आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती को मिली वैधानिक मान्यता, राज्यसभा ने विधेयक किया पारित
सारांश
Key Takeaways
- आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी के रूप में अमरावती को वैधानिक मान्यता मिली।
- विधेयक का उद्देश्य प्रशासनिक स्थिरता और विकास को बढ़ावा देना है।
- इस संशोधन से निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी आएगी।
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राज्य सभा ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित किया। यह विधेयक अमरावती को आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी के रूप में वैधानिक मान्यता देने के उद्देश्य से लाया गया है। यह विधेयक आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव को कानूनी आधार भी प्रदान करता है। लोकसभा में पहले ही इस विधेयक को मंजूरी मिल चुकी है। विधेयक की पारित होने से पहले सदन में इस पर चर्चा की गई।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने चर्चा का समापन करते हुए बताया कि इस संशोधन के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि अमरावती आंध्र प्रदेश की राजधानी होगी। इसके साथ ही, अधिनियम में एक स्पष्ट स्पष्टीकरण जोड़ा जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अमरावती को ही राज्य की वैधानिक राजधानी के रूप में मान्यता मिले। 28 मार्च को आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित संकल्प को लागू करने के लिए भी यह संशोधन आवश्यक है। इससे अमरावती का नाम राज्य की राजधानी के रूप में सम्मिलित किया जा सकेगा और किसी भी विधिक शंका का समाधान हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि एक स्पष्ट और स्थिर राजधानी किसी भी राज्य के प्रशासनिक ढांचे के लिए अत्यंत आवश्यक होती है। यह शासन व्यवस्था में पारदर्शिता लाती है, निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करती है और विकास योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाती है। अमरावती को वैधानिक रूप से राजधानी का दर्जा मिलने से राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बुनियादी ढांचे का विकास तेजी से होगा और समग्र आर्थिक प्रगति को बल मिलेगा।
गृह राज्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह संशोधन विधेयक 'विकसित भारत' के संकल्प की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और आंध्र प्रदेश को विकास की मुख्यधारा में और सशक्त बनाएगा। उन्होंने इस महत्वपूर्ण विधेयक पर अपने विचार साझा करने वाले सभी सांसदों का आभार भी व्यक्त किया। सदन में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 पर विस्तृत और सारगर्भित चर्चा हुई है। सभी सदस्यों ने राज्य के हित और भविष्य के विकास को ध्यान में रखते हुए अपने सुझाव दिए हैं।
गृह राज्यमंत्री ने कहा कि जैसा कि ज्ञात है, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत राज्य के पुनर्गठन के समय राजधानी के संबंध में प्रावधान किए गए थे। उस समय यह व्यवस्था की गई थी कि हैदराबाद एक निश्चित अवधि तक संयुक्त राजधानी के रूप में कार्य करेगा और इसके बाद आंध्र प्रदेश के लिए एक नई राजधानी विकसित की जाएगी, लेकिन अधिनियम में स्थायी राजधानी के संबंध में स्पष्ट वैधानिक उल्लेख नहीं था, जिसके कारण समय-समय पर व्याख्यात्मक और प्रशासनिक अस्पष्टता उत्पन्न हुई।
इसी क्रम में आंध्र प्रदेश सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर अमरावती को राज्य की राजधानी के रूप में नामित किया। इसके बाद राज्य में राजधानी के विषय पर विभिन्न स्तरों पर विचार-विमर्श होता रहा। हाल ही में, आंध्र प्रदेश विधानसभा ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें भारत सरकार से अनुरोध किया गया है कि अमरावती को आंध्र प्रदेश की वैधानिक राजधानी का दर्जा प्रदान करने के लिए आवश्यक संशोधन किए जाएं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं और उनके विधायी निर्णयों का पूर्ण सम्मान करती है। आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित इस प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए ही यह संशोधन विधेयक सदन के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य आंध्र प्रदेश की राजधानी के संबंध में वैधानिक अस्पष्टता को दूर करना और स्थिति को स्पष्ट तथा स्थिर बनाना है।