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टीएमसी विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी ने बनाई एसआईटी, अभिषेक बनर्जी तलब

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टीएमसी विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी ने बनाई एसआईटी, अभिषेक बनर्जी तलब

सारांश

पश्चिम बंगाल में टीएमसी विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले ने नया मोड़ लिया है — सीआईडी ने एसआईटी गठित की और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को तलब किया। सोनारपुर हमले के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए पूछताछ में उनकी उपस्थिति पर सस्पेंस बना हुआ है।

मुख्य बातें

सीआईडी ने टीएमसी विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में 5 सदस्यीय एसआईटी गठित की, जिसका नेतृत्व डीआईजी रैंक के अधिकारी कर रहे हैं।
अभिषेक बनर्जी को सोमवार दोपहर भवानी भवन , कोलकाता में पूछताछ के लिए तलब किया गया है।
जांच का केंद्र विधानसभा में विपक्ष के नेता, दो उपनेताओं और मुख्य सचेतक के नामांकन प्रस्ताव पर हस्ताक्षरों में कथित असमानता है।
विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस के निर्देश पर हस्ताक्षर विवाद सामने आने के बाद मामला सीआईडी को सौंपा गया था।
30 मई को सोनारपुर में कथित हमले के बाद अभिषेक बनर्जी की स्वास्थ्य स्थिति के कारण उनकी पूछताछ में उपस्थिति अनिश्चित बनी हुई है।

पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों के मामले की जांच को और तेज करते हुए एक पाँच सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। 1 जून 2026 को सामने आई इस जानकारी के अनुसार, टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को सोमवार दोपहर कोलकाता स्थित सीआईडी मुख्यालय भवानी भवन में पूछताछ के लिए तलब किया गया है।

एसआईटी की संरचना और जांच का दायरा

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, गठित एसआईटी का नेतृत्व डीआईजी रैंक के एक अधिकारी कर रहे हैं। दल में एक डीएसपी और दो इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। जांच का केंद्र पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता, दो उपनेताओं और मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के नामांकन से जुड़े प्रस्ताव पर कुछ टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित असमानता है।

गौरतलब है कि प्रस्ताव जमा करने से पूर्व, अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में विधानसभा सचिवालय को पत्र भेजकर शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, नयना बंद्योपाध्याय और असीमा पात्रा को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक नामित किया था।

मामला कैसे पहुँचा सीआईडी तक

विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षरों वाला प्रस्ताव जमा करने पर जोर दिया था। जब कुछ हस्ताक्षरों में कथित असमानता पाई गई, तो मामले को जांच के लिए सीआईडी को सौंप दिया गया। इसके बाद सीआईडी ने 30 मई को अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया।

जांच अधिकारी शुरुआत में नोटिस देने के लिए हरिश मुखर्जी रोड स्थित उनके आवास पर पहुँचे थे। जब पता चला कि वह कालीघाट रोड स्थित दूसरे आवास पर हैं, तो अधिकारी वहाँ पहुँचे और उन्हें व्यक्तिगत रूप से नोटिस सौंपा। अभिषेक बनर्जी ने बाद में कहा था कि वह कानूनी सलाह के अनुसार जांच में पूरा सहयोग करेंगे।

अभिषेक बनर्जी की स्वास्थ्य स्थिति और पूछताछ पर अनिश्चितता

इस बीच, अभिषेक बनर्जी के सीआईडी मुख्यालय में उपस्थित होने को लेकर अटकलें जारी हैं। 30 मई को दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में उनके साथ कथित धक्का-मुक्की और हमले की घटना के बाद, शनिवार को दो निजी अस्पतालों ने उन्हें भर्ती करने से इनकार कर दिया था।

इसके बाद उनकी बुआ और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उन्हें कालीघाट रोड स्थित आवास पर वापस ले गईं। ममता बनर्जी ने कहा था कि उनके भतीजे के इलाज के लिए घर पर ही अस्पताल जैसी सुविधा तैयार की गई है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अभिषेक बनर्जी अपने आवास के निकट स्थित भवानी भवन में पूछताछ के लिए जाएंगे।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की राह

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के भीतर नेतृत्व को लेकर अंदरूनी खींचतान की चर्चाएँ जोर पकड़ रही हैं। विधानसभा में विपक्षी पदों के नामांकन से जुड़े इस विवाद ने पार्टी की आंतरिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े किए हैं। जांच के नतीजे और अभिषेक बनर्जी की पूछताछ में भागीदारी — दोनों ही आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों के बीच की खाई को उजागर करता है। सीआईडी की एसआईटी का गठन और अभिषेक बनर्जी को नोटिस — ये कदम राज्य पुलिस की स्वायत्तता या राजनीतिक दबाव, दोनों में से किसी एक की कहानी कहते हैं, और यही असली सवाल है जिसका जवाब जांच को देना होगा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएमसी विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी जांच किस बारे में है?
यह जांच पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता, दो उपनेताओं और मुख्य सचेतक के नामांकन प्रस्ताव पर कुछ टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित असमानता से जुड़ी है। विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस के निर्देश पर यह मामला सीआईडी को सौंपा गया था।
अभिषेक बनर्जी को सीआईडी ने क्यों तलब किया है?
अभिषेक बनर्जी ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में विधानसभा सचिवालय को पत्र भेजकर विपक्षी पदों के लिए नामांकन किया था। उसी प्रस्ताव पर विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित विसंगतियाँ पाई गईं, जिसके चलते उन्हें भवानी भवन में पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
सीआईडी की एसआईटी में कौन-कौन शामिल हैं?
गठित एसआईटी में पाँच सदस्य हैं — नेतृत्व डीआईजी रैंक के एक अधिकारी कर रहे हैं, और टीम में एक डीएसपी तथा दो इंस्पेक्टर भी शामिल हैं।
क्या अभिषेक बनर्जी सीआईडी पूछताछ में शामिल होंगे?
अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि वह कानूनी सलाह के अनुसार जांच में पूरा सहयोग करेंगे। हालाँकि, 30 मई को सोनारपुर में कथित हमले के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनकी उपस्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
सोनारपुर हमले का इस मामले से क्या संबंध है?
सोनारपुर हमला और फर्जी हस्ताक्षर मामला दोनों अलग-अलग घटनाएँ हैं, लेकिन दोनों एक साथ सामने आई हैं। हमले के बाद अभिषेक बनर्जी की स्वास्थ्य स्थिति के कारण उनकी सीआईडी पूछताछ में उपस्थिति संदिग्ध बनी हुई है, जिससे दोनों घटनाक्रम राजनीतिक रूप से जुड़ गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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