31 अक्टूबर 2026
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इंडिया ब्लॉक की 'दिल्ली चलो' रैली से पहले व्यापारियों का विरोध, राहुल गांधी पर ₹10,000 करोड़ नुकसान की चेतावनी

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इंडिया ब्लॉक की 'दिल्ली चलो' रैली से पहले व्यापारियों का विरोध, राहुल गांधी पर ₹10,000 करोड़ नुकसान की चेतावनी

सारांश

धनतेरस से चार दिन पहले दिल्ली के 300 साल पुराने बाजारों के व्यापारियों ने इंडिया ब्लॉक की 'दिल्ली चलो' रैली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। CTI का कहना है कि राहुल गांधी को तीन पत्र लिखने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला और रैली से ₹10,000 करोड़ से अधिक का कारोबारी नुकसान हो सकता है।

मुख्य बातें

CTI के व्यापारियों ने 31 अक्टूबर को कमला बाजार, दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की 1 नवंबर की 'दिल्ली चलो' रैली के खिलाफ पोस्टर अभियान चलाया।
रैली रामलीला मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित चुनावी अनियमितताओं के विरोध में आयोजित है।
CTI अध्यक्ष बृजेश गोयल ने चेतावनी दी कि बैरिकेडिंग से दिल्ली के कारोबार को ₹10,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हो सकता है।
कमला बाजार की दुकानें लगभग 300 साल पुरानी हैं; धनतेरस केवल चार दिन दूर है।
CTI ने राहुल गांधी , मल्लिकार्जुन खड़गे , अखिलेश यादव , ममता बनर्जी , तेजस्वी यादव और उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर रैली स्थान बदलने की अपील की।

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) से जुड़े दिल्ली के व्यापारियों ने 31 अक्टूबर को कमला बाजार में दुकानों के बाहर पोस्टर लगाकर इंडिया ब्लॉक की 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित 'दिल्ली चलो' रैली का विरोध दर्ज कराया। व्यापारियों का कहना है कि यह रैली धनतेरस से ठीक पहले आयोजित होने के कारण दिल्ली के कारोबार को ₹10,000 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुँचा सकती है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को तीन बार पत्र लिखने के बावजूद कोई जवाब न मिलने पर व्यापारियों ने यह पोस्टर अभियान शुरू किया।

विरोध का कारण और पोस्टर अभियान

पोस्टरों पर लिखा गया नारा था — 'राजनीति के बाजार में मोहब्बत की दुकान बंद मत कीजिए' — जो सीधे तौर पर राहुल गांधी की 'मोहब्बत की दुकान' वाली राजनीतिक भाषा को संदर्भित करता है। व्यापारियों का उद्देश्य रैली का स्थान बदलवाना था, न कि रैली को रुकवाना। गौरतलब है कि यह रैली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित चुनावी अनियमितताओं के विरोध में आयोजित की जा रही है।

CTI अध्यक्ष की चेतावनी

CTI के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा, 'हमने राहुल गांधी और खड़गे जी को तीन बार पत्र लिखा, लेकिन वे सहमत नहीं हुए। आज हम यह संदेश देने आए हैं कि कृपया राजनीति के बाजार में हमारी मोहब्बत की दुकान को बंद न करें।' उन्होंने बताया कि कमला बाजार की ये दुकानें लगभग 300 साल पुरानी हैं और शाम से ही वहाँ भय का माहौल बन गया है।

गोयल ने आगाह किया कि रैली में कथित तौर पर 10 लाख लोगों और बड़ी संख्या में वाहनों के आने की बात कही जा रही है, जिससे माल की लोडिंग-अनलोडिंग बाधित होगी। उनके अनुसार, यदि बैरिकेडिंग के कारण दुकानदारों को दुकानें बंद करने पर मजबूर होना पड़ा, तो दिल्ली के कारोबार को ₹10,000 करोड़ से अधिक का नुकसान होगा।

त्योहारी सीजन में व्यापार पर असर

गोयल ने विशेष रूप से त्योहारी मौसम का हवाला दिया — 'धनतेरस के लिए केवल चार दिन बचे हैं और चांदनी चौक से लेकर करोल बाग तक मुगल काल की सभी दुकानों का कारोबार प्रभावित होगा, जिसमें माल परिवहन भी शामिल है।' यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के थोक और खुदरा बाजार त्योहारी सीजन की सबसे व्यस्त बिक्री अवधि में होते हैं।

व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी राजनीतिक दल से प्रेरित नहीं है। गोयल के शब्दों में, 'लोकतंत्र में लोगों को विरोध करने का अधिकार है, हमें केवल इस विरोध के समय और स्थान पर आपत्ति है।'

इंडिया ब्लॉक के नेताओं को पत्र

CTI ने 31 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव, और शिवसेना-UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे सहित इंडिया ब्लॉक के प्रमुख नेताओं को पत्र लिखकर 1 नवंबर की रैली पर पुनर्विचार का आग्रह किया। यह पहल दर्शाती है कि व्यापारी समुदाय का विरोध केवल एक नेता तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे गठबंधन को संबोधित है।

आगे क्या

रैली 1 नवंबर को रामलीला मैदान में निर्धारित है और अब तक इसके स्थान में बदलाव के कोई संकेत नहीं मिले हैं। व्यापारी संगठनों की नज़र इस बात पर है कि प्रशासन बैरिकेडिंग और यातायात प्रबंधन को लेकर क्या व्यवस्था करता है, ताकि कारोबारी नुकसान को कम किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन CTI ने उसी भाषा को पलटकर विपक्ष की संवेदनहीनता पर सवाल उठाया है — यह राजनीतिक रूप से चतुर कदम है। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष ने रैली की तारीख और स्थान चुनते समय स्थानीय व्यापारियों से कोई परामर्श किया? तीन पत्रों का जवाब न देना दर्शाता है कि बड़े राजनीतिक संदेश की चाह में आम व्यापारी की चिंता हाशिये पर चली जाती है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया ब्लॉक की 'दिल्ली चलो' रैली किस बात के विरोध में है?
यह रैली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित चुनावी अनियमितताओं के विरोध में 1 नवंबर को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में आयोजित की जा रही है। इसे इंडिया ब्लॉक के प्रमुख दलों ने मिलकर बुलाया है।
CTI के व्यापारी रैली का विरोध क्यों कर रहे हैं?
CTI का कहना है कि रैली धनतेरस से ठीक चार दिन पहले है और बैरिकेडिंग से चांदनी चौक से करोल बाग तक के बाजारों में माल परिवहन और बिक्री बाधित होगी। संगठन के अनुसार इससे दिल्ली के कारोबार को ₹10,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हो सकता है।
CTI ने राहुल गांधी को कितनी बार पत्र लिखा?
CTI अध्यक्ष बृजेश गोयल के अनुसार संगठन ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को तीन बार पत्र लिखा, लेकिन दोनों में से किसी ने भी सहमति नहीं दी। इसके बाद व्यापारियों ने पोस्टर अभियान शुरू किया।
क्या व्यापारी रैली को पूरी तरह रद्द करवाना चाहते हैं?
नहीं। CTI ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध रैली के समय और स्थान को लेकर है, न कि विरोध के अधिकार को लेकर। व्यापारी केवल यह चाहते हैं कि रैली का स्थान बदला जाए ताकि कारोबारी नुकसान से बचा जा सके।
CTI ने और किन इंडिया ब्लॉक नेताओं से अपील की?
CTI ने समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, RJD के तेजस्वी यादव और शिवसेना-UBT के उद्धव ठाकरे को भी पत्र लिखकर 1 नवंबर की रैली पर पुनर्विचार का आग्रह किया।
राष्ट्र प्रेस
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