सेंसेक्स 76,861 पर सपाट शुरुआत, निफ्टी आईटी 2% उछला — 28 जुलाई बाज़ार अपडेट
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाज़ार ने 28 जुलाई 2026 को मंगलवार के कारोबारी सत्र में सपाट शुरुआत की। सुबह 9:28 बजे IST पर BSE सेंसेक्स मात्र 32 अंक की मामूली बढ़त के साथ 76,861 पर और NSE निफ्टी 50 6 अंक की बढ़त के साथ 24,002 पर कारोबार कर रहा था। शुरुआती सत्र में आईटी शेयरों में उल्लेखनीय खरीदारी देखी गई, जबकि रक्षा, ऊर्जा और धातु क्षेत्र दबाव में रहे।
आईटी क्षेत्र की अगुवाई
निफ्टी आईटी इंडेक्स 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ शीर्ष गेनर रहा। टीसीएस, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और एचसीएल टेक सेंसेक्स पैक में बढ़त पर थे। इनके अलावा एचयूएल, एशियन पेंट्स, सन फार्मा, इंडिगो, आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी और बजाज फिनसर्व भी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। निफ्टी रियल्टी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी सर्विसेज़, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा भी बढ़त में थे।
दबाव में रहे क्षेत्र
दूसरी तरफ बीईएल, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, एसबीआई, टाटा स्टील, टाइटन, भारती एयरटेल, ट्रेंट, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और एमएंडएम लाल निशान में थे। सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी पीएसई, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी मेटल और निफ्टी ऑटो गिरावट में थे।
मिड और स्मॉलकैप का हाल
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी सीमित दायरे में कारोबार हुआ। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 2 अंक की मामूली बढ़त के साथ 62,307 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 60 अंक की कमज़ोरी के साथ 19,062 पर फिसला।
वैश्विक बाज़ार और कच्चा तेल
वैश्विक बाज़ारों में मिला-जुला रुख रहा। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और सोल के बाज़ार लाल निशान में थे। इसके विपरीत, अमेरिकी बाज़ार पिछले सत्र में तेजी के साथ बंद हुए थे — डाओ जोन्स में 0.51 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। अमेरिका और ईरान के बीच हमले रुकने की खबरों से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी हुई है; ब्रेंट क्रूड $85 प्रति बैरल से नीचे और WTI क्रूड $82 प्रति बैरल के करीब है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाज़ार जानकारों के अनुसार, मौजूदा हल्की तेजी को बनाए रखने में सक्षम कई सकारात्मक कारक मौजूद हैं। हालाँकि, यह तेजी एकसमान और निरंतर बने रहने की संभावना नहीं है — बीच-बीच में मुनाफावसूली और सुधार के दौर आ सकते हैं। कच्चे तेल में नरमी घरेलू मुद्रास्फीति के लिहाज़ से सकारात्मक संकेत है, जिसका असर आने वाले सत्रों में बाज़ार की धारणा पर पड़ सकता है।