10 अगस्त 2026
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देवेंद्र नाथ महतो 9 दिन के अनशन के बाद अस्पताल में भर्ती, विधानसभा घेराव में पुलिस लाठीचार्ज

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देवेंद्र नाथ महतो 9 दिन के अनशन के बाद अस्पताल में भर्ती, विधानसभा घेराव में पुलिस लाठीचार्ज

सारांश

9 दिनों की भूख हड़ताल के बाद जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो को समर्थकों ने पालकी में उठाकर झारखंड विधानसभा तक पहुँचाया। घेराव के बाद पुलिस लाठीचार्ज में चोट लगी और तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रांची के सदर अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट पर भर्ती कराया गया।

मुख्य बातें

देवेंद्र नाथ महतो (जेएलकेएम नेता) 9 दिनों की भूख हड़ताल के बाद 10 अगस्त की शाम रांची सदर अस्पताल में भर्ती।
चिकित्सकों के अनुसार हालत गंभीर; ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है।
एंबुलेंस जगन्नाथपुर मंदिर के पास रोके जाने के बाद समर्थकों ने पालकी बनाकर उन्हें विधानसभा तक पहुँचाया।
शाम 6:30 बजे छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की के बाद लाठीचार्ज हुआ।
किसी बड़ी चोट की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं ; डॉक्टरों की टीम निगरानी में।

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्र नाथ महतो को सोमवार, 10 अगस्त की शाम तबीयत बिगड़ने के बाद रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वह पिछले 9 दिनों से भूख हड़ताल पर थे और इसी हालत में विधानसभा घेराव में शामिल हुए थे। चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है।

विधानसभा तक पालकी में पहुँचे महतो

जानकारी के अनुसार, देवेंद्र नाथ महतो को एंबुलेंस से विधानसभा ले जाया जा रहा था, लेकिन जगन्नाथपुर मंदिर के पास प्रशासन ने एंबुलेंस रोक दी। इसके बाद उनके समर्थकों ने कपड़े और डंडों से बनी पालकी तैयार कर उन्हें कंधों पर उठाकर विधानसभा के निकट तक पहुँचाया। वह शाम तक वहीं धरने पर बैठे रहे।

पुलिस और छात्रों में धक्का-मुक्की, लाठीचार्ज

विधानसभा घेराव के बाद शाम करीब 6:30 बजे जब छात्र और अभ्यर्थी वापस लौट रहे थे, तब छात्रों और प्रशासन के बीच नोकझोंक हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रशासन द्वारा सड़क खाली करने के निर्देश के बावजूद प्रदर्शनकारी हटने को तैयार नहीं हुए, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसी धक्का-मुक्की में देवेंद्र नाथ महतो को भी चोट लगी।

अस्पताल में उपचार जारी, हालत गंभीर

चोट लगने और स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने के बाद देवेंद्र नाथ महतो को सदर अस्पताल भेजा गया। अस्पताल पहुँचने पर चिकित्सकों ने तत्काल उनका आकलन किया और ऑक्सीजन सपोर्ट शुरू किया। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी में है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार अभी तक किसी बड़ी चोट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

क्या है छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में छात्र और अभ्यर्थी अपनी माँगों को लेकर लगातार सड़क पर हैं। देवेंद्र नाथ महतो इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं। गौरतलब है कि 9 दिनों की भूख हड़ताल के बाद भी वह शारीरिक रूप से कमज़ोर हालत में आंदोलन में शामिल रहे, जो उनके समर्थकों के लिए प्रेरणा का विषय बन गया। आगे उनकी स्वास्थ्य स्थिति और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सबकी नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह आंदोलन और उग्र हो सकता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवेंद्र नाथ महतो कौन हैं और वे अनशन पर क्यों बैठे थे?
देवेंद्र नाथ महतो झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता हैं और झारखंड के छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं। वह छात्रों और अभ्यर्थियों की माँगों के समर्थन में 9 दिनों से भूख हड़ताल पर थे।
देवेंद्र नाथ महतो को अस्पताल क्यों भर्ती कराया गया?
10 अगस्त की शाम विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की में उन्हें चोट लगी और 9 दिनों की भूख हड़ताल से तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया है।
झारखंड विधानसभा घेराव के दौरान क्या हुआ?
10 अगस्त को छात्रों और अभ्यर्थियों ने झारखंड विधानसभा का घेराव किया। शाम करीब 6:30 बजे वापस लौटते समय छात्रों और प्रशासन के बीच नोकझोंक हुई, नारेबाजी हुई और सड़क न खाली करने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
देवेंद्र नाथ महतो को विधानसभा तक कैसे पहुँचाया गया?
एंबुलेंस को जगन्नाथपुर मंदिर के पास प्रशासन ने रोक दिया था। इसके बाद समर्थकों ने कपड़े और डंडों से पालकी बनाकर उन्हें कंधों पर उठाकर विधानसभा के नज़दीक तक पहुँचाया।
देवेंद्र नाथ महतो की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति क्या है?
चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। अभी तक किसी बड़ी चोट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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