कोटक महिंद्रा बैंक की पंचकूला शाखा में 150 करोड़ की वित्तीय धोखाधड़ी का खुलासा, जांच शुरू
सारांश
Key Takeaways
- कोटक महिंद्रा बैंक की पंचकूला शाखा में १५० करोड़ रुपए की गड़बड़ी का खुलासा।
- पंचकुला नगर निगम की जांच ने मामले को उजागर किया।
- बैंक रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा पाया गया।
- हरियाणा सरकार ने संबंधित बैंकों पर कार्रवाई की।
नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हरियाणा में एक गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें कोटक महिंद्रा बैंक की पंचकूला शाखा में १५० करोड़ रुपए से अधिक की गड़बड़ी का पता चला है। यह मामला तब उजागर हुआ जब पंचकुला नगर निगम ने अपने फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की जांच की।
यह घटना एक महीने पहले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में ५९० करोड़ रुपए के घोटाले के बाद आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम ने बैंक की सेक्टर-११ शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडीआर) के रूप में धन जमा किया था। मामला तब सामने आया जब निगम ने ५८ करोड़ रुपए की एफडी मैच्योर होने पर उसे अपने खाते में ट्रांसफर करने की मांग की।
शुरुआत में बैंक रिकॉर्ड में दिखाया गया कि पैसा ट्रांसफर हो गया है, लेकिन वास्तव में यह राशि निगम के खाते में नहीं पहुंची।
जांच में पता चला कि बैंक स्टेटमेंट फर्जी था और पैसा कथित तौर पर फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिया गया था।
अधिकारीयों ने आगे की जांच में पाया कि इस मामले से जुड़े सभी फिक्स्ड डिपॉजिट भी फर्जी थे और खातों में असल में कोई धन मौजूद नहीं था।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, कोटक महिंद्रा बैंक ने कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है और नगर निगम के द्वारा संपर्क करने के बाद सभी खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट का विस्तृत मिलान किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, कुल गड़बड़ी १५० करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और भी जानकारी सामने आ सकती है।
इससे पहले, पिछले महीने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने अपनी चंडीगढ़ शाखा में ५९० करोड़ रुपए के घोटाले की जानकारी दी थी।
२२ फरवरी को एक एक्सचेंज फाइलिंग में बैंक ने कहा था कि दोषी कर्मचारियों और अन्य बाहरी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, इस मामले के बाद हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज से तुरंत प्रभाव से हटा दिया।