हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में दो आईएएस अधिकारियों को किया निलंबित
सारांश
Key Takeaways
- हरियाणा सरकार ने दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित किया।
- ईडी ने 19 स्थानों पर छापेमारी की।
- 90 से अधिक बैंक खाते फ्रीज किए गए।
- शेल कंपनियों का इस्तेमाल करके सरकारी धन का घोटाला हुआ।
- जांच अभी भी जारी है।
चंडीगढ़, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हरियाणा राज्य सरकार ने गुरुवार को 597 करोड़ रुपए के आईडीएफसी फर्स्ट और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले के मामले में दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया।
निलंबित अधिकारियों में राम कुमार सिंह और प्रदीप कुमार शामिल हैं। राम कुमार सिंह (2012 बैच) पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी में अतिरिक्त सीईओ के पद पर कार्यरत थे। वहीं, प्रदीप कुमार (2012 बैच) राज्य परिवहन के निदेशक और परिवहन विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे थे।
आधिकारिक आदेश के अनुसार, निलंबन की अवधि के दौरान इन दोनों अधिकारियों का मुख्यालय मुख्य सचिव के कार्यालय में रहेगा।
पिछले महीने, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले के सिलसिले में चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला, गुड़गांव और बेंगलुरु में 19 स्थानों पर तलाशी ली। ईडी ने एक बयान में कहा कि तलाशी के दौरान 90 से अधिक बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं, और डिजिटल तथा दस्तावेजी सबूतों के रूप में आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई है।
ईडी के चंडीगढ़ जोनल ऑफिस ने जानकारी दी कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी एजेंसियों के खातों से पैसे का गबन किया गया था।
ईडी ने पीएमएलए, 2002 के तहत एक जांच शुरू की है। यह जांच हरियाणा के विकास और पंचायत विभाग के बैंक खातों में बैलेंस में गड़बड़ी के संबंध में फरवरी 2026 में पंचकूला के राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर पर आधारित है। ये खाते आईडीएफसी बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में थे।
ईडी ने बताया कि इस रकम को बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के तौर पर रखा जाना था। लेकिन, आरोपियों ने बिना अनुमति के इन सरकारी फंड्स को दूसरी जगह भेज दिया। जांच में पता चला है कि आरोपियों द्वारा गबन किए गए सरकारी पैसे को कई शेल कंपनियों के जरिए घुमाया और छिपाया गया है।
ईडी ने बताया कि आरोपियों का तरीका यह था कि वे पहले एक शेल कंपनी, 'स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स' बनाते थे और सरकारी पैसों को इसी खाते में भेज देते थे। इसके बाद, ईडी के मुताबिक, ज्यादातर पैसों को जौहरियों के बैंक खातों के जरिए घुमाया गया, ताकि नकली बिलिंग के जरिए सोने की खरीद का दिखावा किया जा सके।
ईडी ने आगे बताया कि यह घोटाला पिछले लगभग एक साल से चल रहा था, जिसमें बैंक के पूर्व कर्मचारियों ने मदद की थी। जांच एजेंसी ने बताया कि ऋषि, जो आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व कर्मचारियों में से एक है, ने बैंक के पैसों को निकालने के लिए अलग-अलग शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया था। उसने जून 2025 में बैंक से इस्तीफा दे दिया था।
ईडी ने आगे बताया कि अपराध से कमाए गए कुछ पैसे तो ऋषि और उसकी पत्नी, दिव्या अरोड़ा के बैंक खातों में भी डाल दिए गए थे। इसके अलावा, ईडी ने बताया कि वधवा नाम के एक होटल मालिक और रियल एस्टेट डेवलपर ने भी काफी बड़ी रकम निकाल ली थी; वधवा मोहाली में कई प्रोजेक्ट चला रहा है।