सेंसेक्स 73,725 पर खुला, 151 अंक की बढ़त; रियल्टी और ऑटो सेक्टर अगुआ
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाज़ार शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को हल्की तेज़ी के साथ खुला। सुबह 9:17 बजे IST पर BSE सेंसेक्स 151 अंक (0.20%) की बढ़त के साथ 73,725 पर और NSE निफ्टी 50 26 अंक (0.11%) चढ़कर 23,091 पर कारोबार कर रहा था। मिश्रित वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की ऊँची कीमतों के बीच बाज़ार में सतर्कता का माहौल बना रहा।
सेक्टोरल प्रदर्शन: किसने संभाला, किसने गँवाया
शुरुआती कारोबार में निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो शीर्ष लाभार्थी रहे। निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी PSU बैंक, निफ्टी मेटल, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग और निफ्टी मीडिया भी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।
दूसरी ओर, निफ्टी IT, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी कमोडिटीज़ दबाव में थे और लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज़ी ने तेल एवं गैस शेयरों की लागत संरचना पर दबाव बढ़ाया है।
मिडकैप और स्मॉलकैप: व्यापक बाज़ार में भी हल्की मज़बूती
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 10 अंक की बढ़त के साथ 61,001 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 5 अंक की मामूली तेज़ी के साथ 19,688 पर था। लार्जकैप के साथ-साथ व्यापक बाज़ार में भी हल्की तेज़ी देखी गई, जो संकेत देता है कि बिकवाली का दबाव किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है।
सेंसेक्स के प्रमुख शेयर: गेनर्स और लूज़र्स
सेंसेक्स पैक में L&T, Axis Bank, M&M, Power Grid, SBI, Bajaj Finance, ICICI Bank, IndiGo, Asian Paints, Bharti Airtel, Bajaj Finserv, Kotak Mahindra Bank, Maruti Suzuki, HCL Tech और Titan बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।
वहीं Infosys, TCS, Tech Mahindra, HUL, Eternal, NTPC, Tata Steel, Sun Pharma, Trent और ITC गिरावट में थे। IT शेयरों का दबाव विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुस्ती IT निर्यात राजस्व पर असर डाल सकती है।
वैश्विक बाज़ार: मिलाजुला रुख
वैश्विक मोर्चे पर टोक्यो और बैंकॉक के बाज़ार हरे निशान में थे, जबकि ऑस्ट्रेलिया और जकार्ता में गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाज़ार लाल निशान में बंद हुए थे — डाउ जोन्स 0.31% की गिरावट के साथ बंद हुआ था।
गौरतलब है कि यह वैश्विक अनिश्चितता ऐसे समय में है जब अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीतिगत दिशा पर बाज़ारों की नज़र टिकी है।
विशेषज्ञों की राय और निवेशकों के लिए संकेत
बाज़ार जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और लगातार बनी हुई महंगाई के कारण अक्टूबर में अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरें फिर से बढ़ाने की संभावना बढ़ गई है। इससे बाज़ार में बड़ी तेज़ी आने की गुंजाइश फिलहाल सीमित मानी जा रही है।
जानकारों का कहना है कि बड़ी रैली तभी संभव है जब कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट हो। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए सुझाव है कि वे बाज़ार की मौजूदा कमज़ोरी का उपयोग मज़बूत बुनियादी ढाँचे वाले लार्जकैप शेयरों में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने के लिए कर सकते हैं, जो आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं।