19 जुलाई 2026
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बंगाल हस्ताक्षर जालसाजी विवाद: CID ने 4 सदस्यीय SIT गठित की, DIG करेंगे नेतृत्व

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बंगाल हस्ताक्षर जालसाजी विवाद: CID ने 4 सदस्यीय SIT गठित की, DIG करेंगे नेतृत्व

सारांश

पश्चिम बंगाल में TMC विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित जालसाजी का विवाद अब CID की 4 सदस्यीय SIT तक पहुँच गया है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी पर यह संकट तब आया जब विपक्ष के नेता की नियुक्ति संबंधी पत्र पर विधानसभा अध्यक्ष ने सवाल उठाए।

मुख्य बातें

CID ने 1 जून 2026 को TMC विधायकों के हस्ताक्षर जालसाजी मामले में 4 सदस्यीय SIT गठित की।
SIT का नेतृत्व DIG रैंक के अधिकारी करेंगे; दल में एक DSP और दो इंस्पेक्टर शामिल।
विधानसभा अध्यक्ष ने TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी के पत्र को अस्वीकार करते हुए हस्ताक्षरों पर सवाल उठाए।
कोलकाता के हेयर स्ट्रीट थाने में विधानसभा की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है।
सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हमले के मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पश्चिम बंगाल की आपराधिक जांच विभाग (CID) ने 1 जून 2026 को एक चार सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित जालसाजी की जांच करेगी। यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक की नियुक्ति से जुड़े एक पत्र के सिलसिले में उठा है। SIT का नेतृत्व DIG रैंक के एक अधिकारी के हाथ में होगा, जबकि एक DSP और दो इंस्पेक्टर इसके सदस्य होंगे।

विवाद की जड़ क्या है

TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र भेजा गया था, जिसमें विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक की नियुक्ति का प्रस्ताव था। विधानसभा अध्यक्ष ने इस पत्र को स्वीकार करने से इनकार करते हुए सवाल उठाया कि किस अधिकार के तहत महासचिव द्वारा यह प्रस्ताव भेजा गया। उन्होंने यह भी पूछा कि जिन विधायकों ने इन नेताओं का चयन किया है, उनके हस्ताक्षर कहाँ हैं।

हस्ताक्षर असमानता और शिकायत

जाँच में कुछ TMC विधायकों के हस्ताक्षरों में असमानता पाई गई। इसके बाद विधानसभा की ओर से कोलकाता के हेयर स्ट्रीट थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने CID की सहायता से जाँच शुरू की और अब CID ने SIT का गठन कर इस मामले को संस्थागत जाँच के दायरे में ला दिया है।

विधानसभा परिसर में तनाव

इस विवाद के बाद कुछ TMC नेताओं ने विधानसभा परिसर में नारेबाजी की। वे विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की माँग को लेकर कई बार उनके कक्ष के बाहर पहुँचे, लेकिन उन्हें मुलाकात नहीं मिली।

अभिषेक बनर्जी पर हमला और गिरफ्तारियाँ

इसी बीच, अभिषेक बनर्जी विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा में मारे गए एक TMC कार्यकर्ता के परिवार से मिलने सोनारपुर गए, जहाँ प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने कथित तौर पर उन पर अंडे और ईंट के टुकड़े फेंके। पुलिस के अनुसार, इस हमले से संबंधित 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सोनारपुर थाने की टीम ने रातभर इलाके में सर्च अभियान चलाया और हमले से जुड़े वीडियो फुटेज की भी जाँच की गई।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब TMC विधानसभा चुनाव में हार के बाद संगठनात्मक संकट से जूझ रही है। SIT की जाँच के नतीजे यह तय करेंगे कि हस्ताक्षर जालसाजी का मामला आगे किस दिशा में जाता है। गौरतलब है कि यह पूरा विवाद पार्टी के भीतर और विधानसभा में विपक्षी नेतृत्व की संरचना को लेकर चल रही खींचतान का हिस्सा प्रतीत होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में हस्ताक्षर जालसाजी का मामला क्या है?
यह मामला TMC विधायकों के उन हस्ताक्षरों से जुड़ा है जो विधानसभा में विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक की नियुक्ति संबंधी पत्र पर लगाए गए थे। जाँच में कुछ हस्ताक्षरों में असमानता मिलने के बाद विधानसभा की ओर से हेयर स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
CID की SIT में कौन-कौन शामिल हैं?
CID की 4 सदस्यीय SIT का नेतृत्व DIG रैंक के एक अधिकारी के हाथ में है। इसमें एक DSP और दो इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने TMC का पत्र क्यों अस्वीकार किया?
विधानसभा अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि किस अधिकार के तहत TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से विपक्षी नेतृत्व की नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा गया। उन्होंने यह भी पूछा कि जिन विधायकों ने इन नेताओं का चयन किया है, उनके हस्ताक्षर कहाँ हैं।
अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में क्या हुआ?
अभिषेक बनर्जी विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा में मारे गए एक TMC कार्यकर्ता के परिवार से मिलने सोनारपुर गए थे। वहाँ प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने कथित तौर पर उन पर अंडे और ईंट के टुकड़े फेंके। इस मामले में अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इस विवाद का TMC पर क्या असर पड़ेगा?
विधानसभा चुनाव में हार के बाद यह विवाद TMC के लिए संगठनात्मक दबाव और बढ़ा सकता है। SIT की जाँच के नतीजे यह तय करेंगे कि हस्ताक्षर जालसाजी का मामला कानूनी रूप से कितना आगे बढ़ता है और विपक्षी नेतृत्व की नियुक्ति का मसला कब सुलझता है।
राष्ट्र प्रेस
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