सीटीआई ने भैया दूज तक दिल्ली में रैलियों पर रोक की मांग, अक्टूबर-नवंबर में ₹14,000 करोड़ के नुकसान का दावा
सारांश
मुख्य बातें
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने 3 नवंबर 2026 को दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर माँग की है कि 11 नवंबर (भैया दूज) तक कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर, रामलीला मैदान, इंडिया गेट, राजघाट और दिल्ली गेट सहित सेंट्रल व पुरानी दिल्ली के प्रमुख इलाकों में किसी भी रैली, धरना-प्रदर्शन या विरोध मार्च की अनुमति न दी जाए। संगठन का दावा है कि 1 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच लगातार प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के व्यापारियों को लगभग ₹14,000 करोड़ का कारोबारी नुकसान उठाना पड़ा है।
नुकसान का ब्यौरा: कितना और कहाँ
सीटीआई के अनुसार, नुकसान दो चरणों में हुआ। 1 अक्टूबर से 30 अक्टूबर के बीच जंतर-मंतर, पटेल चौक और जनपथ पर लगातार प्रदर्शनों से सेंट्रल दिल्ली में ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही, जिससे कनॉट प्लेस, पालिका बाज़ार, खान मार्केट, करोल बाग, पहाड़गंज और कमला मार्केट में रिटेल, होटल, रेस्तरां और ट्रांसपोर्ट कारोबार को लगभग ₹3,000 करोड़ का घाटा हुआ।
दूसरा और अधिक बड़ा झटका 1 नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित मेगा रैली के कारण लगा। सीटीआई का दावा है कि उस एक दिन में विभिन्न क्षेत्रों को कुल मिलाकर लगभग ₹11,000 करोड़ का नुकसान हुआ, जिसमें खुदरा और थोक व्यापार क्षेत्र की हिस्सेदारी अकेले ₹8,800 करोड़ रही।
रामलीला मैदान के आसपास बंद हुईं ढाई लाख दुकानें
सीटीआई के मुताबिक, रामलीला मैदान के पाँच किलोमीटर के दायरे में लगभग 3 लाख दुकानें हैं। इनमें कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, चावड़ी बाज़ार, खारी बावली, सदर बाज़ार, दरियागंज, भागीरथ पैलेस, करोल बाग और कनॉट प्लेस जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्र शामिल हैं। रैली वाले दिन इनमें से लगभग 2.5 लाख दुकानें पूरी तरह बंद रहीं और करीब 80 प्रतिशत व्यावसायिक गतिविधियाँ ठप हो गईं।
संगठन ने यह भी बताया कि रैली के कारण सोनीपत, गुरुग्राम, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ और फरीदाबाद सहित आसपास के लगभग 100 शहरों और कस्बों से आने वाले 3-4 लाख ग्राहकों ने अपनी खरीदारी की योजना रद्द कर दी।
ट्रांसपोर्ट और असंगठित क्षेत्र पर असर
सीटीआई ने ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में ₹1,500 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया है। संगठन के अनुसार, नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी और उद्योग नगर सहित 56 औद्योगिक क्षेत्रों से रोज़ाना आने वाले लगभग 5,000 ट्रक और टेम्पो ट्रैफिक जाम में फँसे रहे। एलजेएन मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग और नेताजी सुभाष मार्ग पर वाहन घंटों रुके रहे।
असंगठित क्षेत्र की बात करें तो इन बाज़ारों में काम करने वाले 20 लाख कर्मचारियों — जिनमें लोडर, ऑटो-ई-रिक्शा चालक, रेहड़ी-पटरी वाले और पोर्टर शामिल हैं — की एक दिन की दिहाड़ी मारी गई। संगठन ने इस मद में लगभग ₹200 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया है।
त्योहारी सीज़न में व्यापारियों की तीन माँगें
सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि 6 नवंबर (धनतेरस), 8 नवंबर (दिवाली) और 11 नवंबर (भैया दूज) के बीच का समय दिल्ली के लगभग 20 लाख व्यापारियों और 75 लाख कर्मचारियों के लिए साल का सबसे बड़ा कारोबारी अवसर है। उन्होंने कहा, 'अगर रोज-रोज रैलियाँ और विरोध-प्रदर्शन होते रहे, तो दिवाली का पूरा कारोबार बर्बाद हो जाएगा। व्यापारी अब और नुकसान सहने की स्थिति में नहीं हैं।'
सीटीआई ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर के समक्ष तीन प्रमुख माँगें रखी हैं: पहली, 11 नवंबर तक सेंट्रल दिल्ली में किसी भी रैली या धरने की अनुमति न दी जाए; दूसरी, प्रदर्शनों के लिए बुराड़ी, अलीपुर, जसोला और यमुना खादर जैसी वैकल्पिक जगहें तय की जाएँ; और तीसरी, त्योहारी सीज़न के दौरान सेंट्रल दिल्ली में ट्रैफिक व पार्किंग का समुचित प्रबंध हो।
आगे क्या होगा
गोयल ने चेतावनी दी कि अगर त्योहारी सीज़न में भी व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होता रहा, तो वे अपनी दुकानों की चाबियाँ रैलियाँ आयोजित करने वालों को सौंपने पर मजबूर हो जाएँगे। दिल्ली पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि यह माँग ऐसे समय में आई है जब दिल्ली में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की रैलियों का सिलसिला जारी है और त्योहारी खरीदारी का सीज़न अपने चरम पर है।