3 नवंबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट का केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस; त्योहारी सीजन में सेंट्रल दिल्ली में धरने पर रोक की मांग

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सुप्रीम कोर्ट का केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस; त्योहारी सीजन में सेंट्रल दिल्ली में धरने पर रोक की मांग

सारांश

त्योहारी सीजन में ₹2,000 करोड़ के नुकसान का हवाला देकर व्यापारियों ने सुप्रीम कोर्ट से सेंट्रल दिल्ली में 2 महीने तक धरना-प्रदर्शन पर रोक माँगी। CJI सूर्यकांत ने केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किया — यह मामला विरोध के अधिकार और व्यापारिक हितों की टकराहट का नया मोर्चा खोलता है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 3 नवंबर 2026 को किराना कमेटी की याचिका पर केंद्र सरकार , दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया।
याचिका में त्योहारी सीजन में सेंट्रल दिल्ली में अगले 2 महीनों तक धरना-प्रदर्शन पर रोक की मांग की गई है।
वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि प्रदर्शनों से व्यापारियों को ₹2,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि CJP ने 1 दिन की अनुमति के बावजूद 17 दिन तक प्रदर्शन-स्थल पर कब्जा रखा।
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि कोई भी संगठन निर्धारित प्रदर्शन-स्थल पर अनिश्चितकाल के लिए नहीं बैठ सकता।

सर्वोच्च न्यायालय ने 3 नवंबर 2026 को दिल्ली के व्यापारियों की संस्था किराना कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। याचिका में त्योहारी सीजन के दौरान सेंट्रल दिल्ली में धरना-प्रदर्शन पर अस्थायी रोक लगाने की मांग की गई है। व्यापारियों का कहना है कि इन प्रदर्शनों से ₹2,000 करोड़ से अधिक का व्यावसायिक नुकसान हो चुका है।

व्यापारियों के वकील की दलीलें

व्यापारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत में कहा कि जंतर-मंतर और रामलीला मैदान जैसे विरोध-स्थल आज के शहरी परिवेश के लिए अनुपयुक्त हो चुके हैं। उन्होंने तर्क दिया, 'आज हम इन जगहों से लगभग 80 साल आगे आ चुके हैं। रामलीला मैदान कनॉट प्लेस (CP) से मात्र 1 मील दूर है, और उस इलाके में 50 लाख लोग रहते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि त्योहारों के सीजन में बिक्री न हो, तो व्यापारियों की आमदनी गंभीर रूप से प्रभावित होती है।

रोहतगी ने अगले 2 महीनों तक किसी भी विरोध-प्रदर्शन या धरने पर रोक लगाने की अपील की और नए सिरे से किसी वैकल्पिक समाधान की माँग की।

सॉलिसिटर जनरल और विपक्ष की प्रतिक्रिया

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जो भी संगठन 'बंद' का आह्वान करता है, उसे उसकी जिम्मेदारी भी लेनी होगी। उन्होंने बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को प्रदर्शन की अनुमति सिर्फ 1 दिन के लिए दी गई थी, लेकिन संगठन ने 17 दिनों तक उस स्थान पर कब्जा बनाए रखा और बिना अनुमति के संसद की ओर मार्च भी किया।

विपक्ष की ओर से वकील हरिहरन ने पलटवार करते हुए कहा कि यह एक अधिसूचित प्रदर्शन-स्थल है और अब इससे भी आपत्ति जताई जा रही है — जो संवैधानिक अधिकारों को संकुचित करने का प्रयास है।

मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियाँ

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि जिन संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं, उन्हें भी इस मामले में पक्षकार बनाया जाए, क्योंकि उनके जवाब के बिना कोई भी अदालत निर्णय नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन की अनुमति देने या न देने संबंधी आदेश में स्पष्ट कारण दर्ज होने चाहिए।

CJI ने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति या संगठन किसी निर्धारित प्रदर्शन-स्थल पर अनिश्चितकाल के लिए कब्जा नहीं कर सकता, क्योंकि उस स्थान पर प्रदर्शन का अधिकार सभी को समान रूप से मिला हुआ है। उन्होंने उदाहरण देते हुए पूछा, 'यदि किसान भी विरोध-प्रदर्शन करना चाहें, तो वे कहाँ जाएँगे?' सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वकीलों के एक-दूसरे को बीच में टोकने के तरीके पर नाराजगी जताई और कहा कि अदालत को 'फिश मार्केट' न बनाएं।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में त्योहारी सीजन अपने चरम पर है और व्यापारी पहले से ही आर्थिक दबाव में हैं। गौरतलब है कि यह मामला विरोध के संवैधानिक अधिकार और नागरिक जीवन की सहजता के बीच लंबे समय से चली आ रही कानूनी बहस को फिर से सामने लाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

CJP के 17 दिनों के कब्जे जैसी मिसालें यह भी दिखाती हैं कि अनुमति की सीमाओं का उल्लंघन एक वास्तविक समस्या है। असली मुद्दा यह है कि क्या प्रशासन के पास कोई पारदर्शी, कानूनी और संतुलित ढाँचा है जो दोनों पक्षों को न्याय दे सके — यह मुकदमा उसी रिक्तता को उजागर करता है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में धरना-प्रदर्शन पर रोक की याचिका पर किसे नोटिस जारी किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 3 नवंबर 2026 को किराना कमेटी की याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। याचिका में त्योहारी सीजन के दौरान सेंट्रल दिल्ली में धरना-प्रदर्शन पर 2 महीने तक रोक लगाने की माँग की गई है।
व्यापारियों ने कितने नुकसान का दावा किया है?
किराना कमेटी की ओर से पेश वकील मुकुल रोहतगी ने सर्वोच्च न्यायालय में दलील दी कि धरना-प्रदर्शन और रैलियों की वजह से व्यापारियों को ₹2,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन में बिक्री न होने से व्यापारियों की आमदनी गंभीर रूप से प्रभावित होती है।
CJP पर प्रदर्शन-अनुमति के उल्लंघन का क्या आरोप है?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को प्रदर्शन की अनुमति केवल 1 दिन के लिए दी गई थी, लेकिन संगठन ने 17 दिनों तक उस स्थान पर कब्जा बनाए रखा और बिना अनुमति के संसद की ओर मार्च भी किया।
CJI सूर्यकांत ने इस मामले में क्या अहम टिप्पणी की?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी संगठन किसी निर्धारित प्रदर्शन-स्थल पर अनिश्चितकाल के लिए नहीं बैठ सकता, क्योंकि उस स्थान पर प्रदर्शन का अधिकार सभी को समान रूप से प्राप्त है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन संगठनों ने प्रदर्शन किए हैं, उन्हें पक्षकार बनाए बिना कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
इस मामले में आगे क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से नोटिस का जवाब तलब किया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि प्रदर्शन करने वाले संगठनों को पक्षकार बनाया जाए ताकि सभी पक्षों को सुनने के बाद ही कोई निर्णय लिया जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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