रामोद्योग हाट गए, जहाँ उन्होंने खादी के विभिन्न वस्त्र खरीदे।
इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल, विधायक ऋताबेन पटेल और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी उनके साथ उपस्थित थे।
डिजिटल पेमेंट और स्वदेशी का संदेश
मुख्यमंत्री पटेल ने इस खरीदारी को खादी और डिजिटल लेनदेन — दोनों पर प्रधानमंत्री के जोर से सीधे जोड़ा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्षों से 'देश के लिए खादी, फैशन के लिए खादी' के संदेश के ज़रिए खादी उद्योग को पुनर्जीवित करने की कोशिश की है।
केंद्र सरकार ने खादी को अपने व्यापक आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत स्थानीय उत्पादन और ग्रामीण आजीविका के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है।
गुजरात सरकार की विशेष छूट
गुजरात राज्य सरकार ने 2 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक खादी और पॉलीवस्त्र उत्पादों पर 30 प्रतिशत की विशेष बाज़ार छूट की घोषणा की है। यह छूट राज्य के मान्यता प्राप्त खादी संस्थानों और सहकारी समितियों के भाग लेने वाले आउटलेट्स पर लागू होगी।
इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को खरीदारी के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ खादी से जुड़े कारीगरों और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सहारा देना है।
गांधी विरासत और आज की प्रासंगिकता
महात्मा गांधी ने खादी और स्वदेशी को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध आर्थिक प्रतिरोध के हथियार के रूप में अपनाया था। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें एक साथ स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने की नीति पर चल रही हैं, जो गांधीजी के ग्रामोद्योग के विचार से प्रेरित मानी जाती है।
आने वाले महीनों में 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहने वाली इस छूट योजना के तहत खादी बिक्री के आँकड़े यह बताएँगे कि सांकेतिक राजनीतिक संदेश ज़मीनी स्तर पर कितना असर दिखाते हैं।