13 अक्टूबर 2026
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दिल्ली पुलिस ने कंबोडिया से जुड़े डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट के 11 साइबर ठग दबोचे, ₹7.25 करोड़ की धोखाधड़ी रोकी

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दिल्ली पुलिस ने कंबोडिया से जुड़े डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट के 11 साइबर ठग दबोचे, ₹7.25 करोड़ की धोखाधड़ी रोकी

सारांश

दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने कंबोडिया से संचालित डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए 11 साइबर ठगों को दबोचा। ₹7.25 करोड़ की ठगी रोकी गई और ₹1.96 करोड़ फ्रीज किए गए। टेलीग्राम चैनल, क्रिप्टो कमीशन और म्यूल खातों के नेटवर्क से 78 NCRP शिकायतें जुड़ीं — कुल ₹73 करोड़ की रकम दाँव पर थी।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस IFSO ने 13 अक्टूबर 2026 को कंबोडिया से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट के 11 आरोपी गिरफ्तार किए।
'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले से ₹7.25 करोड़ के संभावित नुकसान को रोका गया; HDFC और SBI खातों में ₹1.96 करोड़ फ्रीज।
मुख्य हैंडलर अनीश खान (एटा, उत्तर प्रदेश) टेलीग्राम के ज़रिए विदेशी आकाओं से जुड़ा था और 5.5% कमीशन USDT में लेता था।
7 टेलीग्राम चैनलों से म्यूल बैंक खातों की खरीद-फरोख्त होती थी; 6 मोबाइल और चेकबुक जब्त।
आरोपियों का संबंध देशभर की 78 NCRP शिकायतों से जुड़ा, जिनमें कुल ₹73 करोड़ की राशि शामिल।
नेटवर्क उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश तक फैला था।

दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशन्स (IFSO) यूनिट ने 13 अक्टूबर 2026 को कंबोडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों से संचालित एक अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए 11 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले के ज़रिए होने वाले ₹7.25 करोड़ के संभावित नुकसान को रोका गया और धोखाधड़ी से जुड़े बैंक खातों में मौजूद ₹1.96 करोड़ फ्रीज कर दिए गए।

मामले की शुरुआत कहाँ से हुई

IFSO यूनिट के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस गौरव त्यागी के अनुसार, जाँच की शुरुआत 69 वर्षीय प्रदीप कुमार दास की शिकायत से हुई। दास इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में रिटायर्ड साइंटिस्ट 'एफ' और डायरेक्टर रह चुके हैं। उन्होंने ₹1.25 करोड़ की 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी।

जाँच में पुलिस ने दिल्ली के द्वारका सेक्टर-7 स्थित एक होटल और एक फ्लैट की पहचान की। इसके साथ एक मोबाइल नंबर का भी पता चला, जो कथित तौर पर साइबर क्राइम में इस्तेमाल होने वाले एम ट्रेडर्स के HDFC बैंक खाते से जुड़ा था।

मुख्य आरोपी और नेटवर्क का तरीका

पुलिस के अनुसार, मुख्य हैंडलर की पहचान उत्तर प्रदेश के एटा निवासी अनीश खान के तौर पर हुई। वह टेलीग्राम के ज़रिए विदेश में बैठे आकाओं के संपर्क में था और साइबर क्राइम से जुड़े बैंक खाते संचालित करता था। जाँच में यह भी सामने आया कि वह कथित तौर पर 5.5 प्रतिशत कमीशन पर काम करता था, जो USDT (क्रिप्टोकरेंसी) में लिया जाता था और बाद में विभिन्न क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के ज़रिए भारतीय रुपये में बदला जाता था।

एक अन्य संबंधित मामले का मास्टरमाइंड राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के डाबरी गाँव निवासी 31 वर्षीय अनिल सागू उर्फ कृष्णा को बताया गया है, जिसे स्पेशल सेल द्वारा दर्ज एक मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों का विवरण

गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में पश्चिम बंगाल के महफूजुर रहमान और इजहार आलम, जम्मू-कश्मीर के अल्ताफ हुसैन, यूपी के मुजफ्फरनगर के इंतखाब, मेरठ के अकाउंट होल्डर नीरज कुमार मित्तल और इंट्रोड्यूसर कंवर पाल, यूपी के गजरौला निवासी सैफ अली खान, शिमला जिले के रामपुर निवासी रणबीर और दिल्ली के मंगोलपुरी निवासी प्रभात राय उर्फ आशुतोष शामिल हैं।

डिजिटल साक्ष्य और व्यापक नेटवर्क

जाँच के दौरान पुलिस ने MR ट्रेडर्स की HDFC बैंक से जुड़ी चेकबुक बरामद की और 6 मोबाइल फोन जब्त किए, जिनमें व्हाट्सएप चैट, टेलीग्राम चैट, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और अन्य अहम डिजिटल साक्ष्य मिले।

पुलिस ने 7 टेलीग्राम चैनलों की पहचान की है, जिनके ज़रिए आरोपी 'म्यूल बैंक अकाउंट' खरीद-बेच रहे थे। इन चैट्स के विश्लेषण से आरोपियों का संबंध देशभर में दर्ज 78 NCRP शिकायतों से जुड़ा पाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इन 78 शिकायतों में कुल ₹73 करोड़ की राशि शामिल थी।

आगे की जाँच और संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले पूरे देश में तेज़ी से फैल रहे हैं। गौरतलब है कि इस सिंडिकेट के तार आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों तक फैले हुए थे। पुलिस के अनुसार, मामले की जाँच अभी जारी है और और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें कंबोडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया से भारतीय नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। चिंताजनक यह है कि इस नेटवर्क ने सेवानिवृत्त सरकारी वैज्ञानिक जैसे शिक्षित और सतर्क नागरिकों को भी नहीं बख्शा। ₹73 करोड़ की 78 शिकायतें यह बताती हैं कि पकड़े गए आरोपी बड़े हिमखंड का महज दृश्य हिस्सा हैं। USDT-से-रुपया क्रिप्टो रूपांतरण चेन इस बात का संकेत है कि पारंपरिक बैंकिंग निगरानी तंत्र इन अपराधों को पकड़ने में पिछड़ रहा है — और इसका जवाब केवल गिरफ्तारियों से नहीं, बल्कि क्रिप्टो एक्सचेंजों पर सख्त रेगुलेटरी नज़र और अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण सहयोग से आएगा।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस का डिजिटल अरेस्ट ऑपरेशन क्या है?
दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने 13 अक्टूबर 2026 को कंबोडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया से संचालित एक अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस ऑपरेशन में ₹7.25 करोड़ की संभावित ठगी रोकी गई और धोखाधड़ी वाले खातों में ₹1.96 करोड़ फ्रीज किए गए।
डिजिटल अरेस्ट घोटाला कैसे काम करता है?
डिजिटल अरेस्ट घोटाले में ठग खुद को पुलिस, CBI या सीमा शुल्क अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को 'डिजिटल रूप से हिरासत में' रखते हैं और उन पर मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य गंभीर अपराध का झूठा आरोप लगाते हैं। इस डर से पीड़ित बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते हैं। इस मामले में एक रिटायर्ड सरकारी वैज्ञानिक से ₹1.25 करोड़ की ठगी की कोशिश की गई थी।
इस मामले में कुल कितने राज्यों के आरोपी शामिल हैं?
गिरफ्तार किए गए आरोपी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश से हैं। पुलिस के अनुसार इनके बैंक क्रेडेंशियल्स देशभर की 78 NCRP शिकायतों से जुड़े पाए गए।
आरोपी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल क्यों कर रहे थे?
मुख्य हैंडलर अनीश खान कथित तौर पर 5.5 प्रतिशत कमीशन USDT (एक स्थिर क्रिप्टोकरेंसी) में लेता था, जिसे बाद में विभिन्न क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के ज़रिए भारतीय रुपये में बदला जाता था। यह तरीका पारंपरिक बैंकिंग निगरानी से बचने के लिए अपनाया जाता है।
इस ऑपरेशन में कितनी रकम जुड़ी हुई थी?
पुलिस के अनुसार, 78 NCRP शिकायतों में कुल ₹73 करोड़ की राशि शामिल थी। इस ऑपरेशन में ₹7.25 करोड़ के संभावित नुकसान को रोका गया और धोखाधड़ी वाले HDFC व SBI खातों में मौजूद ₹1.96 करोड़ फ्रीज किए गए।
राष्ट्र प्रेस
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