8 जुलाई 2026
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जीपीए से स्टाम्प ड्यूटी चोरी पर दिल्ली सरकार का कड़ा प्रहार, सब-रजिस्ट्रारों को सख्त जांच के आदेश

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जीपीए से स्टाम्प ड्यूटी चोरी पर दिल्ली सरकार का कड़ा प्रहार, सब-रजिस्ट्रारों को सख्त जांच के आदेश

सारांश

दिल्ली सरकार ने जीपीए की आड़ में हो रही स्टाम्प ड्यूटी चोरी पर सीधा प्रहार किया है। रक्त संबंधों से बाहर की जीपीए अब सीधे पंजीकृत नहीं होगी — हर मामला कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स के पास जाएगा। उल्लंघन करने वाले सब-रजिस्ट्रारों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर 8 जुलाई 2026 को जीपीए से स्टाम्प ड्यूटी चोरी रोकने की नई व्यवस्था लागू की गई।
रक्त संबंधों (माता-पिता, जीवनसाथी, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन) से बाहर की सभी जीपीए अब कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स के पास अनिवार्य रूप से भेजी जाएंगी।
कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स को 30 दिनों के भीतर लिखित आदेश देना होगा; विशेष मामलों में अधिकतम तीन महीने की छूट।
प्रत्येक सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में अलग रजिस्टर और मासिक रिपोर्ट अनिवार्य।
नियम उल्लंघन करने वाले सब-रजिस्ट्रारों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान।

दिल्ली सरकार ने 8 जुलाई 2026 को जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) के माध्यम से संपत्ति हस्तांतरण में कथित तौर पर हो रही स्टाम्प ड्यूटी चोरी पर अंकुश लगाने के लिए एक नई और कड़ी व्यवस्था लागू की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर राजधानी के सभी सब-रजिस्ट्रारों को जीपीए से जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच करने और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए गए हैं।

क्यों उठाया गया यह कदम

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, कई मामलों में संपत्ति की वास्तविक बिक्री और मालिकाना हक के हस्तांतरण को सामान्य जीपीए का स्वरूप देकर केवल नाममात्र की स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान किया जाता रहा है। ऐसे दस्तावेजों में संपत्ति का कब्जा सौंपने, बिक्री करने या स्थायी अधिकार देने जैसी शर्तें शामिल होती हैं, जिससे सरकारी राजस्व को सीधा नुकसान पहुँचता है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'स्टाम्प ड्यूटी की चोरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।' सरकार का उद्देश्य अचल संपत्तियों के पंजीकरण में होने वाले राजस्व नुकसान को रोकना, लैंड माफिया और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाना तथा सरकारी राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

नई व्यवस्था में क्या बदला

नए नियमों के तहत प्रत्येक जीपीए दस्तावेज की जांच के दौरान सब-रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित करेंगे कि — उसमें धन के लेनदेन का उल्लेख है या नहीं, संपत्ति का कब्जा सौंपा जा रहा है या नहीं, और क्या दस्तावेज अपरिवर्तनीय प्रकृति का है अथवा उसमें संपत्ति को बेचने, उपहार में देने, स्थानांतरित करने या गिरवी रखने का स्थायी अधिकार दिया गया है।

गौरतलब है कि माता-पिता, जीवनसाथी, पुत्र, पुत्री, भाई और बहन जैसे रक्त संबंधों से बाहर किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में बनाई गई जीपीए को सब-रजिस्ट्रार अब सीधे पंजीकृत नहीं कर सकेंगे। ऐसे सभी मामलों को अनिवार्य रूप से संबंधित कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स के पास भेजा जाएगा, जहाँ दस्तावेज की प्रकृति के आधार पर उचित स्टाम्प ड्यूटी तय होगी।

समयसीमा और जवाबदेही

कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स को प्रत्येक ऐसे मामले में 30 दिनों के भीतर लिखित और कारणयुक्त आदेश जारी करना होगा। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि अधिकतम तीन महीने तक बढ़ाई जा सकती है। निर्धारित स्टाम्प ड्यूटी जमा होने के बाद ही संबंधित दस्तावेज का पंजीकरण संभव होगा।

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में अनधिकृत संपत्ति हस्तांतरण और लैंड माफिया की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। प्रत्येक सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में ऐसे मामलों का अलग रजिस्टर रखा जाएगा और मासिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि कोई सब-रजिस्ट्रार कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स की अनुमति के बिना ऐसे दस्तावेजों का पंजीकरण करता है, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह कदम राजधानी में संपत्ति पंजीकरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक निर्णायक बदलाव माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या मामले महीनों लंबित रहेंगे और खरीदार-विक्रेता दोनों परेशान होंगे। मासिक रिपोर्टिंग और अलग रजिस्टर की व्यवस्था सही दिशा में है, लेकिन बिना डिजिटल ऑडिट ट्रेल और सार्वजनिक डेटा प्रकाशन के, यह पारदर्शिता केवल कागज़ों तक सीमित रह सकती है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली सरकार ने जीपीए पर नई व्यवस्था क्यों लागू की?
कई मामलों में संपत्ति की वास्तविक बिक्री को जीपीए का रूप देकर नाममात्र की स्टाम्प ड्यूटी चुकाई जा रही थी, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा था। इस चोरी और लैंड माफिया पर अंकुश लगाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर यह नई व्यवस्था लागू की गई है।
नई व्यवस्था में जीपीए पंजीकरण की प्रक्रिया क्या होगी?
रक्त संबंधों (माता-पिता, जीवनसाथी, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन) से बाहर किसी के पक्ष में बनाई गई जीपीए को सब-रजिस्ट्रार सीधे पंजीकृत नहीं कर सकेंगे। ऐसे सभी मामले कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स के पास भेजे जाएंगे, जहाँ उचित स्टाम्प ड्यूटी निर्धारित होने के बाद ही पंजीकरण होगा।
कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स को निर्णय लेने में कितना समय मिलेगा?
कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स को प्रत्येक मामले में 30 दिनों के भीतर लिखित और कारणयुक्त आदेश जारी करना होगा। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि अधिकतम तीन महीने तक बढ़ाई जा सकती है।
नियम तोड़ने वाले सब-रजिस्ट्रारों पर क्या कार्रवाई होगी?
यदि कोई सब-रजिस्ट्रार कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स की अनुमति के बिना ऐसे दस्तावेजों का पंजीकरण करता है, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा प्रत्येक सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में ऐसे मामलों का अलग रजिस्टर रखा जाएगा और मासिक रिपोर्ट तैयार होगी।
इस बदलाव से आम संपत्ति खरीदारों पर क्या असर पड़ेगा?
जो लोग परिवार के बाहर किसी व्यक्ति को जीपीए देकर संपत्ति हस्तांतरित करना चाहते हैं, उन्हें अब कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स की प्रक्रिया से गुजरना होगा और उचित स्टाम्प ड्यूटी चुकानी होगी। वैध लेनदेन पर इसका असर नहीं पड़ेगा, लेकिन प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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