आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने चंडीगढ़ शाखा धोखाधड़ी मामले में 645 करोड़ रुपए का भुगतान किया

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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने चंडीगढ़ शाखा धोखाधड़ी मामले में 645 करोड़ रुपए का भुगतान किया

सारांश

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने अपनी चंडीगढ़ शाखा में धोखाधड़ी के मामले में 645 करोड़ रुपए का भुगतान किया, जो पहले के अनुमान से अधिक है। बैंक की जांच में कोई नई गड़बड़ी नहीं पाई गई है। जानिए इस मामले के महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।

मुख्य बातें

645 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।
कोई नई गड़बड़ी नहीं मिली है।
हरियाणा सरकार ने बैंकों को सरकारी कार्य से हटाया।
बैंक की जमा राशि स्थिर है।
केपीएमजी फॉरेंसिक ऑडिट कर रहा है।

नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने मंगलवार को घोषणा की कि उसने अपनी चंडीगढ़ शाखा में हुई धोखाधड़ी से संबंधित दावों के रूप में कुल 645 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है। यह राशि पहले के अनुमान से 55 करोड़ रुपए अधिक है। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान अब तक कोई नई गड़बड़ी नहीं मिली है।

बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कहा कि प्रारंभिक अनुमान 590 करोड़ रुपए था, लेकिन बाद में प्राप्त दावों के आधार पर कुल 645 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।

बैंक के अनुसार, ये सभी दावे एक ही घटना और चंडीगढ़ शाखा से जुड़े हैं; कोई नया मामला नहीं आया है। बैंक ने बताया कि सभी संबंधित खातों का मिलान कर लिया गया है और 25 फरवरी 2026 के बाद से देशभर में कोई नया दावा नहीं मिला है।

बैंक ने कहा कि उसने अपने सिद्धांतों के अनुसार प्रभावित ग्राहकों को यह भुगतान किया है और भविष्य में धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा ताकि नुकसान की वसूली की जा सके।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा कि इस घटना के बावजूद बैंक की जमा राशि (डिपॉजिट बेस) स्थिर बनी हुई है। 28 फरवरी तक बैंक का कुल डिपॉजिट 2,92,381 करोड़ रुपए था, जबकि दिसंबर के अंत में यह 2,91,133 करोड़ रुपए था।

बैंक ने अपने ग्राहकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह केवल चंडीगढ़ की एक शाखा से संबंधित एक अलग घटना है। बैंक का लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (एलसीआर) वर्तमान तिमाही में 114 प्रतिशत के आरामदायक स्तर पर है। बैंक को आशा है कि भविष्य में भी डिपॉजिट और लोन की वृद्धि पहले की तरह जारी रहेगी।

इससे पहले बैंक ने बताया था कि हरियाणा सरकार के खातों से जुड़े लगभग 590 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था, जिसमें कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

मामले की जांच के लिए बैंक ने केपीएमजी को फॉरेंसिक ऑडिट सौंपा है, जिसकी अंतिम रिपोर्ट चार से पांच सप्ताह में आने की उम्मीद है। साथ ही, जांच पूरी होने तक बैंक ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।

इस घटना के बाद हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह घटना न केवल प्रभावित ग्राहकों के लिए, बल्कि पूरे वित्तीय क्षेत्र के लिए एक चेतावनी के रूप में कार्य करती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कितने करोड़ रुपए का भुगतान किया?
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने चंडीगढ़ शाखा में धोखाधड़ी मामले से संबंधित 645 करोड़ रुपए का भुगतान किया है।
क्या बैंक ने नई गड़बड़ियों की खोज की है?
बैंक ने कहा है कि जांच के दौरान अब तक कोई नई गड़बड़ी सामने नहीं आई है।
घटना के बाद हरियाणा सरकार ने क्या कदम उठाए?
हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज से हटा दिया है।
बैंक का लिक्विडिटी कवरेज रेशियो क्या है?
बैंक का लिक्विडिटी कवरेज रेशियो वर्तमान तिमाही में 114 प्रतिशत है।
कौन सी फर्म ने मामले की जांच की जिम्मेदारी ली है?
बैंक ने केपीएमजी को फॉरेंसिक ऑडिट के लिए नियुक्त किया है।
राष्ट्र प्रेस
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