बंगाल हस्ताक्षर विवाद: CID ने TMC विधायकों के हैंडराइटिंग सैंपल मांगे, कोर्ट से मिली मंज़ूरी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायकों के कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जाँच कर रही CID ने बैंकशाल कोर्ट से तीन विधायकों के हस्तलेखन (हैंडराइटिंग) नमूने एकत्र करने की अनुमति माँगी है, जिसे अदालत ने मंज़ूरी दे दी है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि यह आवेदन विधायकों बहारुल इस्लाम, सुभाशीष दास और अरूप रॉय के संबंध में दाखिल किया गया था।
मुख्य घटनाक्रम
मामले की जाँच के लिए CID ने DIG रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में पाँच सदस्यीय विशेष जाँच दल (SIT) गठित किया है। यह प्रकरण विधानसभा सचिव की ओर से हेयर स्ट्रीट थाने में दर्ज शिकायत के बाद सामने आया, जिसमें कुछ TMC विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित विसंगतियों का आरोप लगाया गया था। कोलकाता पुलिस के साथ मिलकर CID जाँच आगे बढ़ा रही है।
पार्टी से निष्कासन और राजनीतिक मोड़
सोमवार को तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में दो विधायकों — ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा — को पार्टी से निष्कासित कर दिया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नबन्ना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि विधानसभा हस्ताक्षर जालसाजी मामले को लेकर स्पीकर को लिखित शिकायत इन्हीं दोनों विधायकों ने सौंपी थी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इसी शिकायत के आधार पर विधानसभा सचिवालय ने हेयर स्ट्रीट थाने में मामला दर्ज कराया था। उन्होंने कहा कि पुलिस मंत्री होने के नाते उन्होंने जाँच में CID को शामिल करने का निर्देश दिया।
विवाद की जड़: 6 मई की बैठक
विधानसभा चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित होने के बाद TMC के सामने विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक के चयन को लेकर प्रक्रियागत जटिलताएँ खड़ी हो गई थीं। 6 मई को ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित आवास पर नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई, जिसमें हाथ उठाकर यह प्रस्ताव पारित हुआ कि पदाधिकारियों के चयन का अंतिम फैसला ममता करेंगी।
इसके बाद पार्टी ने सोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, नयना बंद्योपाध्याय व असीमा पात्रा को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक नियुक्त करने की घोषणा की। पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर वाला पत्र विधानसभा को भेजा गया, लेकिन सचिवालय ने यह कहते हुए स्वीकार नहीं किया कि संसदीय दल की औपचारिक बैठक की प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।
19 मई की बैठक और हस्ताक्षर विवाद
इसके बाद 19 मई को कालीघाट में दूसरी बैठक बुलाई गई, जहाँ विधायकों से 6 मई की बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) पर हस्ताक्षर करने को कहा गया। कुछ विधायकों का आरोप है कि उनसे कथित तौर पर पुरानी कार्यवाही पर हस्ताक्षर करवाए गए, जिससे विवाद गहराया।
अब तक की पूछताछ
जाँच के दौरान CID अब तक नयना बंद्योपाध्याय, कुणाल घोष, तापस माइती और बहारुल इस्लाम के आवास पर जाकर पूछताछ कर चुकी है। सोमवार को अभिषेक बनर्जी को भी पूछताछ के लिए तलब किया गया था, परंतु उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पेश होने में असमर्थता जताई।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब TMC आंतरिक संगठनात्मक पुनर्गठन के दौर से गुज़र रही है। अब निगाहें हस्तलेखन नमूनों की फॉरेंसिक रिपोर्ट और SIT की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।