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दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: बैंक यूनियनों के प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगह पर पुलिस सोमवार तक दे फैसला

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दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: बैंक यूनियनों के प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगह पर पुलिस सोमवार तक दे फैसला

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है कि बैंक यूनियनों के 28-30 सितंबर के प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थल पर सोमवार शाम 4 बजे तक निर्णय लें। यूनियनें बार-बार आवेदन के बावजूद समय पर अनुमति न मिलने को अपने मौलिक अधिकारों का हनन बता रही हैं।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अमित महाजन ने पुलिस को सोमवार शाम 4 बजे IST तक वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल पर फैसला देने का आदेश दिया।
बैंक यूनियनें 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहती हैं।
पुलिस ने जंतर-मंतर पर अनुमति देने से मना किया; द्वारका सेक्टर-10 में अनुमति ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का हवाला देकर अस्वीकार की गई।
18 सितंबर के प्रदर्शन के लिए 1 सितंबर को आवेदन किया गया था, लेकिन जवाब 17 सितंबर की रात 10 बजे — प्रदर्शन से ऐन पहले — अस्वीकृति के रूप में मिला।
याचिका में आरोप: देरी और इनकार से यूनियनों का संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ख) के तहत शांतिपूर्ण सभा का मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहा है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 25 सितंबर 2026 को पुलिस को निर्देश दिया कि 28, 29 और 30 सितंबर को प्रस्तावित बैंक यूनियनों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर के अलावा किसी वैकल्पिक स्थल की माँग पर सोमवार शाम 4 बजे तक निर्णय लिया जाए। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने यह स्पष्ट आदेश देते हुए कहा कि पुलिस अपने फैसले की जानकारी बैंक यूनियनों के वकील को तय समय-सीमा के भीतर दे।

मामले की पृष्ठभूमि

बैंक यूनियनों ने पहले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति माँगी थी, जिसे पुलिस ने कानून-व्यवस्था संबंधी कठिनाइयों का हवाला देकर अस्वीकार कर दिया। इसके बाद यूनियनों ने रामलीला मैदान, राजेंद्र प्लेस और द्वारका सेक्टर-10 में प्रदर्शन के लिए भी आवेदन दिया। द्वारका में अनुमति कथित तौर पर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का हवाला देकर नहीं दी गई।

बार-बार अनुमति न मिलने की शिकायत

याचिका के अनुसार, 18 सितंबर के प्रदर्शन के लिए 1 सितंबर को डीसीपी, पार्लियामेंट स्ट्रीट को आवेदन दिया गया था, लेकिन 17 दिनों तक कोई जवाब नहीं मिला। अंततः 17 सितंबर की रात लगभग 10 बजे अनुमति खारिज किए जाने की सूचना दी गई — जो प्रदर्शन से महज कुछ घंटे पहले था। 11 सितंबर के प्रदर्शन के लिए 27 अगस्त को ही अनुमति माँगी गई थी, यह दर्शाता है कि यूनियनें काफी पहले से प्रक्रिया शुरू कर रही थीं।

मौलिक अधिकारों पर सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन की अनुमति में देरी या अनुमति न देने से यूनियनों के शांतिपूर्ण सभा और प्रदर्शन के मौलिक अधिकार — जो संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ख) के तहत संरक्षित हैं — प्रभावित हो रहे हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब श्रम संगठन और सरकारी नीतियों के बीच तनाव को लेकर चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही है।

हाईकोर्ट का निर्देश और आगे की राह

न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कोर्ट में कहा कि पुलिस सोमवार शाम 4 बजे IST तक वैकल्पिक स्थल को लेकर अपना स्पष्ट निर्णय यूनियनों के वकील को सूचित करे। यदि पुलिस समय-सीमा में जवाब नहीं देती, तो यह मामला न्यायालय की अवमानना का रूप ले सकता है। बैंक यूनियनों का कहना है कि बार-बार आवेदन करने के बावजूद समय पर अनुमति न मिलना उनकी विरोध-प्रदर्शन की योजना को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। अब सभी की निगाहें पुलिस के उस जवाब पर टिकी हैं जो सोमवार को आएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि प्रक्रियात्मक थकान की रणनीति जैसा प्रतीत होता है। दिल्ली हाईकोर्ट का हस्तक्षेप यह भी रेखांकित करता है कि विरोध के अधिकार की संवैधानिक सुरक्षा कागज़ों तक ही सीमित न रहे, इसके लिए न्यायपालिका को बार-बार सक्रिय होना पड़ रहा है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट ने बैंक यूनियनों के प्रदर्शन मामले में क्या आदेश दिया?
दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को प्रस्तावित बैंक यूनियनों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर के अलावा वैकल्पिक स्थल देने पर सोमवार शाम 4 बजे तक निर्णय लिया जाए। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने यह आदेश बैंक यूनियनों की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी?
पुलिस ने अदालत को बताया कि जंतर-मंतर पर कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याएँ हैं, इसलिए वहाँ अनुमति देना संभव नहीं। द्वारका सेक्टर-10 में अनुमति कथित तौर पर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का हवाला देकर अस्वीकार की गई थी।
बैंक यूनियनों ने क्या आरोप लगाए हैं?
यूनियनों का आरोप है कि बार-बार समय पर आवेदन करने के बावजूद उन्हें या तो देर से जवाब मिला या प्रदर्शन से ऐन पहले अनुमति खारिज की गई। 18 सितंबर के प्रदर्शन के लिए 1 सितंबर को आवेदन दिया था, लेकिन 17 सितंबर की रात 10 बजे अस्वीकृति मिली। इससे उनके संविधान के तहत शांतिपूर्ण सभा के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है।
बैंक यूनियनों ने किन-किन स्थानों पर प्रदर्शन की अनुमति माँगी थी?
यूनियनों ने जंतर-मंतर के अलावा रामलीला मैदान, राजेंद्र प्लेस और द्वारका सेक्टर-10 में प्रदर्शन की अनुमति के लिए भी संपर्क किया था, लेकिन सभी जगहों पर अनुमति देने में देरी हुई या इनकार किया गया।
इस मामले में आगे क्या होगा?
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार पुलिस को सोमवार शाम 4 बजे IST तक बैंक यूनियनों के वकील को वैकल्पिक स्थल को लेकर अपना स्पष्ट निर्णय सूचित करना होगा। यदि पुलिस समय-सीमा का पालन नहीं करती, तो मामला न्यायालय में अगले चरण तक जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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