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अमरावती को राजधानी का कानूनी दर्जा देने के लिए कैबिनेट ने प्रस्ताव की मंजूरी, विधानसभा में होगी चर्चा

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अमरावती को राजधानी का कानूनी दर्जा देने के लिए कैबिनेट ने प्रस्ताव की मंजूरी, विधानसभा में होगी चर्चा

सारांश

अमरावती को राज्य की राजधानी के रूप में कानूनी मान्यता देने के लिए आंध्र प्रदेश की कैबिनेट ने प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह प्रस्ताव २८ मार्च को विधानसभा में पेश किया जाएगा, जिसमें चार घंटे तक चर्चा होगी।

मुख्य बातें

अमरावती को कानूनी दर्जा देने का प्रस्ताव पारित किया गया है।
विधानसभा में इस पर चर्चा की जाएगी।
यह कदम राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
केंद्र सरकार से संशोधन की मांग की जाएगी।
किसानों की मांग को भी ध्यान में रखा जाएगा।

अमरावती, २६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश की कैबिनेट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए अमरावती को राज्य की राजधानी के रूप में कानूनी मान्यता (लीगल सैंक्टिटी) प्रदान करने के लिए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह प्रस्ताव २८ मार्च को विधानसभा के विशेष सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा।

मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस प्रस्ताव पर विधानसभा में लगभग चार घंटे तक चर्चा की जाएगी।

इस प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार से अनुरोध किया जाएगा कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, २०१४ की धारा-५ में संशोधन करके अमरावती को आधिकारिक रूप से राज्य की राजधानी के रूप में मान्यता दी जाए।

कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (सीआरडीए) एक्ट में 'न्यू स्टेट कैपिटल' के स्थान पर 'अमरावती' शब्द जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पहले ही केंद्र से अमरावती को कानूनी दर्जा देने की मांग कर चुके हैं। केंद्र सरकार ने राज्य से इस संबंध में विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर भेजने को कहा था, ताकि भविष्य में किसी भी तकनीकी या कानूनी जटिलता से बचा जा सके।

सूत्रों के अनुसार, विधानसभा से प्रस्ताव पारित होने के बाद केंद्र सरकार की कैबिनेट इस पर अंतिम मुहर लगाएगी और संसद के वर्तमान सत्र में अमरावती को आधिकारिक राजधानी घोषित करने की संभावना है।

अमरावती के लिए अपनी भूमि देने वाले किसानों ने भी लंबे समय से इसे कानूनी दर्जा देने की मांग की है।

यह ध्यान देने योग्य है कि २०१५ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमरावती की आधारशिला रखी थी। हालांकि २०१९ में वाईएसआर कांग्रेस की सरकार आने के बाद राजधानी परियोजना को रोक दिया गया था और तीन राजधानियों का प्रस्ताव सामने आया था।

२२४ में तेलुगु देशम पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद अमरावती को फिर से राजधानी के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह न केवल अमरावती के लिए, बल्कि राज्य के समग्र विकास के लिए भी लाभदायक होगा।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरावती को कानूनी दर्जा कब मिलेगा?
यदि विधानसभा में प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो अमरावती को जल्द ही कानूनी दर्जा मिल सकता है।
कैबिनेट की इस बैठक में कौन शामिल था?
मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में यह बैठक हुई थी।
क्या प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा?
हाँ, प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके।
क्या किसानों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है?
जी हाँ, अमरावती के लिए भूमि देने वाले किसानों ने इस कानूनी दर्जे की मांग की है।
कब से अमरावती को राजधानी के रूप में मान्यता देने की प्रक्रिया चल रही है?
२०१५ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमरावती की आधारशिला रखी थी।
राष्ट्र प्रेस
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