19 जुलाई 2026
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बंगाल हस्ताक्षर विवाद: CID ने TMC विधायकों के हैंडराइटिंग सैंपल मांगे, कोर्ट से मिली मंज़ूरी

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बंगाल हस्ताक्षर विवाद: CID ने TMC विधायकों के हैंडराइटिंग सैंपल मांगे, कोर्ट से मिली मंज़ूरी

सारांश

पश्चिम बंगाल विधानसभा हस्ताक्षर जालसाजी मामले ने TMC के भीतर हलचल मचा दी है। CID ने तीन विधायकों के हैंडराइटिंग सैंपल लेने की कोर्ट से अनुमति ले ली, दो विधायक निष्कासित हो चुके हैं, और अभिषेक बनर्जी तक जाँच का दायरा पहुँच चुका है — यह सिर्फ़ हस्ताक्षरों का नहीं, पार्टी की आंतरिक सत्ता-संरचना का इम्तिहान है।

मुख्य बातें

CID ने बैंकशाल कोर्ट से TMC विधायकों बहारुल इस्लाम , सुभाशीष दास और अरूप रॉय के हैंडराइटिंग सैंपल लेने की अनुमति माँगी, जो मंज़ूर हो गई।
जाँच के लिए DIG रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में पाँच सदस्यीय SIT गठित।
TMC ने सोमवार को ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित किया।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, स्पीकर को लिखित शिकायत इन्हीं दोनों विधायकों ने दी थी।
विवाद की जड़ 6 मई और 19 मई को कालीघाट में हुई बैठकों की कार्यवाही पर कराए गए हस्ताक्षरों से जुड़ी है।
CID ने अभिषेक बनर्जी को भी तलब किया, परंतु उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से पेश होने में असमर्थता जताई।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायकों के कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जाँच कर रही CID ने बैंकशाल कोर्ट से तीन विधायकों के हस्तलेखन (हैंडराइटिंग) नमूने एकत्र करने की अनुमति माँगी है, जिसे अदालत ने मंज़ूरी दे दी है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि यह आवेदन विधायकों बहारुल इस्लाम, सुभाशीष दास और अरूप रॉय के संबंध में दाखिल किया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

मामले की जाँच के लिए CID ने DIG रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में पाँच सदस्यीय विशेष जाँच दल (SIT) गठित किया है। यह प्रकरण विधानसभा सचिव की ओर से हेयर स्ट्रीट थाने में दर्ज शिकायत के बाद सामने आया, जिसमें कुछ TMC विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित विसंगतियों का आरोप लगाया गया था। कोलकाता पुलिस के साथ मिलकर CID जाँच आगे बढ़ा रही है।

पार्टी से निष्कासन और राजनीतिक मोड़

सोमवार को तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में दो विधायकों — ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा — को पार्टी से निष्कासित कर दिया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नबन्ना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि विधानसभा हस्ताक्षर जालसाजी मामले को लेकर स्पीकर को लिखित शिकायत इन्हीं दोनों विधायकों ने सौंपी थी।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इसी शिकायत के आधार पर विधानसभा सचिवालय ने हेयर स्ट्रीट थाने में मामला दर्ज कराया था। उन्होंने कहा कि पुलिस मंत्री होने के नाते उन्होंने जाँच में CID को शामिल करने का निर्देश दिया।

विवाद की जड़: 6 मई की बैठक

विधानसभा चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित होने के बाद TMC के सामने विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक के चयन को लेकर प्रक्रियागत जटिलताएँ खड़ी हो गई थीं। 6 मई को ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित आवास पर नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई, जिसमें हाथ उठाकर यह प्रस्ताव पारित हुआ कि पदाधिकारियों के चयन का अंतिम फैसला ममता करेंगी।

इसके बाद पार्टी ने सोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, नयना बंद्योपाध्यायअसीमा पात्रा को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक नियुक्त करने की घोषणा की। पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर वाला पत्र विधानसभा को भेजा गया, लेकिन सचिवालय ने यह कहते हुए स्वीकार नहीं किया कि संसदीय दल की औपचारिक बैठक की प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।

19 मई की बैठक और हस्ताक्षर विवाद

इसके बाद 19 मई को कालीघाट में दूसरी बैठक बुलाई गई, जहाँ विधायकों से 6 मई की बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) पर हस्ताक्षर करने को कहा गया। कुछ विधायकों का आरोप है कि उनसे कथित तौर पर पुरानी कार्यवाही पर हस्ताक्षर करवाए गए, जिससे विवाद गहराया।

अब तक की पूछताछ

जाँच के दौरान CID अब तक नयना बंद्योपाध्याय, कुणाल घोष, तापस माइती और बहारुल इस्लाम के आवास पर जाकर पूछताछ कर चुकी है। सोमवार को अभिषेक बनर्जी को भी पूछताछ के लिए तलब किया गया था, परंतु उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पेश होने में असमर्थता जताई।

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब TMC आंतरिक संगठनात्मक पुनर्गठन के दौर से गुज़र रही है। अब निगाहें हस्तलेखन नमूनों की फॉरेंसिक रिपोर्ट और SIT की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर असल में TMC के संसदीय दल पर नियंत्रण की लड़ाई है। ममता बनर्जी ने हाथ उठवाकर पदाधिकारी चुनने की जो शैली अपनाई, उसी पर विधानसभा सचिवालय की प्रक्रियागत आपत्ति ने पार्टी की आंतरिक असहमति को संस्थागत रूप दे दिया है। दो विधायकों का निष्कासन और अभिषेक बनर्जी की तलबी एक ही तस्वीर के दो छोर हैं — पार्टी अनुशासन बनाम राज्य तंत्र का इस्तेमाल। फॉरेंसिक रिपोर्ट चाहे जो कहे, राजनीतिक नुकसान पहले ही दर्ज हो चुका है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बंगाल हस्ताक्षर विवाद मामला क्या है?
यह पश्चिम बंगाल विधानसभा से जुड़ा वह मामला है, जिसमें TMC के कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित विसंगतियों का आरोप लगाया गया है। विधानसभा सचिव की शिकायत पर हेयर स्ट्रीट थाने में केस दर्ज हुआ और कोलकाता पुलिस के साथ CID जाँच कर रही है।
CID ने किन TMC विधायकों के हैंडराइटिंग सैंपल मांगे हैं?
CID ने बैंकशाल कोर्ट में आवेदन देकर विधायक बहारुल इस्लाम, सुभाशीष दास और अरूप रॉय के हस्तलेखन नमूने एकत्र करने की अनुमति माँगी थी, जिसे अदालत ने मंज़ूर कर लिया है।
TMC ने किन विधायकों को पार्टी से निष्कासित किया है?
तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को निष्कासित कर दिया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, स्पीकर को हस्ताक्षर जालसाजी की लिखित शिकायत इन्हीं दोनों ने सौंपी थी।
क्या अभिषेक बनर्जी से भी पूछताछ हुई?
CID ने सोमवार को अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए तलब किया था, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पेश होने में असमर्थता जताई। मामले की जाँच जारी है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
4 मई को चुनाव परिणाम के बाद विपक्ष के नेता और पदाधिकारियों के चयन को लेकर प्रक्रिया पर सवाल उठे। 6 मई और 19 मई को कालीघाट में हुई बैठकों में विधायकों से कथित तौर पर पुरानी कार्यवाही पर हस्ताक्षर कराए जाने के आरोप के बाद विवाद ने कानूनी रूप ले लिया।
राष्ट्र प्रेस
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